सूरज उगले आग
डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* धरती तपती दाह-सी, सूरज उगले आग।सूख गए हैं अब सभी, हरे-भरे से बाग॥ शीत पवन चलती नहीं, लू का फैला राज।कण-कण में अब बस रहा, ग्रीष्म ऋतु का साज॥ गरम हवा चलती रही, धरती बनी कडाव।पशु पक्षी बेचैन हुए, मिले नहीं अब ठाँव॥ बरस रही है आग अब, आसमान … Read more