वाह चाय

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… हाय रे चाय, वाह रे चाय,सुबह से तेरी याद सताएबिन तेरे रहा ना जाए,गरमा-गरम जब तू आए,क्या कहें दिन बन जाए। देख के तुमको मन ललचाए,मिले ना तू तो सर चकराएसुबह-शाम तू ही भाए,बिन तेरे मन भरमाएहाय रे चाय, वाह रे चाय। जो तू आए … Read more

चाय में गुण अनंत

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… चाय में गुण अति अनंत,सत्कारों को करे जीवंतरक्तचाप का करता अंत,मधुर व्यवहार रहे बेअंत। चाय पर बातें हों धुआँधार,मित्र के संग हो मस्त बहारघंटों बातें बिन लिए आहार,बाबू, लिपिक हो या सरकार। चाय बिना सूना सब संसार,चाय तत्व है अति दमदारकई रोगों … Read more

मध्यरात्रि का सूरज

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* जहाँ अंधकार ने दरवाज़े पर,जंजीरें डाल रखी थींवहीं आपका जन्म हुआ,आपने पूछा कि कुछ लोगों कोज़मीन पर क्यों रेंगना पड़ता है ?किताबों को कवच और,कानून को प्रकाश मानकरअंतहीन रात में आपने रास्ता बनाया। उन्होंने आपकी जाति को तौला,आपकी योग्यता या बुद्धि को नहींलेकिन आप इतने ऊँचे खड़े रहे कि,कोई चाहकर आप … Read more

सच्चाई

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* झूठ का नकाब उतारा तो,असली चेहरे दिखने लगेजिन्हें हमने समझा अपना,हमसे ही नजरें चुराने लगे। नये ज़माने की दौड़ में,अपनों को पीछे छोड़ दियाजिससे मिले फायदा,बस वही अपने लगने लगे। भावनाएं सबकी मर चुकी,संवेदनाएं ख़त्म हो गईंदान देने से ज्यादा लोग,दान का दिखावा करने लगे। परिवार से हुआ करती थी,रौनक घर कीघर-परिवार … Read more

मैं नदी, तुम्हारा भविष्य हूँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मैं नदी हूँ—धरती की धड़कन, जीवन की धार,पहाड़ों की गोद से निकलकर सपनों को बहाती हूँमेरे जल में समय की अनगिनत कथाएँ तैरती हैं,मैं प्यासे होंठों की पहली राहत बन जाती हूँ। मैं खेतों की हरियाली का संगीत हूँ,अन्न के दानों में अपनी कहानी बोती हूँगाँवों की हँसी, शहरों … Read more

आत्मा का श्रृंगार करें

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* आओ श्रृंगार करें,तन को अब छोड़मन पर प्रहार करें,आत्मा का श्रृंगार करें। बाहरी है तन का श्रृंगार,रहता यह क्षणभंगुरदिखेगा भले आज सुंदर ,पर स्थाई नहीं जान जरूर। काम, क्रोध, मोह, लोभ पर,विजय पाई जो संघर्ष करजिसने किया मन को सुंदर,वही सुंदरता है सत्य जग पर। दया, दान, श्रम, संस्कार लेकर,शांति, … Read more

हारे का सहारा

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** हमारे हारे का सहारा बनते खाटू श्रीश्याम,भक्त की मुराद पूरी करते खाटू श्रीश्याम। सीताराम हनुमान बालासरजी धाम,श्रीकेसरी के लाल हनुमान के धाम। शंकर जी के अंशावतार हनुमानजी के वास,श्रीकेसरी के प्यारे लाल हनुमान जी के धाम। भीम के पौत्र हुए बर्बरीक योद्धा महान,पांडव की ओर से आए बर्बरीक महान। घटोत्कच के पुत्र … Read more

‘प्रेम’ मधुर रिश्तों का आधार

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मधुर रिश्तों का आधार,प्रेम में हार-जीत नहीं होतीएक समर्पण ही समर्पण होता,विश्वास की नींव पर ही प्रेम का महल खड़ा होता। प्रेम माँ से या परिवार से, या पति से,किसी भी रिश्ते से हो, वो विश्वास पर ही टिकतेप्रेम का मतलब कशिश, जो हर पल बढ़ती ही जाए,प्रेम की पहचान यही … Read more

जब दिल से निकलते हैं ‘शब्द…’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शब्द जब दिल से निकलते हैं,तो वे केवल ध्वनि नहीं रहतेवे बन जाते हैं स्पंदन,जो किसी और के हृदय को छू लेते हैं। कागज़ पर उतरते ही,वे आत्मा का आईना बन जाते हैंझूठ की चमक उनमें नहीं होती,पर सच की रोशनी अवश्य होती है। वे टूटे मन को सहला … Read more

जीवन पथ का साथी था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* पूछे जब तुमसे कोई,कौन हूँ मैं ?तुम कह देनाकोई खास नहीं,शायद एक दोस्त थाकच्चा-पक्का सा,एक भ्रम थाआधा सच्चा-सा। जीवन पथ का,एक साथी थाबातों से अपनी, रातों को,झिलमिल कर जाता थागीतों से जी बहलाता था,खामोश रहकर कभीपास होने का अनोखा,एहसास दे जाता था। लम्बी न सही,गहरी नींदों मेंवो मीठे सपने,दे जाया करता … Read more