मेरा भाई
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष…. एक समय के बाद,धीरे-धीरे बदलने लगते हैं भाई भीवे उतना नहीं बोलते,जितना बचपन में बोलते थे। उनकी हँसी,घर के आँगन से निकलकरज़िम्मेदारियों की भीड़ में खो जाती है,जो लड़का कभीबारिश में भीगते हुए,कागज़ की नाव बहाया करता थावही एक दिनराशन की थैली उठाए,थके कदमों से घर लौटता है। … Read more