संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक….
सालों की पराधीनता के चलते,
हमें यह अहसास हो गया
अब ना सहेंगे ज़ंजीरें ग़ुलामी की,
अब हमारे सिर है धुन आज़ादी की।
मतवालों ने जान तक क़ुर्बान कर दी,
स्वतंत्रता सैनिकों ने लड़ाई छेड़ दी
नत हुआ दुश्मन डालकर हथियार,
हो गया भारत को आज़ाद करने तैयार।
बीच अगस्त में भारत ने बनाई अपनी सरकार,
आसान नहीं था देश चलाना और सरकार
कैसे देश चलाया जाए, ज़रूरी था संविधान,
ज़रूरी था संविधान समिति का प्रावधान।
डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर के नेतृत्व में
दो साल, ग्यारह महीने और अठारह दिन में
हुआ भारत के संविधान का निर्माण,
२६ नवंबर १९४९ को हुआ समापन।
२६ नवम्बर १९४९ के दिन
संविधान किया गया अंगीकार,
और
२६ जनवरी १९५० के दिन
देश में सभी नागरिकों के लिए
स्वतंत्रता, समता, न्याय और
बंधुता की भावना का सरोकार।
भारत का संविधान, यह है एकमात्र लिखित विधान,
जाति, धर्म, लिंग, भाषा या स्थान से परे,
हर नागरिक को अधिकार समान,
हर नागरिक को अवसर समान
और देता है गरिमा समान।
हम हर साल गणतंत्र दिवस,
सिर्फ़ तिरंगा फहराने के लिए नहीं
बल्कि संविधान के प्रति,
निष्ठा दोहराने के लिए मनाते हैं।
तभी तो कहलाया छब्बीस जनवरी
गणराज्य दिन,
यह कोई इवेंट नहीं, संवैधानिक प्रतिज्ञा है
गणतंत्र दिवस के मंच से देशभक्ति के गीत हों,
या गैर-ज़रूरी भाषण गणतंत्र दिवस का असली अर्थ बताया जाए।
जनता की संवैधानिक समझ को मज़बूत बनाया जाए,
यही होगा सही तरीका
गणतंत्र दिवस मनाने का,
यही है भारतीय संविधान का सम्मान।
भारत का गणतंत्र जनता का,
जनता के लिए, जनता के द्वारा
यही प्रजातंत्र है, यही लोकतंत्र है
जहाँ जनता सर्वोपरि है
कोई ऊपर नहीं, कोई बाहर नहीं,
संविधान पहले,
सम्मान पहले, देश की जनता पहले।
समाज आज जागरूक हो रहा है,
जनता सही-ग़लत समझ रही है।
यही है देश का मान,
यही है संविधान का सम्मान॥