अमराई की छाँव मृदु अहसास

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अमराई की छाँव सुहाती,मृदु अहसास कराती,शीतलता देकर के हमको, भावों में ले जाती।तपन भले ही पीड़ादायक,पर अमराई भाये-मोहक छाँव मनुज के तन को, राहत से सहलाती॥ अमराई की छाँव स्वर्ग-सी, सपनों में ले जाती,मधुर हवा तो गीत सुनाकर, सबको है दुलराती।मौसम को खुशहाल बनाती, मस्ती को है देती-बहुत सुहानी होती छैयाँ, … Read more

सूरज ने उगली आग

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सूरज ने उगली आग,धूप लहराई चारों ओर, अग्नि-सी बरसाईना दिन में चैन मिला, ना रातों में राहत,हर समय लू के थपेड़े तन-मन को झुलसातेमन को अशांत किए रहते। झुलस रहे हैं हर पेड़ के पत्ते,कोई ठंडी छाँव भी अब राहत न दे सकेहर जीव-जंतु और पक्षी गर्मी से परेशान है,पानी ढूँढते … Read more

मैं अंत में…

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** एक समय के बादधीरे-धीरे कम होने लगती हैमनुष्य के भीतर की आवाज़, वह बोलता तो हैपर उसके शब्दों में,पहले जैसी गर्माहट नहीं बचती।  जैसे किसी पुराने चूल्हे में,राख तो होपर आग न बची हो कहीं, लोग समझते हैंचुप रहना स्वभाव है उसका।  कोई नहीं देख पाता,कि वह भीतर ही भीतरकितनी आवाज़ों के ढहने से … Read more

कुल्हड़ वाली चाय निराली

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कुल्हड़ वाली चाय निराली,सोंधी-सोंधी ख़ुशबू वालीपी कर ताज़ा सब हो जाते,एक गर्म चाय की प्याली। सर्दी को यह दूर भगाती,फुर्ती बदन में सबके लातीचाय सभी के मन को भाती,आपस में मित्रता बढ़ती। कई तरह से लोग बना लें!,कई मिनट तक इसे उबालेंकोई गर्म पानी में डाले,पाउच को ही कोई हिला ले। अदरक … Read more

वो नदी के किनारे

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वो बचपन की यादें, नदी के किनारे।कहाँ गये वो, रोशनी के नजारे॥ गर्मी का मौसम, वो नदिया की धारा,गाँवों की नदियों का, सुंदर नजारा।उतर आये पानी में, लेकर सहारे,वो बचपन की यादें, नदी के किनारे…॥ बातों ही बातों में हँसते-हँसाते,अठखेलियाँ करके गाने सुनाते।गले से लगाते ये,बाँहें पसारे,वो बचपन की … Read more

ढूंढे आश्रय जीव

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ढूंढे आश्रय जीव, सूर्य भी खूब  तपाता।सूखे ताल तडाग, ताप बढ़ता ही  जाता॥सूने गलियाँ गाँव, आसमां धरती  तपते।उमस बढ़ी चहुँओर, छाँव को खग मृग तकते॥ सूखे नदिया ताल, वृक्ष सब झुलस  रहे  हैं।बिन पानी सब सून, सभी जन तड़प रहे हैं॥जीव सभी बेहाल, स्वेद तन से  बहता है।बिन आश्रय अरु नीर, जीव सब कुछ सहता है॥ तीव्र हुई अब धूप, लगे ज्यों आग  बरसती।कब बरसेंगे मेघ, धरा भी खूब तरसती॥काट दिए सब वृक्ष, मनुज छाया को तरसे।आश्रय बची न ठौर, मेघ भी कैसे  बरसे॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध … Read more

आँखों में धूल झोंक जगत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आँखों में धूल झोंक जगत को, कितने लोग इतराते हैं, मीठी बोली की चाशनी लेकर, भीतर विष बरसाते हैंसत्य खड़ा चौराहे पर चुपचाप है तमाशा देख रहा, ऊँची दुकानें फीके पकवान, फिर  भी मेले लगाते हैं। नाक कटाकर भी कुछ जन तो, बस अपनी धाक जमाते हैं, घर का भेदी बनकर अपने, दीवारों  को ढहवाते हैंस्वार्थ नदी बनकर बहता है मानस के सूखे आँगन में, थाली में छेद वही करते जो रोटी रोज़ ही खाते हैं। दाल न गलती जब मेहनत … Read more

जय का वरण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* विपदाओं से लड़कर, जय को तुम पा जाओ।मंज़िल होगी पास, सफलता गह हर्षाओ॥ विपदाएँ तो नित ही मंगलगान सुनाती हैं,संघर्षों के भावों को, वे रोज़ जगाती हैं।जीवन हो खुशहाल, यही सबकी है चाहत,जो डर जाता उसको ही, वे रोज़ सताती हैं।साहस से प्रियवर तुम तो पूरे भर जाओ,मंज़िल होगी पास, सफलता … Read more

कलम तोड़ना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कलम तोड़ना हो सके, जब सच का आवेग।सच्चा ही तो दे सके, दुनिया को शुभ नेग॥ कलम तोड़ना नित फले, जो जग को सौगात।जिससे शोभित दिन सदा, और दिव्य हो रात॥ कलम तोड़ना हो सुखद, मंगलकारी गीत।आओ! हम गतिमय रहें, बनें धर्म के मीत॥ कलम तोड़ना हित रचे, नष्ट करे जो … Read more

बुढ़ापा-सबसे बड़ा सत्य

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* बुढ़ापा आते ही सूरत-सीरत बदल जाती है,नाम वही रहता है, पर जीवन की रीत बदल जाती है। पहले हर काम फुर्ती से हो जाया करता था,अब वही काम करते-करते दिन ढल जाता है। हाथ जल्दी से उठते नहीं,पैर लड़खड़ाकर राह पर चल पड़ते हैं। घुटनों का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता जाता है,कमर … Read more