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स्त्रियाँ

वंदना जैन
मुम्बई(महाराष्ट्र)
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नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…

वो आधी चंद्रमा-सी है,
आधी–अधूरी मुस्कान लिए
पूरा दर्द छुपाया करती है,
वो सूर्य-सा तेज लेकर
चंद्रमा को रिझाया करती है।

दुपट्टा सर पर रख कर वो,
जब मंदिर जाया करती है
प्रार्थनाओं और आभारों की,
टोकरी सजाया करती है
फूल चुन–चुन कर विश्वास की,
माला पिरोया करती है।

सींच कर परिवार के वट वृक्ष को,
वो मन्नत धागा पहनाया करती है
वो बच्चों-सी नाराज होकर,
कभी-कभी चुप हो जाया करती है
संतानों की मंगलकामना में,
प्रतीक्षा में रात आँखें बिछाया करती है।

सुनती है हर बात पर कुछ नहीं कह पाती,
मूक बन कर आँखों से सुनाया करती है
वो दोस्त है, प्रेमिका भी, हमराज भी,
वो हर रिश्ता निभाया करती है।

जलप्रपात-सी बहती कठिनाइयों को,
आँचल में भर मुस्कुराया करती है
सिक्कों को छुपा–छुपा कर,
कण-कण बचाया करती है।

मनोबल और दृढ़ता में पर्वत-सी,
सौम्य शीतल छाया वृक्ष-सी
आधुनिक प्रगति में ढली-सी।
स्त्री तो उपेक्षित होकर भी,
अपना अस्तित्व दिखाया करती है॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’