मेरा कान्हा गुलाब का फूल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा कान्हा तो है गुलाब का फूल,देखो जब उसके मुख सृष्टि समूल। कान्हा जैसा प्यारा कोई नहीं है,सबके कष्टों को तो सुनता वही है। उसकी प्यारी बाँसुरी की वो धुन,जो भी सुनता हो जाता है मुग्ध। जब वो माखन लिपटाए अपने मुख,देख यशोदा मैया को अपार मिले सुख। गैया चराए मेरा नन्हा-सा … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more

जय भारत

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:विधान-३२ मात्राएँ–१०, ८, ८, ६…. जय भारत वंदन, भू रज चंदन,गौरवशाली, है गाथा।हिंद की है शान, तिरंगा मान,रखता ऊँचा, ये माथा।हिमशैल है भाल, करे प्रतिपाल,रक्षा करते, हैं प्रहरी।सागर है रक्षक, अरि का भक्षक,रक्षा खाई, है गहरी॥ जय भारत माता, जग विख्याता,करती सबकी, रखवाली।जय वीर प्रसविनी, भारत जननी,देती सबको, खुशहाली।बहती है गंगा, … Read more

रंगों का त्योहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गयाहोली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार हैगृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप हैकुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोगभंग का … Read more

बेचैनी क्यों है इतनी ?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी, जब हर समस्या का हल है,आज परेशान हो जितना, उतनी ही खुशियां कल है। सुख दुःख है आनी-जानी, यही सत्य अटल है,चिंताओं में गुम ना होना, मन आवारा बादल है। मत भागो भौतिकता के पीछे हरदम,लुफ्त उठाओ जीवन में हर पल, यही संपत्ति अचल है॥

उसने तोड़ा विश्वास को

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वह छल पर छल करता आया, उसने तोड़ा विश्वासों को,कश्मीर तो क्या हम पाकिस्तान भी क्यों देंगे गद्दारों को। इस जेहादी नाजायज को, चैन से सोने ना देंगे,लातों का भूत है बातों से मानेगा ना, समझाने से। इसको इसकी भाषा में समझाना हमको आता है,बुझदिल और इस कायर को … Read more

प्राकृतिक आकर्षण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मादक है मधुमास, प्रीति की ऋतु है आई।पुष्पित हुआ कछार, मिलन की बेला छाई॥अधरों पर है गीत, मीत उर को है भाया।है वसंत का ताप, पवन अनुराग नहाया॥ प्रकृति हुई भरपूर, चेतना मन में आई।भ्रमर स्नेहमय आज, वनों ने आभा पाई॥मौसम का नवरूप, सुहावन है अमराई।अनुबंधों के नेग,कोकिला रस बरसाई॥ है … Read more

वही सच जान पाता है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है,हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं,है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम में, पिघला दे पत्थर लोग कहते हैं,पिघल जाता है जब … Read more

सपनों में उड़ने वालों…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सपनों की दुनिया में उड़ने वालों,जरा धरती पर पैर रख कर चलो। माना कि सपनों में सुख है बहुत,मगर थोड़े से दु:ख भी सहते चलो। सुख और दु:ख दोनों ही तो बहनें हैं,इन बहनों पर प्यार लुटाते चलो। धरती पर फूल के साथ काँटें भी हैं उगते,जरा काँटों का भी लुत्फ उठाते … Read more

दर्द सहना होता है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* यूँ ही कोई कुंदन नहीं बन जाता है, धधकती आग में गलना होता हैदेवताओं के सिर पर बैठना, कहाँ हर फूल का नसीब होता है। गले का हार बनने के लिए भी हर, फूल को जिगर में घुसी सुई का दर्द सहना होता हैसभी शिखर पर बैठे को देखते हैं, … Read more