दीप-सा जले

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २… कर्महीन भावहीन, नीति रीति से विहीन, कर्म जो करे मनुष्य, व्यर्थ जीव जानिए। नित्य ही करें सुकर्म, जीव का यही सुधर्म, दीप-सा जले सदैव, प्रीत रीत मानिए। सत्य का करें प्रकाश, छूट जाय झूठ … Read more

पर्यावरण की पुकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ वक़्त कैसा आ गया अब धरा पर,हवा भी डरने लगी अपनी ज़िंदगी सेधरती भी अब निराशा रहने लगी है,गगन में तारे भी आँसू बहाने लगे हैं। जो ना कर सके हमारी रक्षा,पर्यावरण की तो कहाँ कहींधरती पर चिड़ियों की चहचहाहट रहेंगी,किसी दिन सब खत्म हो जाएगी। हवा भी सिसकियाँ अब लेने लगी … Read more

परिवर्तन नियम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** गर्मी, सर्दी और ये बारिशक्रम से सब परिवर्तन होते,नियम प्रकृति का सत्य यही है,जिस पर सब विधिवत चलते। परिवर्तन है सत्य यहाँ परकुछ तो रोज-रोज होता,इनके बीच झूलता जीवनअनुभव से अनुभव बढ़ता। बीते वर्ष सुहाने क्षण वोहृदय पटल पर एक-एक छाए,तोड़ पुराने बंधन सारेआगे को सब बढ़ते जाएँ। रखना सौम्य भाव सब … Read more

सेहत दौलत है बड़ी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** अच्छी सेहत है अगर, तो मिलता आनंद।ताक़त मिले शरीर को, सुस्ती सारी बंद॥ सेहत दौलत है बड़ी, रखना इसे सँभाल।लापरवाही जो करें, उनके संग बवाल॥ सेहत तो वरदान है, धारण कर संकल्प।नहीं बिगड़ने दो कभी, जीवन है अति अल्प॥ अच्छी सेहत तब बने, जब अच्छा आहार।योग और कसरत करो, तो जय-जय-जयकार॥ … Read more

नहीं समझा मेरे त्याग को

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अब तक तो सबकी खुशियों की खातिर जीती आई थी,सबकी खुशियों की खातिर अपनी खुशी मारती आई थी। किंतु किसी ने कभी नहीं समझा मेरे इस त्याग को,सोच लिया अब स्वयं बनाना होगा अपने भाग्य को। जब मैंने अपनी इच्छा से जीने की कुछ कोशिश की,बर्दाश्त ना हुआ लोगों को, कानों में … Read more

पानी बचाइए

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* नीला अम्बर धरती प्यारी,सबकी जीवन डोर है पानीयह जीवन का आधार है,पानी बचाइए। नदी, तालाब कुएं और झरने,जल से ही तो जीवित हैंसुख न जाए यह जलधारा,पानी बचाइए। पानी की हर बूँद कीमती,व्यर्थ इसे न बहने दोजल है तो कल है इसलिए,पानी बचाइए। पानी को रखें सुरक्षित,अपनाएं जल संरक्षण हम।भावी पीढ़ियों के … Read more

गर्मी आई, चली लू की रेल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंडा-ठंडा, कूल-कूल,सब बातों को जाओ भूल। गर्मी आई, प्यास बढ़ाई,पियो शर्बत, कुल्फी आई। तरबूजा-खरबूजा, खीरा-ककड़ी,धनिया, पुदीना लाते ठंडाई। नींबू पानी, दही और लस्सी,कोकाकोला, माजा, पेप्सी। सबमें आए है बड़ा मजा,जब मिलकर पीते रूह-आफजा। कोई पीता शर्बत बेल और गन्ना,कोई पीता आम का पन्ना। नीता, रीता, सीता, शीला,पिकनिक जाते कश्मीर ठंडीला। बर्फ की … Read more

कहाँ छुपे रहते हो

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* निरख मेरे नैनों को,तुम कहाँ छुपे रहते होकभी आँसू बन कर छलकते,कभी मोती बन कर हँसते हो। नित दिन मेरे नयनों में,पलकों में तुम बसते होमैं मिलती रुबरु तुमसे,सपनों में आकर रहते हो। पलकों को मूंद कर,रक्षक बन कर रहतेये बरौनी मेरे,तुम कहाँ छुपे रहते हो। जब आँखें खुलती है,मदमस्त मदहोशी-सीमादकता … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

दुनिया चाहती अमन

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… पूरी दुनिया चाहती अमन, चैन व शांति,लडा़ई, झगड़ा, युद्ध बिखेरता है अशांतिजो खुद को समझते बादशाह, उनमें ही भ्रांति,स्वाभिमान हर किसी का होता जो लाए क्रांति। हम भारत वंशी जहाँ बुद्ध, जैन, गाँधी का पैग़ाम है शांति,न युद्ध न जंग, न कोई दबाव लक्ष्य … Read more