मेरी प्यारी माँ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक चिट्ठी अब, मेरी माँ के नाम,जो करती रहती, घर के पूरे काम। सुबह से लेकर, रात तक लगातार,फिर करती है, मेरी माँ तब आराम। माँ से आती है, ममता की खुशबू,मेरी माँ बस, तू ही तू होती हर सू। तेरे आँचल में है, अपना बसेरा,तेरे सिवा नहीं है, कोई अब मेरा। … Read more

बिन श्रमिक विकास नहीं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… जग के सपने साकार करते,दिन-रात करके दौड़ा करतेछैनी-हथोड़ा-फावड़ा थामते,इतर, उज्जवल रस भरते। पत्थर तोड़ते राह बनाते,मेहनत करके पसीना बहातेमेहनतकश, वतन सजाते,फिर भी जग से उपेक्षित रहते। सुबह सवेरे खेत जोतते,भूख-प्यास अनायास त्यागतेजग की खातिर अनाज उगाते,मेहनत फल, अंश मात्र … Read more

केवल रोटी…

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६ भूखा रहता है, दुख सहता है, केवल रोटी, पाना है।सुख से रहे स्वजन, शांत रहे मन, इसको जीवन, माना है॥ गिरता पड़ता है, फिर लड़ता है, श्रम से न कभी, वह थकता।रखता है हिम्मत, रही न … Read more

मजदूर नहीं, धरती की शान

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… मजदूर नहीं, धरती की शान हैं,मजदूर नहीं, हम भी धरती के इंसान हैं। माना अपनी ज़िंदगी के कहाँ मालिक हम हैं,खुश हो जाते कम में भी, पर बहुत गम हैं। माथे पर पसीना आँखों में सपने हजार हैं,मिट्टी लगी है मुठ्ठी … Read more

संघर्ष को कब दोगे सम्मान ?

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. श्रमिक मेहनत लगन और परिश्रम से,कर रहा अपना कामतुम उसे कम मत समझो, उसका संघर्ष मौन जरूर है। वह करता रहता मजदूरी,जीवन-यापन के लिएरुकना नहीं उसका काम,आज उसका संघर्ष मौन जरूर है। हाथों में छाले, पैरों में दर्द,लेकिन हिम्मत उसमें … Read more

मन कहता है…

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन की बातें सुनूँ कहाँ तक ?जाने वो क्या-क्या कहता है।अंतहीन आशाएं लेकर,हर पल निर्झर-सा बहता है॥ कहता कभी चाँद पे डोलूँ,पाखी-सा पंखों को खोलूँरहूँ घूमता आसमान में,मलयानिल साँसों में घोलूँ।बात किसी की न ये माने,अपनी मस्ती में रहता है।अंतहीन आशाएं लेकर,हर पल निर्झर-सा…॥ बात … Read more

जनगणना करेंगे

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जनगणना करेंगे हम भारत की,भारत में मेरा गाँव हैगाँव में मेरा घर दिखता है,वहीं से शुरू पहचान है। मास्टर जी द्वार आएँगे,दरवाज़ा जब खटखटाएँगेधूप में तपकर आए होंगे,पसीने से लथ-पथ बदन होगा। बेचारे खड़े-खड़े पानी भी माँग न पाएँगे,पर हमसे सवाल पूछते जाएँगे—माँ का नाम, पिता की पहचान,भाई-बहन का प्रमाण भी माँगते … Read more

प्रकृति है नाराज

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* मानव के व्यवहार से,प्रकृति है बड़ी नाराजगर्मी के प्रकोप से,तप रही है दुनिया आज। मौसम ढा रहा सितम,बढ़ गया लोगों का गमबूँद-बूँद पानी को तरसे,छाया है कैसा यह तम…? पारा बढ़ रहा हर साल,जीव-जंतु है सब बेहालप्रदूषण का रूप हुआ विकराल,आखिर यह है किसकी चाल…? अतिवृष्टि और ठंड की मार,आग के गोले … Read more

बहुत कानून, पर कहाँ सुकून ?

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. मजदूरों की ज़िंदगी, दीन-दुखी मजबूर।अविरत श्रमजीवी पथिक, मेहनतकश मजदूर॥ मजदूरों के वास्ते, बने बहुत कानून।किन्तु धरातल पर कहाँ, मिलते कहाँ सुकून॥ माटी में दिन ढल गया, तन पर छाया स्वेद।श्रम की रोटी सेककर, जीवन में बस खेद॥ नित … Read more

प्रेम एक आत्मिक बंधन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* प्रेम न तन का मोह मात्र, यह आत्मा का गहन बंधन,श्वांसों में जो बस जाए, बन जाता है अमर स्पंदनलालच-रहित समर्पण जिसमें, हर पीड़ा भी हो वंदन,ऐसा प्रेम जगाए हियतल परम शांति प्रकाशित-चंदन। प्रेम न सीमित देह तक, है यह आत्मा का विस्तार,मौन हृदय की भाषा में, करता है … Read more