कविता वही, जिसमें चेतना हो-प्रो. खरे
पटना (बिहार)। कविता में चेतना का होना आवश्यक है। बिना चेतना के कविता प्रभावहीन होकर रह जाती है। कवि सिद्धेश्वर के संयोजन व संचालन में मंडला (मप्र) के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शरद नारायण खरे ने अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। अवसर रहा डॉ. अनुज प्रभात के प्रभार में आयोजित कवि सम्मेलन का, जिसमें सिद्धेश्वर, … Read more