हूँ माँ की लिखावट

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ एक छोटा-सा, प्यारा-सा अंश निराला,जिसमें समाया अनुपम ब्रह्मांड निरालामाँ को अपनी ममता-प्रेम लुटाने में नहीं होती थकावट,मैं माँ के लिए क्या लिखूँ, मैं हूँ माँ की लिखावट…। माँ भोली है, अद्भुत छवि वाली है,माँ की मूरत जैसे दूसरी कोई नहीं होने वाली हैसजल नयनों … Read more

करती उजाला पुस्तक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पुस्तक दीप-सी हर मन में उजाला करती है,ज्ञान का सूरज जीवन में सवेरा भरता हैपन्नों में छुपा है चतुर्युगों का गू़ढ़ अनुभव,पाठक का हर संशय पल में दूर करती है। हर किताब ज्ञान नया संसार खड़ा करती है,सूखी सोच में भी भावों पुण्य जल भरती हैशब्दों में रचा हुआ … Read more

करना नहीं पाखंड

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* असली बनकर ही रहो, करना नहीं पाखंड।वे ही पाखंडी बनें, जिनके संग घमंड॥ मत करना पाखंड तुम, वरना हो अवसान।विनत भाव धारण करो, होगा तब उत्थान॥ मूर्ख करे पाखंड नित, ऐंठ दिखाए ख़ूब।आने वाले काल में, वह जाएगा डूब॥ बनो संत सच्चे सदा, नहीं करो पाखंड।वरना गिरना जान लो, कोई नहीं … Read more

रोशनी अपनों से है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* अंधियारे में रोशनी चिरागों से होती है,ज़िंदगी में रोशनी सच्चे अपनों से होती है। माना झूठा, फरेबी, भ्रष्ट, बेईमान है संसार,पर कुछ तो सच्चे-अच्छे दोस्त भी हैं यार। बुझा दो उन चिरागों को,जो स्वार्थ, द्वेष और कपट से जलते हैं। जोत से जोत जलाओ उन चिरागों की,जो सद्भावना, वफादारी, कर्तव्य के … Read more

ममता से प्यारी इज्ज़त

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अपने ही खून से सींचा था, माँ ने उस भ्रूण को जिया थानौ महीने हाथों से पेट सहलाया था, प्यार किया, दुलार दिया, पूरा ध्यान दिया था। पर जब माँ ने नवजात किन्नर को जन्म दिया, किसे पता था कि कोख से एक ‘किन्नर’ जन्मामाँ की ममता वहीं बिखर गई, असहाय होकर ममता भी मजबूर हो … Read more

उड़नछल्लो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ये उड़नछल्लो बनकर कहाँ चल दी ? कुछ अता-पता बता कर जाएगी ? पूछूँगी तो कहोगी- क्या अता-पता बताऊँ ?तुम्हारा जमाना गया,अब हमारा जमाना है हम लड़कियाँ क्या किसी से कम हैं ?  हाँ, हाँ, मानते हैं,तुम लड़कियाँ किसी से कम नहीं होअब तो तुम लड़कों के भी कान कतरने लगी होकिसी से कम नहीं…तो इसका … Read more

अम्मा तुम बहुत याद आती हो…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)…. अम्मा तुम बहुत याद आती हो,एक साल बीत गया…लगता है जैसे कल ही,तो तुमसे बात करी थीकितनी शांत और चैन कीनींद सो रही थीं,मानों कोई तपस्विनीमस्तक पर चंदन का टीका लगा कर,योगनिद्रा में ध्यान लगा रही होअम्मा तुम मुक्त हो गई,सांसारिक बंधनों से, शारीरिक कष्टों सेमृत्यु तो जीवन का शाश्वत … Read more

‘माँ’ एक पवित्र तस्वीर

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… माँ का मतलब,सिर्फ़ रसोई में खड़ीचूल्हे की आँच पररोटियाँ सेंकती हुई स्त्री नहीं होता, न ही-वह केवलत्योहारों पर चरण छू लेने भर कीएक पवित्र तस्वीर है।  माँ,दरअसल वह अदृश्य संसार हैजिसके भीतर,पूरे परिवार की धड़कनें पलती हैं…जिस दिनघर के सब लोग सो जाते हैं, उस दिन भीमाँ पूरी तरह … Read more

सीप उदर माँ का

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… सीप उदर माँ का, मोती बनमैं उसकी पहचान बनी,माँ से ही यह जग पाया हैवह मेरा अभिमान बनी। जीने की वह राह बतातीवह मेरा आधार बनी,थाप हृदय पर उसके धुन कीवह मेरा अधिकार बनी। ममता, प्रेम, दया, करुणा कीमाँ प्यारी झंकार बनी,शीतल प्राण-वायु जीवन कीवह मेरा … Read more

जिसने सब-कुछ दिया…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सबका संसार ‘माँ’ (‘मातृ दिवस’ विशेष)… हर समय जो साथ रहती है,जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ सहती है वो ‘माँ’ है। ममता का बंधनजो कभी खत्म नहीं होता,हम चाहे कितने बड़े हो जाएं,पर माँ के लिए हम बच्चे ही रहते हैं। नौ महीने ‘कोख’ में रखजिसने अपने जीवन का सब-कुछ … Read more