ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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शिव जी मगन होकर नाच रहे,
भक्तों को शिव पर नाज रहे।
गले में पहने साँपों की माला,
कानों में बिच्छू कुंडल वाला।
और हाथ में डमरू डम-डम बाजे,
शिव के तन पर है भस्मी साजे।
शिव जी पीकर भंग हुए मतवाला,
हलाहल पीकर नीलकंठी वाला।
जटा में गंगा कलकल समाए,
सिर पर चंदा चक-मक विराजे।
हाथ में त्रिशूल ले मस्त हो चले,
पार्वती को ब्याहने शिवजी चले।
शिव जी करते तांडव नृत्य,
उग्र और तीव्र गति वाला नृत्य।
आनंद के साथ करते नृत्य,
वही तो होता है आनंद नृत्य।
नृत्य में सृजन पालन संहार मुक्ति,
माया का अवतरण दर्शाते शिव॥