ऋतु-शिशिर
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ढाने लगा शिशिर, तेज अपने अब तेवर,जहाँ तहाँ सुलगने लगे अलाव के जेवरशीत ऋतु का जोर हुआ, बदले है आलम,सब लपेटना चाहते हैं रजाई गरमागरम। ताप रहे है सब निर्धन, अलाव के आसपास,घेर-घेर कर बैठे हैं, चेहरे पर लेकर अग्निउजासदीन-गरीब की झोपड़ियों में, कपड़े नहीं पर्याप्त,ठंड के इस कोहराम में, केवल … Read more