कलम तोड़ना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कलम तोड़ना हो सके, जब सच का आवेग।सच्चा ही तो दे सके, दुनिया को शुभ नेग॥ कलम तोड़ना नित फले, जो जग को सौगात।जिससे शोभित दिन सदा, और दिव्य हो रात॥ कलम तोड़ना हो सुखद, मंगलकारी गीत।आओ! हम गतिमय रहें, बनें धर्म के मीत॥ कलम तोड़ना हित रचे, नष्ट करे जो … Read more

बुढ़ापा-सबसे बड़ा सत्य

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* बुढ़ापा आते ही सूरत-सीरत बदल जाती है,नाम वही रहता है, पर जीवन की रीत बदल जाती है। पहले हर काम फुर्ती से हो जाया करता था,अब वही काम करते-करते दिन ढल जाता है। हाथ जल्दी से उठते नहीं,पैर लड़खड़ाकर राह पर चल पड़ते हैं। घुटनों का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता जाता है,कमर … Read more

पृथ्वी, नदियाँ और पहाड़

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** पृथ्वी, नदियाँ और पहाड़,कितना प्यारा यह संसारईश्वर की है सृष्टि महान,करते हैं सब इन्हें प्रणाम। हरियाली है चारों ओर,नाविक ने पकड़ी है डोरसैर कराता पानी में वह,सुंदर सुखद सुनहरी भोर। मात-पिता से कहते बच्चे,ये पहाड़ हैं कितने अच्छेनाव में बैठ हमें भी जाना,पानी में हमें सैर कराना। पापा ने नाविक को बुलाया,हमको … Read more

कागज पर सच चाहिए

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* हर परिस्थिति में थाम ले,ऐसा हाथ चाहिएझूठ का असर नहीं,सच का साथ चाहिए। किसी की बातों का,अब नहीं कोई भरोसाहर सौदे के लिए,कागजी प्रमाण चाहिए। झूठ का है बोलबाला,सच नहीं कोई सुनने वालाअब आवाज कर बुलंद,नवनिर्माण चाहिए। भ्रष्टाचार का फैला जाल,कौन करेगा सवाल…?हर गुत्थी को सुलझाने,अब नया बवाल चाहिए। शोषण के विरुद्ध … Read more

समय है, समझ जा

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** बेदर्दी से पेड़ काटने एक शिकारी आया,पंछी का घोंसला बना था उसने उसे गिरायानन्हें-नन्हें चूज़े उसमें डरे और सहमे से,किसे पुकारें, मात-पिता दाने लाने निकले थे। एक कबूतर देख रहा था दृश्य ये सारा,उन बच्चों को आकर उसने दिया सहाराबारिश की बूँदों से चूज़े काँप रहे थे,तान घरौंदे पर पत्ते का छाता … Read more

डिग्रियों का मेला

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* आजकल की शिक्षा जैसे,एक बड़ा-सा मेला हैजहां बिकता है ज्ञान कम,बस डिग्रियों का रेला है।   किताबें लगती बोझ अब,नोट्स बने भगवानरटकर जो पूरा लिख पाए,वही बड़ा विद्वान।   गुरु भी जकड़े हुए आज,सिलेबस की जंजीरों मेंकिसी तरह बन जाए रिजल्ट कौन पड़े झमेले में ? माता-पिता की बस यही आस,बेटा उनका टॉप कर जाएक्या … Read more

जननी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** कुछ लोग कह रहे थे कि ‘शार्ट सर्किट’ से आग लगी और पड़ोसियों का कहना था कि कार की बैटरी अधिक चार्ज हो जाने के कारण आग लगी। पास में केमिकल का गोदाम था। आग ने ३ मकानों को लपेटे में ले लिया था। बड़ा ही हृदय विदारक दृश्य था। … Read more

बांधूँ धागा बरगद तरुवर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पति परमेश्वर तेरा पूजन, बांधूँ  धागा बरगद तरुवर,अमर सुहाग सदा मुस्काए, रहे  अटल यह नेह समुंदर। तुम जीवन मधुमीत मिलन हो, सजूँ नाम संजीवन प्रियवर,तेरे संग हर श्वास सुवासित, जैसे चंदन वन मन अंदर। वट-वृक्षों की छाँव तले जब सावित्री ने प्रण दोहराया,सत्यवान के प्रेम तपोबल ने मृत्यु-पथ भी शीश झुकाया। वैसा ही विश्वास हृदय में, वैसी ही निष्ठा का निर्झर,तेरे संग जीवन लगता … Read more

नारी का बदलता स्वरूप

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** वह नारी थी,छुई-मुई की तरह अपने में सिमटने वालीअंकुरित छोटे पौधे की तरह रखती थी मन में अनगिनत स्वप्न। उसने उपर उठने को,गर्दन उठायी ही थी किजीवन में चली जो कठोर हवाएँ, जो गर्माती थी उसके चेहरे को झुलसाती थीउसके अरमानों को हवा में,हल्के सूखे पत्तों की तरह उड़ा ले जाती थी।  पिता के आँगन … Read more

पीली हल्दी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** पीली हल्दी सोहती,मेंहदी लगे हाथबेटी लाल जोड़े में,छूट रहा है साथ। घर में बेटी खेलती,घर करती आबादटुकड़ा मेरे जिगर का,लेकर चले दमाद। घर-आँगन सूना हुआ,सूना सब संसारआगे-पीछे घूमती,बेटी मेरा प्यार। कठिन समय है ब्याह का,माँ-पापा का प्यार।एक रात में बदलता,बेटी पर अधिकार॥