लेखन के लिए अनुभव, अनुभूति और कल्पना का सहारा लें: ममता कालिया
दिल्ली। जीवन में जो जितने अधिक धक्के खाता है, उतना ही अधिक और बेहतर लिख सकता है। जिसका जीवन गमले के पौधे के समान व्यतीत होता है, उसके पास लिखने को बहुत कम होता है। ऐसा व्यक्ति केवल अपने अंतर्मन की बातें ही लिख पाता है। साहित्य अकादमी भारत सरकार से सम्मानित प्रसिद्ध कथाकार ममता … Read more