प्रकृति का आनंद
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** मैं चली अकेली,समुद्र के किनारे-किनारेरास्ता लम्बा अवश्य,किंतु लक्ष्य तय करना है। लकड़ी का सहारा,पथ परिक्रमा का साथीढलता सूरज निगाह रखता,पग में कहीं छाले न पड़ जाएइसलिए जल की लहरें कर देतीपग को शीतल। प्रकृति और इंसान का खेल,वर्षों से चला आ रहाजिसमें लोग साथ चलकर,ले रहे प्रकृति का आनंद।यही तो ईश्वर … Read more