संत की भाँति साहित्य की साधना की श्रीरंजन सूरिदेव ने
काव्यांजलि… पटना (बिहार)। अपने समय के जीवित शब्द-कोश थे आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव। संस्कृत सहित अनेक भारतीय भाषाओं के वे महापण्डित और ‘प्राकृत’ तथा ‘अपभ्रंश’ के अंतिम अधिकारी विद्वान थे। उन्होंने संत की भाँति साहित्य की साधना की। प्रणम्य साहित्यकार बाबू रघुवीर नारायण एक ऐसे कवि थे, जिनकी एक गीति-रचना ‘बटोहिया’ ने उन्हें साहित्य-संसार में … Read more