पिता हिमगिरि

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* पिता दिवस (१५ जून) विशेष)… हिमगिरि जैसे भव्य हैं, रहते सीना तान।वेदों ने भी तो कहा, हरदम पिता महान॥ पिता उच्च आकाश से, संतानों के ईश।जब तक जीवित हैं पिता, कभी न झुकता शीश॥ सुख-दुख में अविचल रहें, आँसू का है त्याग।जेब भरी खाली रहे, पर हाँ से अनुराग॥ पिता रूप … Read more

करें आत्ममंथन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* करें आत्ममंथन सुपथ, प्रथम कार्य शुरूआत।बढ़ें अटल संकल्प पथ, फँसे नहीं जज़्बात॥ रहें मौन सबको सुनें, निर्णय लें शुरूआत।मिले कर्म फल ज़िंदगी, हो सुख यश बरसात॥ निंदक जो भी सन्निकट, अपना करें सुधार।बहु बाधा कठिनाईयाँ, पौरुष का आधार॥ कर्म सुयश अभिरुचि बढ़े, मिले सफलता चाह।नव उमंग संघर्ष पथ, सहज … Read more

सलिल सरिता विमल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बहे सलिल सरिता विमल, समझो जीवन रत्न।सींच धरा रच उर्वरा, सफल किसान प्रयत्न॥ तरंगिणी अविरल बहे, सींचे विश्व जमीन।शस्य श्यामला हरितिमा, सुलभ धनी अरु दीन॥ तटिनी दुनिया हजारों, बहती निर्मल धार।गिरतीं चट्टानों शिखर, दर्रे घाटी मार॥ सरिता जीवन दायिनी, सदा बुझाती प्यास।गिरि झरने पोखर कुआँ, सलिला भरे मिठास॥ सप्तपदी … Read more

ससुराल के बीते दिन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* स्वर्णिम युग ससुराल का, याद करे दामाद।पर अब कुछ भी है नहीं, केवल है अवसाद॥ ख़ातिरदारी है नहीं, अब सूना मैदान।बिलख रहे दामाद जी, रुतबे का अवसान॥ स्वर्णिम युग पहले रहा, खाते थे पकवान।अब तो सारे मिटे गए, ससुराली अरमान॥ कितना प्यारी थी कभी, जिनको तो ससुराल।उनको दुख अब सालता, अब … Read more

पैसा बोलता है, नवरंग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पैसा बोलता दुनिया, पैसा ही नवरंग।रिश्ते नाते मान यश, बिन पैसे बदरंग॥ पैसे ही ऊँचाइयाँ, पैसे ही सम्मान।पैसों के महफ़िल सजे, पैसा ही भगवान॥ पैसों पर शिक्षा टिकी, पैसों पर रोज़गार।सदा समाजी हैसियत, रिश्तों का आधार॥ नीचे से संसद तलक, बस पैसों का खेल।आजीवन हर काम में, पैसों का … Read more

सावित्री ने प्राण बचाए

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सावित्री की दिव्यता, हार गए यमराज।सावित्री के तेज पर, हर्षित सकल समाज॥ सावित्री के तेज से, हार गए यमराज।नारी रखे सतीत्व तो, बजे सुखों का साज॥ सावित्री की सिद्धता, करे दिलों पर राज।।उस नारी के सत्व से, हार गए यमराज॥ सावित्री के ताप से, मृत्युदेव में शोक।प्राण छोड़ सत्यवान के, भागे … Read more

सावित्री रक्षित प्राण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सावित्री ने तप किया, पति के रक्षित प्राण।नारी रखें सतीत्व तो, पति का हो कल्याण॥ बरगद का वह पेड़ था, आये थे यमराज।सावित्री के तेज पर, हुआ उन्हें भी नाज॥ सत्यवान के प्राण को, छोड़ भगे यमराज।इसीलिए तो पूज्य है, सावित्री हर काल॥ पत्नी में हो दिव्यता, तो पति का अमरत्व।पति … Read more

बरस रहे अंगार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* आसमान से आज तो, बरस रहे अंगार।पैर जल रहे, सिर तपे, सूरज की है मार॥ सूरज तो अब हो गया, सचमुच में खूँखार।आज आदमी त्रस्त है, बरस रहे अंगार॥ सड़कों पर चाबुक चलें, ताप बना हथियार।नहीं किसी का ज़ोर है, बरस रहे अंगार॥ अच्छा-खासा आदमी, आज हुआ बेकार।बचना मुश्किल हो गया, … Read more

योग सिद्धि ध्यानी प्रबल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गौतम ऋषि सप्तर्षि में, सर्वोत्तम मतिमान।योग सिद्धि ध्यानी प्रबल, चतुर्वेद विज्ञान॥ ऋषि अगस्त्य साधक महा, सप्तर्षि अति ज्येष्ठ।क्षमा शील करुणा दया, वेद ज्ञान में श्रेष्ठ॥ गणपति लम्बोदर नमन, ध्यान करूँ विघ्नेश।गौरीनन्दन दो सुमति, मूषिकराज गणेश॥ सुर नर मुनि गण नित चरण, पूजित मूषिकराज।सिद्धिविनायक मौरया, पंचदेव निशिताज॥ रक्ताम्बर काया मृदुल, … Read more

प्रेम सुरभि सुरभित जगत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभिलाषी जो प्रेम का, समझ प्रेम अनमोल,निर्मल निश्छल प्रेम ले, दे समरसता घोल।रिश्तों की जिसको समझ, वही निभाता प्रेम-अन्तर्मन चिन्तन विमल, प्रेम करे दिल खोल॥ प्रेम सुरभि सुरभित जगत,मिले शान्ति सुख चैन,खिले फूल अपनत्व का, समरस प्रकृति उदार।काम क्रोध मद मोह से, ग्रसित मूढ़ इन्सान-माने क्या अपमान का, कलह … Read more