डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)
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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…
आन बान अरु शान, तिरंगा मान हमारा।
हमको इस पर गर्व, हमें प्राणों से प्यारा।
तीन रंग का मेल, शान से यह लहराता।
चक्र सुशोभित मध्य, सभी के मन को भाता॥
केसरिया है रंग, शौर्य को ये बतलाता।
श्वेत रंग है मध्य, हृदय में शान्ति बढ़ाता।
हरित वर्ण है शान, देश की हरियाली का।
चक्र अशोक महान, प्रगति अरु खुशहाली का॥
खड़ा हिमालय भाल, सुरक्षा करते प्रहरी।
तीनों ओर समुद्र, सुरक्षा खाई गहरी।
प्राणों को दे वार, मातृ भू के चरणों पर।
ऐसे भारत वीर, वास करते इस भू पर॥
दिया जगत को ज्ञान, विश्वगुरु हम कहलाए।
जन्में वीर शहीद, धरा का मान बढ़ाए।
कण-कण में भगवान, धरा है पावन इसकी।
अविरल बहती गंग, धार अमृत है जिसकी॥
करे देव अभिलाष, जन्म लें इसी धरा पर।
लेते हैं अवतार, ईश भी हैं करुणाकर।
पुण्य धरा है हिंद, सभी जन आश्रय पाते।
सत्य अहिंसा शान्ति, सभी को हम सिखलाते॥
भारत वीर सपूत, शिवा ने शौर्य दिखाया।
राणा वीर प्रताप, शत्रु का शीश झुकाया।
ले कर में शमशीर, लड़ी झांसी की रानी।
कूद पड़ी रण क्षेत्र, कभी भी हार न मानी॥
नहीं दिखाई पीठ, रहे हम सबसे आगे।
दुश्मन को दी मात, युद्ध से कभी न भागे।
जन्म लिया इस भूमि, यही सौभाग्य हमारा।
मिल-जुल रहते एक, प्रेम की बहती धारा॥
परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’