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धरती धरोहर

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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धरोहर में मिली थी हमें
मुस्कुराती हरी-भरी धरती,
निर्मल वातावरण और प्राकृतिक संपदा से हमें संपन्न करती।

प्रकृति के असीम उपवन को
स्वार्थ वश हमने क्षीण किया,
हरितिमा की करुण पुकार को
नीरवता में परिवर्तित किया।

विकास के उन्मत्त रथ पर
विनाश का ध्वज लहराया,
कौन समझे यह मौन वेदना
स्वार्थ ने सबको चुप कराया।

न सोचा नवागंतुकों के विषय में,
हम उन्हें धरोहर में क्या दे जाएँगे।
हाहा-कार करता प्रदूषण और
स्वार्थ का पाठ पढ़ा ही पढ़ाएँगे॥