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एक विचलित नागरिक है इन कविताओं में

इंदौर।

श्रीराम दवे की कविताओं में एक विचलित नागरिक है,और समकाल में घटते हुए से परेशान होता है। यह ईमानदारी से लिखी गई कविताएँ हैं।
यह बात चित्रकार,चिंतक और कथाकार प्रभु जोशी ने जनवादी लेखक मासिक रचनापाठ में श्रीराम दवे की कविताओं पर चर्चा करते हुए कही। १५ जून को देवी अहिल्या केन्द्रीय पुस्तकालय में जनवादी लेखक संघ मासिक रचना पाठ में वाणी दवे ने प्रस्तुति,बिंदु,प्रैक्टिकल,बाँस के फूल सहित अपनी १० लघुकथाओं और श्रीराम दवे ने ओटला,आत्मीय यदि तुम हो,बुहारी,झरबेरी आदि सहित अपनी १२ कविताओं का पाठ किया।
लघुकथाओं पर चर्चा करते हुए कविता वर्मा ने कहा कि,यह अपने नए उपमानों के साथ अपनी कहन में सफल हैं। राजनारायण बोहरे ने सराहना करते हुए कहा कि इनमें कला विविधता की कमी अखरती है। सुरेश उपाध्याय व अशोक शर्मा ‘भारती’ ने कहा कि इन लघुकथाओं में अपना आसपास नज़र आता है और यह पुराने विषयों को भी नए ढंग से व्यक्त करती हैं। देवेंद्र रिणवा,पद्मा सिंह और शिरीन भावसार ने इन्हें अच्छी लघुकथाओं के रूप में रेखांकित किया।
प्रदीप मिश्र ने इन की भाषिक संरचना और विषय वस्तु को रेखांकित करते हुए कहा कि यह इसमें अपना अच्छा निर्वाह करती है। वरिष्ठ कथाकार सूर्यकांत नागर ने इन पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि रचना के मूल में अनुभव होता है,पर केवल अनुभव व घटना से नहीं,बल्कि उसमें शामिल अंतर्विरोधों से कहानी बनती है। प्रभु जोशी ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि,इन लघुकथाओं में लघुकथा के नहीं वरन छोटी कहानी के विषय है,जिन्हें अच्छी छोटी कथाओं के रूप में विस्तार दिया जा सकता है। उनकी कुछ कहानियों जैसे-बाँस के फूल,बिन्दु, प्रैक्टिकल आदि को लगभग सभी श्रोताओं ने सराहा।
श्रीराम दवे की कविताओं पर चर्चा करते हुए राजनारायण बोहरे ने कहा कि यह कविताएँ पाठक को अपने साथ ले लेती हैं और धीरे-धीरे खुलती हैं। कविता वर्मा,देवेंद्र रिणवा,पद्मा सिंह और सुरेश उपाध्याय ने इन्हें जीवनानुभवों की कविताओं के रेखांकित किया।
वरिष्ठ कवि प्रदीप कान्त ने कहा कि इन कविताओं में समाज से धीरे-धीरे गायब होती चीजें विषय वस्तु के रूप में आती हैं,जो कवि को विचलित करती है। रविन्द्र व्यास ने कविताओं के सराहनीय विषय वस्तु और भाषा पर चर्चा की। सूर्यकान्त नागर ने कहा कि इन कविताओं की एक अच्छी बात है कि इनमें विचारधारा का दबाव नहीं है,और संतुलित तौर पर लिखी गई कविताएँ है।
कार्यक्रम का संचालन रजनी रमण शर्मा ने किया। आभार देवेंद्र रिणवा ने। अंत में साहित्यकार गिरीश कनार्ड को श्रद्धांजलि दी की गई।