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साहित्य व्यक्ति और राष्ट्र को संस्कारित करने वाली शक्ति

दिल्ली।

साहित्य व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र को संस्कारित करने वाली शक्ति है। यह मानवता, पावनता और सहिष्णुता के मूल्यों को पुष्ट करता है।
वरिष्ठ साहित्यकार, संपादक व चिंतक प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव ने कविता प्रभा राष्ट्रीय साहित्य समूह के वार्षिकोत्सव का सुव्रती पार्क में दीप प्रज्ज्वलन शुभारम्भ करते हुए कही। उन्होंने संस्थापक डॉ. कविता सिंह ‘प्रभा’ के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ (कर्नाटक) ने कहा कि साहित्य मानव को बुद्धत्व की ओर अग्रसर करता है और उसे देवमानव से महामानव बनने की प्रेरणा देता है।
यहाँ देशभर के कवियों की उपस्थिति में ८ कालजयी पुस्तकों का लोकार्पण तथा १० पुस्तकों को कृति सम्मान २०२५ दिए गए। समारोह में वरिष्ठ कवयित्री मधु मिश्रा, शरद सिंह, डॉ. सविता चड्डा, ऋषि कुमार शर्मा व श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ आदि को सम्मानित किया गया।

मंच संचालन उमंग जौली सरीन, डॉ. ममता झा रुद्रांशी और प्रेरणा सिंह ने किया। धन्यवाद उपाध्यक्ष राजीव गौतम ने माना।