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मुश्किल जीना हो जाता

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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कुछ समाज की रीति बुरी है,
सच कहती हूँ बात खरी है,
माँ की ममता, बहन का प्यार,
हो जाता बिलकुल बेकार।

अगर पति का साथ नहीं है,
जीने का आधार नहीं है,
प्रश्न खड़ा तब हो जाता है,
मुश्किल जीना हो जाता है।

कौन सम्हालेगा परिवार,
कैसे हो इसका उद्धार
जीने का अधिकार न होता,
पहले सा व्यवहार न होता।

यद्यपि अब स्थिति सुधरी है,
महिला की स्थिति सँवरी है।
पुनः विवाह उचित निर्णय है,
नहीं संशय इसमें कतिपय है॥