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स्वतंत्र अधिकार

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…

हर पल रहे मन में देश के लिए तमन्ना,
ईश्वर से है यही दुआ हर सूरत मुस्काए यहाँ।

देश का हर जवान करता रहे देश की सेवा,
दूर कर दूँ ताकतवर तानाशाही की बेला।

आजाद भारत में फहराता रहे तिरंगा हरदम,
स्वतंत्रता से जिए हर नागरिक यहाँ।

संविधान से है देश में हर एक की सुरक्षा,
ज़िन्दगी हो संविधान से ज़ीनत यहाँ।

जैसे खिलता है हर भाग में बेख़ौफ़ फूल हरदम,
वैसे ही हर एक के चेहरे पर मुस्कान रहे हरदम।

गरीबों को मिले सम्मान, मिले जीने का अधिकार,
मिले राह में दर्दमंद कष्टों से मोहब्बत करना सदा।

स्वतंत्रत भारत में स्वतंत्र विचार रहे सबका,
हर राह नेक चलना संविधान कहता सदा।

जहां ऊँच-नीच का ना भेद रहे कोई,
ना हो किसी घर के कोने में कोई हिंसा।

स्वतंत्रता से करें नौकरी देश की नारी,
बच्चियाँ बेख़ौफ़ पढ़ें-लिखे भारत में सदा।

सताए जो कोई किसी गरीब को यहाँ,
हर अस्पताल या बैंक मिले समानता का अधिकार।

हर बच्चा, बूढ़ा, नारी या गरीब,
मिले संविधान से स्वतंत्रता का अधिकार यहाँ॥