आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
***************************************************
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (४ मार्च) विशेष…
सुरक्षा दिवस पर एक बुद्ध संदेश,
दुर्घटना करता नाश स्वयं और देश
ध्यान व अध्यान में है, अंतर विशेष,
सुरक्षा कवच को तोड़े, तो रहे न शेष।
‘बिजली’ हमारी है परम धरम की मित्र,
लापरवाही बचाती सिर्फ आपका चित्र
बिजली शत्रु कट्टर भी है और विचित्र,
हर जगह पर लगाए हैं, निर्देश सचित्र।
ज़िंदगी को हँसाएं, मौत को भगाएं,
हेलमेट, जूता, मॉस्क, गॉगल्स अपनाएं
ध्वनि क्षेत्र में ईयर प्लग को न भुलाएं,
मोटर साइकिल में दो हेलमेट अपनाएं।
अपनी सुरक्षा, कामगार साथी की सुरक्षा बढ़ाएँ,
बिजली के काम पर पहले दायाँ हाथ ही लगाएँ
बाएँ हाथ से बिजली के काम पर रोक लगाएँ,
हृदय रक्त पम्प है, इसे विद्युत आघात से बचाएं।
नोज मॉस्क आपकी स्वास्थ्य जिम्मेदारी है,
फाइन कोल डस्ट और ऐश डस्ट से बड़ी बीमारी है
आपकी छाती में प्रवेश करके लाता लाचारी है,
याद रहे यह लाइलाज, स्वयं की बड़ी जिम्मेदारी है।
उद्योगों में उच्च तापमान पर एप्रन लेना समझदारी,
उच्च दवाब में रूट वॉल्व, उपकरण वॉल्व बंद की तैयारी
अति उत्साह में दुर्घटना लाती है बड़ी महामारी, बीमारी,
सुरक्षा संदेश, वैधानिक चेतावनी पालन है खुशगुजारी।
५ एस, टीपीएम, सुरक्षा प्रथम का ध्यान रखें बारी-बारी,
दस्ताना, हेलमेट, जूता, मॉस्क, चश्मा, ईयर प्लग में सुरक्षा सारी
आपकी लापरवाही देश, उद्योग, परिवारों का जीवन करता है भारी,
सुरक्षा दिवस पर सभी की सुरक्षा संकल्प जिम्मेदारी हमारी।
२ फीसदी मशीनों की, ९८ फीसदी मानव की गड़बड़ी ये कहता मैं,
काम कहीं व ध्यान कहीं दुर्घटना का मूल हड़बड़ी कहता मैं।
हवाई जहाज हो या सड़क दुर्घटना या देख रहा ये युद्ध हूँ मैं,
सुरक्षा का हमदर्द, शांति का दर्द लिए, युद्ध का बुद्ध हूँ मैं॥
परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”