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साहित्य से जुड़कर ही संतुष्टि प्राप्त करता है रूतबा

मंदसौर (मप्र)।

ज्ञान की देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस भी प्रकृति को संस्कृति से जोड़ता है। अपनी संस्कृति को आत्मसात करने पर ही व्यक्ति सुकून का अनुभव करता है, क्योंकि व्यक्ति अपनी उपलब्धियों से रूतबा तो हासिल कर लेता है, किन्तु ‘रूतबा’ साहित्य से जुडकर ही संतुष्टि प्राप्त कर सकता है।
यह बात नगर मंदसौर नगर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र राठौर ने मुख्य अतिथि के रूप में कही। अवसर रहा अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित वसंत काव्य गोष्ठी का, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम बटवाल और ब्रजेश जोशी का विशेष आतिथ्य रहा।
इस अवसर पर कवि नरेन्द्र त्रिवेदी, नरेन्द्र भावसार, श्रीमती चंदा डांगी व दीपिका कोशारी ने काव्य पाठ किया। सरस्वती वंदना राजकुमार अग्रवाल ने प्रस्तुत की।
संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया। आभार नन्दकिशोर राठौर ने माना।