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सूर्यदेव कृपा बरसती, हरते कष्ट

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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मकर संक्रांति विशेष…

सूर्यदेव-शनि महाराज की दंत कथा को याद करेंगे आज,
पिता सूर्य देव के पुत्र शनिदेव संग अनबन रहे मिजाज
क्रूर दृष्टि पितृ अभिशप्त शनि थे, मकर राशि के स्वामी राज,
मकर संक्रान्ति पर मिलते हैं पिता सूर्यदेव से शनि महाराज।

मकर संक्रान्ति में दोनों की पूजा से होता सुख, समृद्धि, उल्लास,
सूर्यदेव कृपा बरसती, हरते कष्ट, संकट सभी, देते दिव्य प्रकाश
नदियों के स्नान से मिलती जीवन में सदगति, मिटती भूख और प्यास,
पुण्य धरा पर पुल्कित होता जन- जीवन, प्राणियों के लिए है खास।

भगवन विष्णु ने किया था असुर शक्तियों का नाश,
इस कारण यह विजय दिवस है मकर संक्रान्ति मास
महिषासुर सिर काटे विष्णु, देवों को दिव्यशक्ति प्रवास,
विष्णु जी के तेज प्रकाश पुंज से हुआ असुरों का विनाश।

मकर संक्रान्ति के अवसर पर खुशियाँ बड़ी तमाम,
रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाते हैं धरती व आसमान
असुरों पर इस महा विजय की खुशियों का है पैग़ाम,
प्रातः स्नान ध्यान कर, ब्राह्मण को करें अन्नदान।

किवदंती हैं राजा भागीरथ की तपस्या से आई माँ गंगा,
ॐ शिव, भागीरथ तपस्या से प्रसन्न हो जटा में बांधी गंगा
भगवान शिव ने जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर माँ गंगा को उतारा,
भगवान ने बचाया पृथ्वी को, बहुत तेज थी माँ गंगा की धारा।

राजा भागीरथ की तपस्या से ही आई है जीवन की धारा,
खेती की रानी, हरियाली और प्रकृति महारानी गंगा जलधारा
मकर संक्रान्ति पर लाखों नर-नारी को मोक्ष देता प्रयागराज हमारा,
लाखों-लाख को मोक्ष देती अंतिम गंगा सागर में गंगा संग सागर धारा।

मकर संक्रान्ति पर अलग प्रकृति का विचार, स्वरूप व धारा,
कहीं तिलकुट, तिल लड्डू, लाई चूड़ा- गुड़ लड्डू, अनेक व्यंजन सारा।
कहीं चूड़ा दही, कहीं नए चावल की खिचड़ी का जोरदार भंडारा,
मकर संक्रांति, खिचड़ी, पोंगल, लोहड़ी, पौष संक्रांति उत्तरायणी, माघ बिहू, मकर संक्रमण पर्व मनाता है देश हमारा॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”