जी.एल. जैन
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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तूफान में दीए की लौ जला के रखिए,
फटे हुए मन रफू करके रखिए
सुन लो किसी की सिसकियाँ तो,
सिसकियों को गले लगा के रखिए।
तितलियों से मशविरा करके रखिए,
चिड़ियों की चहचहाहट सुन के रखिए
भौरों की तरह मंडराएं फूलों पर,
दिल चुराने के पहले औकात देख के रखिए।
नज़र से नज़र मिला के रखिए,
बात से बात बना के रखिए
बात भी बात बना देती है कभी,
सनम से सदा संपर्क साध के रखिए।
मिला है विश्वास तो विश्वास सम्हाले रखिए,
मिला है सिंहासन तो सिंहासन सम्हाले रखिए
बड़ी मुश्किल से जीता है हर किसी का दिल,
दिल से दिल का रिश्ता सम्हाले रखिए।
ज़माने से खुद को बचा के रखिए,
हौसले से मंजिल को पा के रखिए।
मंज़िल का रस्ता मिलेगा खुद-ब-खुद,
काँटों को फूलों से सज़ा के रखिए॥