नारी की पहचान रंगों में

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** रंगों की उन्मुक्त हवाएँजब आती हैं,फागुन का संदेश,फिर वो लाती हैंआँगन-आँगन जब गूँज उठते हैं,उमंग, स्नेह और हँसी के फव्वारे विशेष। पर होली इस बार कुछ कहती,नारी की पहचान रंगों में भी हो जातीवह गालों पर गुलाल से ज्यादा,अपने सपनों को रंगतीकोमल मुस्कान को दृढ़ बनाती,मीरा-सा अटूट विश्वास है‌ रखतीदुर्हर मन में … Read more

मुझे नहीं फ़िक्र मेरे प्रियतम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरे सपनों में जो आते, वही हैं मेरे प्रियतम,हूँ मैं एकमात्र उनकी, वह मेरा यह अधिकार सदा, अब परस्पर ही प्रियतम। वे मिलें या न मिलें, इसकी चिंता नहीं है अब मेरे प्रियतम,प्राणों का सौदा हो गया अब क्षण में, कुछ ऐसे ही मेरे प्रियतम। अब मैं जीती हूँ सिर्फ उनके … Read more

कुछ तो बात होगी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** फूलों की खुशबू मेंतितलियों ने बताई होगी,हवा प्रेम की चली तब होगीकलियों को बालों में,जब उसने वेणी लगाई होगी।खिल जाएंगी कलियाँ भीसूरज ने किरण दिखाई होगी,नादान भौंरे कर रहे बेवजह शोरये नज़ारे देख तितलियाँ भीमुस्काई होंगी।रंग-बिरंगे रंगों में रंगा उपवन,मानों अभी से होली आई होगी॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ … Read more

मेरा कान्हा गुलाब का फूल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा कान्हा तो है गुलाब का फूल,देखो जब उसके मुख सृष्टि समूल। कान्हा जैसा प्यारा कोई नहीं है,सबके कष्टों को तो सुनता वही है। उसकी प्यारी बाँसुरी की वो धुन,जो भी सुनता हो जाता है मुग्ध। जब वो माखन लिपटाए अपने मुख,देख यशोदा मैया को अपार मिले सुख। गैया चराए मेरा नन्हा-सा … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more

जय भारत

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:विधान-३२ मात्राएँ–१०, ८, ८, ६…. जय भारत वंदन, भू रज चंदन,गौरवशाली, है गाथा।हिंद की है शान, तिरंगा मान,रखता ऊँचा, ये माथा।हिमशैल है भाल, करे प्रतिपाल,रक्षा करते, हैं प्रहरी।सागर है रक्षक, अरि का भक्षक,रक्षा खाई, है गहरी॥ जय भारत माता, जग विख्याता,करती सबकी, रखवाली।जय वीर प्रसविनी, भारत जननी,देती सबको, खुशहाली।बहती है गंगा, … Read more

रंगों का त्योहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गयाहोली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार हैगृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप हैकुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोगभंग का … Read more

बेचैनी क्यों है इतनी ?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी, जब हर समस्या का हल है,आज परेशान हो जितना, उतनी ही खुशियां कल है। सुख दुःख है आनी-जानी, यही सत्य अटल है,चिंताओं में गुम ना होना, मन आवारा बादल है। मत भागो भौतिकता के पीछे हरदम,लुफ्त उठाओ जीवन में हर पल, यही संपत्ति अचल है॥

उसने तोड़ा विश्वास को

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वह छल पर छल करता आया, उसने तोड़ा विश्वासों को,कश्मीर तो क्या हम पाकिस्तान भी क्यों देंगे गद्दारों को। इस जेहादी नाजायज को, चैन से सोने ना देंगे,लातों का भूत है बातों से मानेगा ना, समझाने से। इसको इसकी भाषा में समझाना हमको आता है,बुझदिल और इस कायर को … Read more

प्राकृतिक आकर्षण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मादक है मधुमास, प्रीति की ऋतु है आई।पुष्पित हुआ कछार, मिलन की बेला छाई॥अधरों पर है गीत, मीत उर को है भाया।है वसंत का ताप, पवन अनुराग नहाया॥ प्रकृति हुई भरपूर, चेतना मन में आई।भ्रमर स्नेहमय आज, वनों ने आभा पाई॥मौसम का नवरूप, सुहावन है अमराई।अनुबंधों के नेग,कोकिला रस बरसाई॥ है … Read more