आज की विभीषिका
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* चलें मिसाइल ध्वंस है, बम की है भरमार।जाने कैसा हो गया, अब तो यह संसार॥ आग लगी धनहानि है, बरबादी का दौर।घातक सबके मन हुए, नहीं शांति पर गौर॥ अहंकार में विश्व है, भाईचारा लुप्त।दिन पर दिन होने लगा, नेहभाव सब सुप्त।। अमरीका इजरायला, और आज ईरान।नहीं नियंत्रित आज ये, धारें … Read more