सत्य-सुगंधित शब्द हों
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पत्रकार की लेखनी, जन-मन की आवाज।सत्य-सुगंधित शब्द हों, तभी बनेगा आज॥ तथ्य बिना जो लिख रहा, करता बड़ा अनर्थ।बातें झूठी बाँटकर, खो देता निज अर्थ॥ अब सामाजिक मीडिया, घातक जनसंवाद।हितकर उपयोगी कहाँ, मंचों वृथा निनाद॥ अफवाहों के जाल में, फँसता जन-विश्वास।सत्य-परीक्षण से विरत, बहस गालियाँ हास॥ अनदेखी अब राष्ट्रहित, फैलाते विद्वेष।धर्म जाति भाषा घृणा, कर्म बोध कहँ शेष॥ लोभ-मोह के फेर … Read more