उत्सव मनाएं, शान सजाएं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** उत्सव मनाएं, उत्सव मनाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएंजन गण मन अधिनायक गाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएं। सब मिल देश धवजा फहराएं,ध्वजा फहराएं, मंगल गाएंदेकर बधाई उत्सव मनाएं,गणतंत्र दिवस, शान सजाएं। जाति-पाति का भेद मिटाएं,ऊँच-नीच को जड़ से मिटाएंबंधुत्व सहयोग, आओ बढ़ाएं,देश की रक्षा, लहू में समाए। निर्वाचन का महत्व समझें,निर्वाचन … Read more

छायावाद के प्रखर स्तम्भ ‘जयशंकर”

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मन में दीप जलाए शंकर तम से प्रतिदिन लड़ते जाते,आशा नवसुर शब्द सजाकर, शंकर राहें गढ़ते जाते।मौन की कोख में पलती है अनकही अन्तर्मन अनुभूति-सपनों को सच करने तत्पर, पौरुष पग-पग बढ़ते जाते॥ शब्दों की शुचि गंगाजल में हिय भाव कमल खिलते जाएँ,संवेदित अंतस से गीतों मधुरिम छन्दों ढलते … Read more

‘विफलता’ तुम मत आना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ विफलता तुम मत आना मेरी गली,हम सफलता की सहेली हैंहमने हर विफलता को भगाया है,दर्द के पन्नों को फाड़ा है। गुलाब-सी खिली सफलता की,पंखुरियों को जीवन ने सजाया हैवर्णन करती हूँ सबसे मैं सफलता का,विफलता तू ना आना मेरी गली। चरित्र मेरा सफल है,क्यों मैं विफलता से डरूँ ?खिले फूल हैं जीवन … Read more

अकेला चलता पथिक

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* कांधे पर संघर्षों का भार,आँखों में सपने हज़ारमंज़िल की राह पर चला अकेला,पथिक न माने कभी भी हार। नहीं राह आसान लक्ष्य की,पर मन में अटूट विश्वास हैमिल ही जाएगी मंज़िल उसको,साहस और धीरज जिसके पास है। थकने पर भी जो रुके नहीं,वही लक्ष्य तक जाता हैअकेले चलना जो सीख गया,वह भीड़ … Read more

खुद को खुद से जान लो

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** गाली खाना गाली देना है, यहाँ की तो रीत पुरानी,शान है ये पुश्तैनी जब, बात-बात पर देते हैं गाली। बिना गाली थाली खाली, जैसी होती इनकी दीवाली,छोटे बच्चे भी बड़ों से कम नहीं, शान को बढ़ाए गाली। चार-पाँच की संख्या में, मिलकर सब सिगरेट हैं पीते,खुद को समझें राजा, बाबू जैसे जीवन … Read more

भारत का संविधान लिखित विधान

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक…. सालों की पराधीनता के चलते,हमें यह अहसास हो गयाअब ना सहेंगे ज़ंजीरें ग़ुलामी की,अब हमारे सिर है धुन आज़ादी की। मतवालों ने जान तक क़ुर्बान कर दी,स्वतंत्रता सैनिकों ने लड़ाई छेड़ दीनत हुआ दुश्मन डालकर हथियार,हो गया भारत को आज़ाद करने तैयार। बीच अगस्त में भारत … Read more

गणतंत्र सुनहरा, नित सम्मान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक दमक रहा जो सूरज जैसा, लाता नवल विहान है।भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है॥ संविधान ने सम्प्रभुता दी, हर विकास को सींचा,जनहित के रथ को जिसने तो, मजबूती से खींचा।आम आदमी मुदित हो रहा, मंगल का नव गाना,वर्ष छियत्तर की गति-मति है, सचमुच सफ़र … Read more

नश्वरता

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फिर एक कविता आकार लेने लगी है,भीगे शब्दों के वसन धारण करने लगी हैवो जो पड़ा है जमीं पर… निर्विकल्प-सा,उसकी सौहार्द्रता का गुणगान करने लगी हैफिर से एक कविता आकार लेने लगी है। घटनाएँ खास वाली, बताई जा रही है,उसकी पूरी ज़िंदगी, गुनगुनाई जा रही हैअजनबियों को यादगार किस्से कहकर,ज़िंदगी-भर की … Read more

जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीवन की अविरल धारा तुम प्रिये, हर पल मन को महकाती हो,सूने सपनों मरुस्थल में, सावन बनकर बरसाती होसौम्यता, गरिमा, ममतामयी, लज्जा श्रद्धा, करुण पहचान,हर रिश्ते में नव जीवन की, प्रिये मधुर सुवास बसाती हो। निशि! मंद मुस्कान तुम्हारी, दु:ख की छाया हर लेती हो,स्नेह-सुधा की फुहारें शीतल, हिय … Read more

हमारी जिम्मेदारी है गणतंत्र

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक… संविधान जो हमारा हक लिख देता है,जो हर नागरिक के न्याय समानता की बात करता है। गणतंत्र केवल उत्सव ही नहीं है,ना यह सिर्फ झंडों की शान भर ही है। यह आम आदमी के जीवन का रोज का सम्मान है,जब खेत में पसीना बहता है। किसान और … Read more