ऋतु-शिशिर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ढाने लगा शिशिर, तेज अपने अब तेवर,जहाँ तहाँ सुलगने लगे अलाव के जेवरशीत ऋतु का जोर हुआ, बदले है आलम,सब लपेटना चाहते हैं रजाई गरमागरम। ताप रहे है सब निर्धन, अलाव के आसपास,घेर-घेर कर बैठे हैं, चेहरे पर लेकर अग्निउजासदीन-गरीब की झोपड़ियों में, कपड़े नहीं पर्याप्त,ठंड के इस कोहराम में, केवल … Read more

समाज सुधारक राजा राम मोहन राय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** २२ मई १७१२ को जन्म राधानगर बंगाल,ब्राह्मण रूढ़िवादी परिवार में बीता बाल्यकालमाँ तारिणी देवी, पिता रमाकांत किए देखभाल,प्रारंभिक शिक्षा पटना में पाई, उच्च शिक्षा बंगाल। संस्कृत, फारसी, अरबी व अंग्रेजी भाषा अध्ययन किया अपार,भारतीय समाज की कुरीतियों पर बदले उनके विचारसती प्रथा, बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह का किया प्रतिकार,ब्रह्म … Read more

तन अर्पण दूँ आज

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारत-माता चरण-कमल में, तन अर्पण दूँ आज,कण-कण शोणित राष्ट्र-सुरक्षा में, प्रण अर्पण दूँ आजतेरी गोदी जन्म दिया है, ऋण उतारूँ बार-बार,दुर्लभ यह मानव जीवन सारा, तुझ पर वारूँ आज। सब कुछ पाया तेरे आँचल में, फिर भी तृष्णा जागी,मृगनयनी के मोह-जाल में, चेतनता ही भागीलोभ-तिमिर में खोया मानव-मूल्य अनमोल … Read more

माँ के जज़्बात

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ माँ के हाथों की लकीरें, घिस गईं थीं,बर्तन मांजते…पाँव की बिछिया दब गई थी,रस्में निभाते…घूंघट के नीचे ले लेती थी सिसकियाँ तब,जब, याद आ जाते थे पीहर के नजारेब्रम्ह बेला में ही पीस-कूट लेती थी,गुनगुनाते अनाज के दाने,भर लाती थी गाँव के बीच में बने,पक्के कुएं से ताजा पानी। अपने … Read more

गर्व है हिंदी भाषा पर

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************** विश्व हिन्दी (१० जनवरी) विशेष… गर्व है ऐसी भाषा पर,जिसे विश्व भी स्वीकार करेंगर्व है हिंदी भाषा पर,जिससे देश महान बने। गर्व है ऐसी भाषा पर,जो प्राण न्यौछावर को बतलाएगर्व है हिंदी भाषा पर,जो त्याग भावना को सिखलाए। गर्व है ऐसी हिंदी पर,जो विश्व में सनातन प्रेम फैलाएकरुणा दया जन–जन … Read more

जीवन की पहचान है हिन्दी

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** विश्व हिन्दी (१० जनवरी) विशेष… हिंदी केवल भाषा नहीं, जीवन की पहचान है,जन-जन के हृदय में बसी, भावों की मुस्कान हैमाटी की सौंधी खुशबू, शब्दों में ढली हुई,संस्कारों की उजली धारा, युग-युग से चली हुई। राजमहलों से गलियों तक, इसका ही विस्तार है,लोकस्वर की इस वाणी में, भारत का संसार … Read more

ऋतु-शिशिर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ढाने लगा शिशिर , तेज अपने अब तेवरजहाँ तहाँ सुलगने लगे अलाव के जेवरशीत ऋतु का जोर हुआ बदले है आलमसब लपेटना चाहते है रजाई गरमागरम। ताप रहे है सब निर्धन, अलाव के आसपासघेर घेरकर बैठे है, चेहरेपर लेकर अग्निउजासदिन- गरीब की झोपड़ियो में , कपड़े नही पर्याप्तठंड के इस कोहराम … Read more

आशा है बेहतर नया साल मिले

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… बहुत ख़ूबसूरत रहा,बीता हुआ सालखुशियों के कुछ पल थे,कुछ दुखों के जाल। खुश रहना सीखा मैंने,चाहे जैसा भी हो हालकुछ खट्टी-मीठी यादें मिली,कुछ प्यार के वादे मिले। कहीं दोस्तों की महफ़िल मिली,कहीं ख़ुद को हम अकेले मिलेकहीं नफरतें झेली हमने,कहीं अपनों के मेले मिले। … Read more

हिंदुत्व के पुरोधा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** स्वामी विवेकानंद जयंती (१२ जनवरी) विशेष… कलकत्ता में जन्म लिए प्रतिभाशाली नरेंद्र नाथ जी दत्त,माता भुवनेश्वरी, पिता प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त१२ जनवरी १८६३ मालूम है, जन्म वर्ष शुभ मुहूर्त का वक्त,शिक्षा ज्ञान से अभिभूत होकर बने माँ काली के परम भक्त। प्रेसीडेंसी कॉलेज व स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पाई … Read more

कब तेरी मंजिल आ जाए…!

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ज़िंदगी का हर एक पल कीमती है,फिर बरसों की तू क्यों सोचता है ?चार दिन के इस सफ़र में,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे पता..! फिर भी तू क्यों भटक रहा है ?माया-मोह व लालच के फरेब मेंवर्तमान को जी ले आनंद व उल्लास से,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे … Read more