मेरा भाई

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष…. एक समय के बाद,धीरे-धीरे बदलने लगते हैं भाई भीवे उतना नहीं बोलते,जितना बचपन में बोलते थे। उनकी हँसी,घर के आँगन से निकलकरज़िम्मेदारियों की भीड़ में खो जाती है,जो लड़का कभीबारिश में भीगते हुए,कागज़ की नाव बहाया करता थावही एक दिनराशन की थैली उठाए,थके कदमों से घर लौटता है। … Read more

हजारों दुआ माँग लेते हैं

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी-कभी तुमसे,गुफ्तगू कर लेते हैंतेरे हाँ-हूँ से ही,जी भर लेते हैं। तेरी बेवजह हँसी से,दिल को गुलज़ार कर लेते हैंदेख लेते हैं कभी तुझे आड़ से,तू मेरी ओर मुड़े तो ऐतबार कर लेते हैं। सपनों में प्रेम गीत गुनगुनाकर,मीठी नींद के आग़ोश में सो जाते हैंइस प्रीत के बदले,हम तेरा क्या … Read more

भाई मेरी परछाई

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष… २४ मई का पावन दिवस,खुशियाँ लाया अनंत असीमयह ‘विश्व बन्धु दिवस’ रखता है,प्रेम भाव फैलाने की चाहत असीम। ‘भाई’ वह, जो कंधे से कंधा,मिलाकर चले पिता काराखी की भी लाज रखे,अपनी दुलारी बहनों की। माता को सुख पहुँचाते,करे देश की रक्षासीमा पर सजग प्रहरी,बन कर करें देश … Read more

संकट में दीवार ‘भाई’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष… सिर्फ रिश्तों का नाम नहीं है ‘भाई’,घर की धड़कन का दूसरा धाम है ‘भाई’जब भी गिरता हूँ, हाथ बढ़ाता है ‘भाई’,खुद भूखा रहकर भी मुझे खिलाता है ‘भाई।’ मेरी हर जीत में सबसे ज़्यादा हँसता है ‘भाई’,दर्द छुपाकर भी मेरे संग चलता है ‘भाई’माँ की ममता, पिता … Read more

अमराई की छाँव मृदु अहसास

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अमराई की छाँव सुहाती,मृदु अहसास कराती,शीतलता देकर के हमको, भावों में ले जाती।तपन भले ही पीड़ादायक,पर अमराई भाये-मोहक छाँव मनुज के तन को, राहत से सहलाती॥ अमराई की छाँव स्वर्ग-सी, सपनों में ले जाती,मधुर हवा तो गीत सुनाकर, सबको है दुलराती।मौसम को खुशहाल बनाती, मस्ती को है देती-बहुत सुहानी होती छैयाँ, … Read more

सूरज ने उगली आग

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सूरज ने उगली आग,धूप लहराई चारों ओर, अग्नि-सी बरसाईना दिन में चैन मिला, ना रातों में राहत,हर समय लू के थपेड़े तन-मन को झुलसातेमन को अशांत किए रहते। झुलस रहे हैं हर पेड़ के पत्ते,कोई ठंडी छाँव भी अब राहत न दे सकेहर जीव-जंतु और पक्षी गर्मी से परेशान है,पानी ढूँढते … Read more

मैं अंत में…

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** एक समय के बादधीरे-धीरे कम होने लगती हैमनुष्य के भीतर की आवाज़, वह बोलता तो हैपर उसके शब्दों में,पहले जैसी गर्माहट नहीं बचती।  जैसे किसी पुराने चूल्हे में,राख तो होपर आग न बची हो कहीं, लोग समझते हैंचुप रहना स्वभाव है उसका।  कोई नहीं देख पाता,कि वह भीतर ही भीतरकितनी आवाज़ों के ढहने से … Read more

कुल्हड़ वाली चाय निराली

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कुल्हड़ वाली चाय निराली,सोंधी-सोंधी ख़ुशबू वालीपी कर ताज़ा सब हो जाते,एक गर्म चाय की प्याली। सर्दी को यह दूर भगाती,फुर्ती बदन में सबके लातीचाय सभी के मन को भाती,आपस में मित्रता बढ़ती। कई तरह से लोग बना लें!,कई मिनट तक इसे उबालेंकोई गर्म पानी में डाले,पाउच को ही कोई हिला ले। अदरक … Read more

वो नदी के किनारे

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वो बचपन की यादें, नदी के किनारे।कहाँ गये वो, रोशनी के नजारे॥ गर्मी का मौसम, वो नदिया की धारा,गाँवों की नदियों का, सुंदर नजारा।उतर आये पानी में, लेकर सहारे,वो बचपन की यादें, नदी के किनारे…॥ बातों ही बातों में हँसते-हँसाते,अठखेलियाँ करके गाने सुनाते।गले से लगाते ये,बाँहें पसारे,वो बचपन की … Read more

ढूंढे आश्रय जीव

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ढूंढे आश्रय जीव, सूर्य भी खूब  तपाता।सूखे ताल तडाग, ताप बढ़ता ही  जाता॥सूने गलियाँ गाँव, आसमां धरती  तपते।उमस बढ़ी चहुँओर, छाँव को खग मृग तकते॥ सूखे नदिया ताल, वृक्ष सब झुलस  रहे  हैं।बिन पानी सब सून, सभी जन तड़प रहे हैं॥जीव सभी बेहाल, स्वेद तन से  बहता है।बिन आश्रय अरु नीर, जीव सब कुछ सहता है॥ तीव्र हुई अब धूप, लगे ज्यों आग  बरसती।कब बरसेंगे मेघ, धरा भी खूब तरसती॥काट दिए सब वृक्ष, मनुज छाया को तरसे।आश्रय बची न ठौर, मेघ भी कैसे  बरसे॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध … Read more