बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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सफलता ऐसा कोई ताज़ नहीं,
जो सिर पर रख दिया जाता है
यह तो वह यात्रा है,
जिसे पग-पग पर गढ़ना पड़ता है।
सफलता पसीने की बू में बसती है,
रातों की नींद वह चुरा लेती है
असफलताओं की राख से,
वह नए स्वप्न सुलगा लेती है।
हर ठोकर कभी प्रश्न नहीं बनती,
कई बार वह उत्तर होती है
क्योंकि गिरकर उठना ही तो,
सफलता की पहली शर्त होती है।
सफलता शोर नहीं करती,
वह चुपचाप मजबूत होती है
जब आत्मविश्वास थक जाता है,
तभी सफलता और पुख्ता होती है।
ना तालियों की मोहताज यह होती है,
ना प्रमाण-पत्र की दासी बनती है
सफलता उस क्षण जब जन्म लेती है,
जब हार मानने से इंकार हो जाता है।
जो अपने भीतर उसे जीत लेता है,
वही बाहर हमेशा इतिहास रचता है।
क्योंकि सच्ची सफलता ही,
स्वयं पर विजय से शुरू होती है॥