बहुत प्रासंगिक है अनीता मिश्रा की कविताएं
पटना (बिहार)। हम यह नहीं कहते कि गीत, ग़ज़ल की उपयोगिता अब खत्म हो गई है। हम बस इतना कहते हैं कि गद्य या सपाटबयानी कविता लिखने से बेहतर है आजाद ग़ज़ल, आजाद गीत या नज़म लिखना। समीक्षकों, आलोचकों द्वारा उपेक्षित और तिरस्कार किए जाने के बावजूद ऐसी कविताएं ही मंचों पर वाहवाही लूट रही … Read more