खुशियाँ जीवन रंग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* होली की शुभकामना, करो पटल स्वीकार।खुशियाँ जीवन रंग से, रंजित हो परिवार॥ सतरंगी जीवन लसे, आनंदित हो फाग।समरसता फैले वतन, मानवता अनुराग॥ मिटे सकल दुर्गंध मन, झूठ कपट बदरंग।लगा रंग सद्भावना, सच्चाई सत्संग॥ लगा रंग संवेदना, भरो वेदना घाव।सतरंगों के प्रीत रस, हो अपनापन छाव॥ रंगों से लिपटे बदन, … Read more

सुरक्षा का हमदर्द हूँ

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (४ मार्च) विशेष… सुरक्षा दिवस पर एक बुद्ध संदेश,दुर्घटना करता नाश स्वयं और देशध्यान व अध्यान में है, अंतर विशेष,सुरक्षा कवच को तोड़े, तो रहे न शेष। ‘बिजली’ हमारी है परम धरम की मित्र,लापरवाही बचाती सिर्फ आपका चित्रबिजली शत्रु कट्टर भी है और विचित्र,हर जगह पर … Read more

खेलो रंग- गुलाल

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* होली विशेष… फागुन में होली आए, खेलो रंग गुलाल,रंग लो प्रीत के रंग में, गाल हो लाली लाल। प्रेम गलियन में सदा, किशन उड़ावे रंग,प्रेम रंग में रंग गए, गोपियाँ राधे संग। हर्ष उल्लास से सराबोर, होली का त्यौहार,गिले-शिकवे सब मिट जाय, बरसे हिय में प्यार। गुजिया-भुजिया संग मठरी, अपनों का सत्कार,बांटकर … Read more

प्रेम की होली

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* होली विशेष… होली केवल उत्सव नहीं,यह तो है अनुराग की बोलीबैर-भाव भूल खुशियाँ मनाएँ,रंग उड़ाएँ, करें हँसी-ठिठोली। रंगों से भीगी यह धरती,नहीं आज मन में कोई मलालबहता जैसे उत्सव का सागर,चहुँ दिशि उड़ता अबीर गुलाल। लाल, गुलाबी, नीला, पीला,रंग नहीं ये हैं भावों की भाषाबैर-भाव को भूल आज सब,बोलें केवल प्रेम की … Read more

समय इसे भर पाएगा…?

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* होली विशेष… आज गुलाल में वो लाली नहीं,अबीर में वो खुशबू कहाँ ?हरियाली दूर छूट गई,पीली सरसों टूट गई। पलाश में वो रंग कहाँ ?फाग के गीत मधुर नहींगुजियों की मिठास फीकी लगी,ढोल की थाप धीमी लगे। सजन तुम बिन सब सूना है,प्यार की धुन बुझ-सी गईइस रंग-बिरंगी होली में,मेरा मन … Read more

रंग मतवाले

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** होली विशेष… रंगपंचमी के रंग,बड़े मतवालेलगाते शरीर पर,खिल जाते दिलवाले हैं।रंग धनवान नहीं,अमीर-गरीब के संगरहते त्यौहार पर,ये भेद मिटाने वाले हैं।सूखे रंगों से खेलें हम,‘जल ही जीवन’ कीबात समझाने वाले हैं॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्मे श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर … Read more

गहना उजियारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गहना केवल स्वर्ण नहीं, स्नेहिल स्मृति का उजियारा है,माथे की बिंदिया-सा दमके, घर-आँगन का सितारा हैममता की मणि जड़ित हँसी, रिश्तों की रेशम डोरी,संस्कारों की शीतल छाया, जीवन का सच्चा सहारा है। गहना बन कर आई बेटी, आँगन में सुरभित भोर हुई,नन्हे पग की रुनझुन से ही, हर चिंता … Read more

होली में…

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** होली विशेष… गुलाबी गाल की बातें, रंगीले ख़्वाब की बातें,पुरानी हो चुकी है सब, ये नदियाँ पार की बातेंपकड़ कर साथ चलते हैं, सभी का हाथ होली में,नया कुछ कर दिखाते हैं, चलो इस बार होली में। कुंडली मार कर बैठा है, यह जो नाग नफरत का,दंभ और द्वेश ने फैला दिया … Read more

मातु तेरा नित अभिनन्दन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मातु शारदे, नमन् कर रहा, तेरा नित अभिनंदन है।ज्ञान की देवी, हंसवाहिनी, तू माथे का चंदन है॥ अक्षर जन्मा है तुझसे ही,तुझसे ही सुर बिखरे हैं।वाणी तूने ही दी सबको,चेतन-जड़ सब निखरे हैं।दो विवेक और नवल चेतना, तेरा तो अभिनंदन है,ज्ञान की देवी, हंसवाहिनी, तू माथे का चंदन है॥ कर दे … Read more

युद्ध नहीं चाहिए विश्व को

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आज फिर घर घोर अंधेरा छाया हुआ,विश्व में बढ़ रही आहटतीसरे विश्व युद्ध की,पर मानवता पुकार रही युद्ध नहीं चाहिए विश्व में…। वर्चस्व की इस लड़ाई में सदियाँ बीत गई,ताकत का इतना घमंड ठीक नहीं है भाईइससे आमजन ही मरते हैं,इसलिए मानवता पुकार रहीयुद्ध नहीं चाहिए विश्व में…। ये बम-बारूद-हथियार … Read more