अखंड ज्योति
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* खंडित जो होती नहीं, है अखंड गतिमान।अखंड ज्योति करूँ नमन, तेरा अतुलित ताप॥ सद्चिंतन तजकर हुआ, मानव तो बेआन।अखंड ज्योति करो प्रखर, मानव को गुणवान॥ अखंड ज्योति हरो विपति, सचमुच है अभिराम।माता जी के हैं सदा, नित नूतन आयाम॥ माता की करुणा सदा, उनका पावन नाम।अखंड ज्योति जले सदा, दुर्गा पावन … Read more