मैं हूँ वरदान

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… मैं नारी हूँ,मत करना अपमानमैं ही जीवनदायिनी,मैं हूँ एक वरदान। मैं नारी हूँ,माँ बनकर देती संतान,पालन-पोषण मैं करती,मैं हूँ वृक्ष समान। मैं नारी हूँ,भारत की पहचानयमराज से भी छीन लाती,जो अपने पति के प्राण। मैं नारी हूँ,कोमल फूल समान,वक़्त पड़े तो थाम लूँ,बरछी, तीर-कमान। मैं नारी हूँ,निर्बल-अबला … Read more

परचम लहराए पुरजोर

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. कामिनी जब बनी थी दामिनी,तब वो सृष्टि को बदल डाली। काली बनी थी झांसी की रानी,झुकी नहीं, मौत को गले लगाया। सावित्री ने यमराज को हराया,वरदान से पति को बचाया। सहनशीलता की मूर्ति तू रमणी,पति के साथ वन में रही तू रमणी। उर्मिला ने भवन में ही … Read more

एक नई शक्ति

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… नारी संघर्ष से सदैवमुकाबला करती रहती,सुख-दु:ख की परिभाषा समझती हैवो समझती है भूख की शक्ति को,जिसे पाने के लिए अपने बच्चों को देती खुद भूखी रहकर निवालासमाज कहता- पुरुष प्रधान होता है,समाज की सफलता के पीछे तो नारी काकठिन संघर्ष छिपा होता है। जो हक की … Read more

आहिस्ता-आहिस्ता

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आहिस्ता-आहिस्ता ही प्रेम का दीपक जलता है,अपने ही संस्कार मन को पावन करता है। मन में प्रेम रहे तो सारी दुनिया प्रेममयी लगती है,हर दु:ख जीवन में नई-नई राहें बनाता है। नई उमंगों का आगमन ही जीवन है,आहिस्ता-आहिस्ता ही फूलों-सा खिलने लगता है। संघर्ष ही जीवन को आगे बढ़ना सिखाता है,आहिस्ता-आहिस्ता … Read more

‘स्त्री’ देती जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘स्त्री’,धरा समानकरना नहीं तिरस्कार,देती जीवनवरदान। ‘नारी’,जन्म संतानपालन-पोषण करती,भू समानअभिभावक। ‘औरत’,जगत पहचानकरती जीवन संघर्ष,चुप रहतीपुष्प। ‘महिला’,कोमल मनवक़्त पर मैदान,भिड़ जातीरक्षा। ‘वनिता’,दुर्गा, कालीनहीं निर्बल-अबला,कभी ‘कामिनी’जानकी। ‘रमणी’,संस्कृति वाहककरती सदा भला,सृजन धुरीसंवेदनशील। ‘भार्या’,साथ चलतीप्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,उड़ाती विमानसफलता। ‘जननी’,करती भागीदारीनिभाती हर परम्परा,रूप शक्तिपरिवार। ‘कांता’,सौन्दर्य-लक्ष्मीलुटाती ममता अपार,दर्द सहतीमुस्कान। ‘अर्धांगिनी’,कहलाती माँपर रहती पीड़ित,अनेक भेदभावविडम्बना। ‘मानवी’,सम्भालती घरहै रूप शक्ति,रखती … Read more

सदा खुशबू रचती नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… कई संघर्षों के बीच,कई कटाक्षों के पारकटी-कटाक्ष अपमान के बीच के बाद,संघर्षों से संघर्ष करगालियों-घरों के अंदर,सदैव खुशबू फैलाती है नारी। पसीने से लथपथ चेहरा,जख्मों से भरे हाथघिसे नाखूनों वाली नारी,फूल-से कोमल हाथ, जख्म सहते हाथदर्द सहते, चोट खाते हाथ,यही हाथ खुशबू रचते हैंसंघर्ष करते हैं ऐसे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

भरे रंग

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भरे रंग पीली सरसों मेंयह बसंत है सरसाया,प्रकृति हुई है रंग-बिरंगीदेखो फिर फागुन आया। सजी हुई छवि जड़-चेतन कीमन-उमंग भर-भर जाए,पुष्पित कमल-कली उपवन मेंगुन-गुन भँवरे गीत सुनाएँ। पुलकित अंग-अंग धरती काऋतुपति सौरभ बिखराए,वृक्षों पर नव-कोपल आएपादप रसाल बौराए। फसल हुई स्वर्णिम कंचन-सीफागुन ख़ुशियाँ ले आया,चंचल मतवाली बयार मेंनृत्य मयूर ने दिखलाया। झाँझ … Read more

है शक्ति स्वरूपा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… सशक्त शक्ति का वह रूप है,मन में लिए जो ‘कोमलता’विशाल ‘हृदय’ में दया व करुणा का संचार लिए,नारी देवी है, वह है, शक्ति स्वरूपा। उनकी ‘उड़ान’ दूर आसमान की,उन्हें आगे बढ़ने दो, ‘रोको’ मत तुमनारी को कमजोर कभी ‘मत’ समझना,नारी ‘देवी’ है, वह है, शक्ति … Read more

किसे यक़ीन था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मुझे पता है कोईठहरता नहीं किसी के पास,रुक जाता है कुछ पल के लिएसाथ देता हैं चंद कदमों तक…। फिर भी न जाने मनभागता है उस ओर शायद,ये सोचकर कि अचानक मिल जाएवो कभी किसी मोड़ पर…। पथिक हैं सब जीवन पथ केअलग-अलग है आप-बीती,कैसे किस पर विश्वास करेंजब बिछे हैं … Read more