कहाँ गई तुम
डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** प्यारी गौरैया, हाय कहाँ गई ?मुझे याद बहुत तुम आती होतेरे बिना सूना मेरा आँगन,मेरे दिल को बहुत सताती हो। भोर हुए तेरा मुंडेर पर चढ़ना,चीं-चीं,चीं-चीं कलरव करनासुबह हुई ,ये सोचकर मेरा,अधखुले नयनों से तकना। कभी सैर गगन की करना,फिर किचन में शोर मचानाआपस में तेरा लड़ते-लड़ते,मेरे सिर से आकर टकराना। जब … Read more