साहित्यकार कलम से कुआँ खोदें, खाई नहीं
भोपाल (मप्र)। साहित्यकार अपनी कलम से कुआं खोदें, खाई नहीं। कलम का काम समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। साहित्यकार को बर्तनों की तरह स्वयं को मांजना जरूरी है। मांजने से तात्पर्य स्वयं को समय के साथ रोज विकसित करना।वरिष्ठ साहित्यकार एवं मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. देवेंद्र दीपक ने लघुकथा शोध … Read more