धर्मेंद्र शर्मा उपाध्याय
सिरमौर (हिमाचल प्रदेश)
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‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…
बहुत कुछ दिखा गया २०२५ का ये साल,
चुन–चुन कर दे गया अनगिनत जख्मों का हिसाब
चेहरा बेनकाब कर गया आस्तीन के साँपों का,
कुंडली मार बैठे थे जो बिल में ख्वाबों का।
दर्द को आपदा में चिल्लाते हुए देखा,
नदी–नालों का मंजर समंदर–सा बनते देखा
कई घरों का छीन गया आशियाना,
जैसा हमने कभी न देखा, न पहचाना।
जीते जी कभी अपनों को न पहचाना,
आज अपनों के लिए उन्हें बिलखते देखा
बेईमानों की बेईमानी को फलते देखा,
आस्था और विश्वास में प्रभु शक्ति का प्रकाश देखा।
ये ज़िंदगी तुझसे जुड़ी अनमिट कहानी,
कुछ खट्टी, कुछ मीठी, कुछ बेजुबानी
सतरंगी इंद्रधनुष में भी छिपी है कालिख,
बखान अपनों का कर गई चुपचाप मुँह-जबानी।
करते हैं दुआ न आए ज़िंदगी में कभी ऐसा साल,
न उजड़े परिवार किसी का, न हो कोई बेहाल।
खुशियों बरसे चारों तरफ और प्रेम फैले पूरे संसार,
आप करें उन्नति खूब और यश फैले तीनों धाम॥