दीप-सा जले
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २… कर्महीन भावहीन, नीति रीति से विहीन, कर्म जो करे मनुष्य, व्यर्थ जीव जानिए। नित्य ही करें सुकर्म, जीव का यही सुधर्म, दीप-सा जले सदैव, प्रीत रीत मानिए। सत्य का करें प्रकाश, छूट जाय झूठ … Read more