एक अकेला तारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तम की भीड़ों झिलमिल करता, सदैव एक अकेला तारा,ज्यों सच्चाई कही, भीड़ में है कोई सज्जन बेचारा। झूठों की महफ़िल में अक्सर, जो सत्य सुपथ ही ठुकराया,फिर भी राह दिखाता जग को, होता दीपक-सा उजियारा। घोर अमावस में भी जिसने दिल आशा का गीत सँवारा,वह अम्बर में टँगा हुआ-सा … Read more

आज की विभीषिका

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* चलें मिसाइल ध्वंस है, बम की है भरमार।जाने कैसा हो गया, अब तो यह संसार॥ आग लगी धनहानि है, बरबादी का दौर।घातक सबके मन हुए, नहीं शांति पर गौर॥ अहंकार में विश्व है, भाईचारा लुप्त।दिन पर दिन होने लगा, नेहभाव सब सुप्त।। अमरीका इजरायला, और आज ईरान।नहीं नियंत्रित आज ये, धारें … Read more

कहे होलिका दहन-रंग दिलों में घुल रहे

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* आज होलिका दहन है, धर्म कर रहा राज।न्याय, सत्य मंगल लिए, मानवता का काज॥ जली होलिका पापमय, जीत गए प्रहलाद।हर दिल से मिटता रहा, सदा-सदा अवसाद॥ भव्य होलिक दहन है, नरसिंह की जयकार।रंग दिलों में घुल रहे, होली का त्योहार॥ कितना मन भाने लगा, अब यह मोहक पर्व।मान होलिका दहन का, … Read more

खुशियाँ जीवन रंग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* होली की शुभकामना, करो पटल स्वीकार।खुशियाँ जीवन रंग से, रंजित हो परिवार॥ सतरंगी जीवन लसे, आनंदित हो फाग।समरसता फैले वतन, मानवता अनुराग॥ मिटे सकल दुर्गंध मन, झूठ कपट बदरंग।लगा रंग सद्भावना, सच्चाई सत्संग॥ लगा रंग संवेदना, भरो वेदना घाव।सतरंगों के प्रीत रस, हो अपनापन छाव॥ रंगों से लिपटे बदन, … Read more

नारी का श्रृंगार ‘मर्यादा’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मर्यादा जैसा नहीं, नारी का श्रृंगार।सबसे चोखी बात यह, है उत्तम उपहार॥ मर्यादा से नारियाँ, बन जाती हैं खास।मानो सब यह मान्यता, करो सभी विश्वास॥ शोभा बढ़ती नार की, मर्यादा यदि संग।आकर्षण हो चौगुना, बिखरें नित नव रंग॥ मर्यादा को धारकर, सीता बनीं महान।यह साँचा श्रृंगार है, जिसमें नारी-आन॥ मर्यादा से … Read more

फागुन का है जोर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रंगों ने अँगड़ाइयाँ, फागुन का है जोर।अपनापन रिश्ते मधुर, घुला मधुर रस भोर॥ फागुन का है जोर चहुँ, ढोलक बोले तान।गली-गली में गूँजती, जोगीरा की जान॥ फागुन का चहुँ जोर है, पिचकारी मुस्कान।धूप सुनहरी ओढ़कर, धरती रंग सुहान॥ फागुन का रस माधुरी, कोयल गाए राग।टेसू की लाली जगे, वन … Read more

फागुन आया देह में…

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* फागुन आया देह में, जागी आज उमंग।मन उल्लासित हो गया, फड़क उठा हर अंग॥ फागुन लेकर आ गया, प्रीति भरा संदेश।जियरा को जो दे रहा, मिलने का आवेश॥ फागुन की अठखेलियाँ, होली का पैग़ाम।हर कोई लिखने लगा, चिठिया प्रिय के नाम॥ फागुन की मदहोशियाँ, छेड़ें मीठी तान।हल्का जाड़ा कर रहा, अनुबंधों … Read more

प्रेम ईश का रूप

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मुलाकात तुझसे हुई, है मुझको दिन याद।तेरे मिलने ने किया, मुझे सदा आबाद॥ करो इरादा प्रेम का, तो मिलता है मीत।जिससे अधरों पर सजे, खुशहाली का गीत॥ वादा करना सोचकर, फिर मत देना तोड़।जिसको अपनाना उसे, देना कभी न छोड़॥ करो अगर इकरार तुम, फिर मत कर इनकार।यही प्रेम की चेतना, … Read more

महर्षि दयानंद थे चेतना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* दयानंद जी श्रेष्ठ थे, मानवता के सार।फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार॥ दयानंद प्रभुतामयी, थे समता के रूप।अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप॥ आर्य धर्म की श्रेष्ठता, धारण करके खूब।रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब॥ दयानंद जी दिव्य थे, गाकर के मृदु गीत।बने मनुज की चेतना, … Read more

महासंत रविदास मानवता के सार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* महासंत रविदास जी, मानवता के सार।फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार॥ महासंत रविदास जी, थे समता के रूप।अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप॥ हरिपूजा की श्रेष्ठता, धारण करके खूब।रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब॥ महासंत रविदास जी, गाकर के मृदुगीत।बने मनुज की चेतना, के सच्चे मनमीत॥ … Read more