नई दिल्ली।
तकनीकी विकास और बाजार की व्यवस्था ने कुछ हद तक मुक्ति भी दी है और एक अलग तरीके से अन्यायपूर्ण व्यवस्था भी बनाई है। लेखक का स्वप्न है कि ऐसा समाज बन सके जो न्याय आधारित हो। मेरा कहानी लेखन इसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है कि हमारा समाज अधिक मानवीय बन सके।
सुप्रसिद्ध कथाकार पंकज मिश्र ने अपने पर केंद्रित विख्यात लघु पत्रिका बनास जन के लोकार्पण अवसर पर यह बात कही। आपने अपने पाठकों का सबसे अधिक ऋण स्वीकार किया, जिनके कारण वे लगातार सक्रिय रह सके। हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में एक सादे समारोह में वरिष्ठ उपन्यासकार रणेन्द्र, लेखक अनुवादक दिगम्बर, चर्चित कथाकार कविता और अरुण कुमार असफल ने बनास जन के उक्त लोकार्पण किया। इसमें लगभग १२ आलोचकों ने विस्तार से श्री मिश्र की कहानियों का विश्लेषण- मूल्यांकन किया है।
आयोजन में साहित्यकार रणेन्द्र ने कहा कि पंकज मिश्र पर विशेषांक का प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि हिंदी साहित्य समाज ने गंभीर और जनपक्षधर लेखकों का महत्व स्वीकार किया है। कथाकार कविता ने कहा कि अपनी पीढ़ी के श्रेष्ठ कहानी सर्जक के रूप में वे जाने जाते रहेंगे।