बाल-मनोविज्ञान को समझते हुए साहित्य का सृजन करें-सिद्धेश्वर
पटना (बिहार)। आज अधिकांश बाल कविताएँ छंदबद्ध एवं गेय रूप में लिखी जा रही हैं। मुक्तछंद की बाल कविताएँ अपेक्षाकृत कम दिखाई देती हैं। इसका प्रमुख कारण बच्चों की स्वाभाविक रुचि है, जो आज भी लयात्मक और गेय रचनाओं की ओर अधिक आकर्षित होती है। बाल साहित्यकारों एवं कवियों के लिए आवश्यक है, कि वे … Read more