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स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा

🔹’नर्मदा साहित्य मंथन’ के पांचवे सोपान का केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने किया उद्घाटन
🔹देशभर के चिंतकों ने रखी हर सत्र में विषय पर अपनी बात

🔹विवि के मुख्य सभागार में शुभारंभ, पुस्तक मेला व प्रदर्शनी भी

इंदौर (मप्र)।

स्वबोध से ही भारत सोने का शेर बन सकेगा। आज भी कहा जाता है कि हमें भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाना है। हमें भारत को ‘सोने की चिड़िया’ नहीं, सोने का शेर बनाना है। देश की आजादी के बाद हम अपने स्व के बोध को भूल गए। भारत उदय तभी होगा, जब हम अपने मन में आने वाले विचार पर मंथन करेंगे। इसमें नागरिक केवल स्वदेशी को अपनाकर पूर्ण योगदान दे सकता है।
देश के प्रतिष्ठित ‘नर्मदा साहित्य मंथन’ के पांचवें सोपान का शुक्रवार को इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में यह बात उद्घाटन सत्र में केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने ‘भारत उदय का आधार:स्वबोध’ विषय पर कही। राज्यपाल ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन किया। विश्व संवाद केंद्र मालवा व देअविवि की पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला द्वारा आयोजित इस मंथन में देशभर से बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन शामिल हुए। पहले दिन ७ सत्रों में वरिष्ठ चिंतकों और विचारकों ने अपनी बात रखी। इस अवसर पर पुस्तक मेला और प्रदर्शनी भी लगायी गई है। अभिव्यक्ति के मंच पर भी कई प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। समारोह में विवि के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई, विश्व सवांद केंद्र मालवा प्रान्त के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता एवं मंथन के संयोजक श्रीरंग पेंढारकर उपस्थित रहे।

🔵युवा हमेशा से ही सृजन का वाहक
प्रथम सत्र को ‘भविष्य का भारत और हम’ विषय पर संबोधित करते हुए संघ के मध्य क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्द्र सक्सेना ने कहा कि युवा पीढ़ी की अपनी-अपनी भूमिका रही है और युवा हमेशा से ही उसे निभाता आया है। कोई भी पीढ़ी, कोई भी समय हो युवा हमेशा से ही सृजन का वाहक रहा है। पिता के एक कदम को आगे बढ़ाने की परंपरा युवाओं ने हमेशा निभायी है। क्षेत्रवाद जैसी चुनौतियाँ भी हमारे सामने है, लेकिन भारत के पास इनसे निपटने की आंतरिक शक्ति है।
🔵गाँवों में कोई गरीब नहीं हो
द्वितीय सत्र को ‘गाँव से भारत उदय’ विषय पर सम्बोधित करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के प्रमुख अभय महाजन ने कहा कि गाँवों के विकास के बिना भारत उदय की परिकल्पना संभव ही नहीं है। गाँवों में भारत की आत्मा बसती है। भारत की असली पहचान ही उसके गाँव है, इसलिए राष्ट्र निर्माण की शुरुआत गाँवों से ही होती है। ग्राम को संस्कारवान, आत्मनिर्भर और स्वालंबी करना होगा, तभी भारत उदय का सपना साकार होगा। आज जरूरत इस बात की है कि गाँवों में कोई गरीब, बेकार और अस्वस्थ नहीं हो। गाँवों के युवाओं को शिक्षित करने की जरूरत है।
🔵रोमन लिपि सबसे खराब
तृतीय सत्र को ‘शब्दों में ही सब कुछ है’ विषय पर साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि शब्द केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि वह अपने में शक्ति समाहित किए रहता है। शब्दों की शक्ति को हमें पहचानना चाहिए। वास्तव में देखें तो शब्द ही हमारी पहचान है। राष्ट्रीयता की भावना से यदि आप खुद को जुड़ा मानते हैं तो आपको अपनी भाषा के शब्दों का सम्मान करना ही चाहिए। रोमन लिपि को सबसे खराब बताते हुए आपने कहा कि देवनागरी लिपि सबसे अच्छी है। देवनागरी लिपि का हर अक्षर देवताओं के नाम से जुड़ा है।
🔵स्टार्ट-अप पर फोकस करना चाहिए
मंथन के चतुर्थ सत्र को ‘युवा भारत के सपने’ विषय पर अध्येता अनुराग शर्मा ने कहा कि युवा केवल अधिकारों के लिए ही नहीं, कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहे। श्री शर्मा ने कहा कि भारत के युवाओं को स्टार्ट-अप पर फोकस करना चाहिए, ताकि भारत को आर्थिक मजबूती भी मिल सके।
🔵राम और धर्म में कोई अंतर नहीं
पंचम सत्र को ‘भारत उदय का श्रीगणेश:अयोध्या’ विषय पर हनुमत पीठ अयोध्या के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी महाराज ने कहा कि अयोध्या में केवल रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हुई है बल्कि यह भारत में भारत की प्राण प्रतिष्ठा है। अयोध्या में भगवा रंग का क्षितिज पर चढ़ जाना ही भारत का वास्तविक उदय है। भारत यदि विश्व कल्याण के लिए पूरे विश्व के साथ संवाद करता है तो रामचरित्र मानस ही इसका माध्यम है। राम और धर्म में कोई अंतर नहीं है। धर्म का आधार ही राम है।
🔵मीडिया से उत्तरदायित्व की अपेक्षा
अंतिम सत्र में ‘संघ और मीडिया नैरेटिव’ विषय पर वरिष्ठ लेखक और पत्रकार विष्णु शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय समाज को देखने और समझने की एक समग्र दृष्टि प्रस्तुत करता है। संघ का मानना है, कि मीडिया केवल सूचना या समाचार देने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह समाज की सोच दिशा और संस्कारों को गहराई से प्रभावित करने वाली एक शक्तिशाली संस्था है। इसी कारण मीडिया द्वारा गढ़े गए नैरेटिव का समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। मीडिया की भूमिका पर संघ का स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र में मीडिया प्रहरी की भूमिका निभाता है। इसलिए उससे निष्पक्षता, तथ्यपरकता और उत्तरदायित्व की अपेक्षा की जाती है।