आत्मा का श्रृंगार करें

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* आओ श्रृंगार करें,तन को अब छोड़मन पर प्रहार करें,आत्मा का श्रृंगार करें। बाहरी है तन का श्रृंगार,रहता यह क्षणभंगुरदिखेगा भले आज सुंदर ,पर स्थाई नहीं जान जरूर। काम, क्रोध, मोह, लोभ पर,विजय पाई जो संघर्ष करजिसने किया मन को सुंदर,वही सुंदरता है सत्य जग पर। दया, दान, श्रम, संस्कार लेकर,शांति, … Read more

हारे का सहारा

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** हमारे हारे का सहारा बनते खाटू श्रीश्याम,भक्त की मुराद पूरी करते खाटू श्रीश्याम। सीताराम हनुमान बालासरजी धाम,श्रीकेसरी के लाल हनुमान के धाम। शंकर जी के अंशावतार हनुमानजी के वास,श्रीकेसरी के प्यारे लाल हनुमान जी के धाम। भीम के पौत्र हुए बर्बरीक योद्धा महान,पांडव की ओर से आए बर्बरीक महान। घटोत्कच के पुत्र … Read more

‘प्रेम’ मधुर रिश्तों का आधार

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मधुर रिश्तों का आधार,प्रेम में हार-जीत नहीं होतीएक समर्पण ही समर्पण होता,विश्वास की नींव पर ही प्रेम का महल खड़ा होता। प्रेम माँ से या परिवार से, या पति से,किसी भी रिश्ते से हो, वो विश्वास पर ही टिकतेप्रेम का मतलब कशिश, जो हर पल बढ़ती ही जाए,प्रेम की पहचान यही … Read more

जब दिल से निकलते हैं ‘शब्द…’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शब्द जब दिल से निकलते हैं,तो वे केवल ध्वनि नहीं रहतेवे बन जाते हैं स्पंदन,जो किसी और के हृदय को छू लेते हैं। कागज़ पर उतरते ही,वे आत्मा का आईना बन जाते हैंझूठ की चमक उनमें नहीं होती,पर सच की रोशनी अवश्य होती है। वे टूटे मन को सहला … Read more

जीवन पथ का साथी था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* पूछे जब तुमसे कोई,कौन हूँ मैं ?तुम कह देनाकोई खास नहीं,शायद एक दोस्त थाकच्चा-पक्का सा,एक भ्रम थाआधा सच्चा-सा। जीवन पथ का,एक साथी थाबातों से अपनी, रातों को,झिलमिल कर जाता थागीतों से जी बहलाता था,खामोश रहकर कभीपास होने का अनोखा,एहसास दे जाता था। लम्बी न सही,गहरी नींदों मेंवो मीठे सपने,दे जाया करता … Read more

ऐ वक़्त जरा तू धीरे चल

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** मत इतना सर्वनाश तू कर,ऐ वक़्त जरा तू धीरे चलजिनके अपने मर गए यहाँ,उनको धीरज धर लेने देकंधा कोई मिल जाए उन्हें,सर रख के जरा रो लेने दे। किसी की महत्वाकांक्षा से,लाशों का यहाँ अम्बार लगासमझ नहीं आता किसको,शत्रु मानें और किसे सगारॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दाग,कितना विनाश कर डाला हैवातावरण प्रदूषित … Read more

हवाएं भी मौन

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… बसन्त के मौसम में,आमों के वृक्ष परकोयल की मीठी कुहू-कुहूसुनाई देती,वैसी ही मीठी आवाजआशा दीदी की। आज बसन्त ऋतु में,कोयल उदासस्वर की देवी,आशा दीदी के निधन सेसंगीत जगत के साथ,प्रकृति हो चुकी मौनएक सूनापन छाया,उनकी आवाज हीउनकी अमरता की पहचान है। गीत, संगीत, … Read more

हर पल संघर्ष रहा जीवन

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… मन नहीं मानता अब नहीं रहीं,पर सत्य तो सत्य हैदीनानाथ की थी लाड़ली,पर जीवन ने किया घातहर पल संघर्ष, संकट घेरे रहा जीवन। दिल में था जुनून,मन में था ठानानहीं पालना है पेट,किसी और के सहारेना थी किसी से कोई खास पहचान। घर से … Read more

गायिका सदाबहार

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… हृदय में संगीत को बसाए हुए,दीनानाथ थे सुरों के आधार,लता थीं उनकी प्रथम सुपुत्री,आशा ने बढ़ाया आगे यह संसार। अपनी गायकी से सबको हर्षाया,नवयुवकों के लिए पॉप भी गायाछा गई मदहोशी, ऐसा सुर आया,अपने परिवार का मान बढ़ाया। ऐसी हैं हमारी आशा भोसले,संगीत … Read more

कौन सुनेगा पुकार ?

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ पृथ्वी जल रही है,कौन सुनेगा ‘करुण’ पुकार ?गाँव-जंगल ‘गुम’ हो गए शहरों में,कोई सुनता ही नहीं…?कहीं आँधी, कहीं तूफान,गिर रही बर्फ बैमोसमबिगड़ता ही जा रहा दुनिया का पर्यावरण,पृथ्वी जल रही है…। इंसान सही में ‘बोझ’ बन चुका है,अपने लालच के लिए धरती को बांट दियाप्रदूषण, पर्यावरण सबके-सब दूषित हो गए,और … Read more