यादगार रेल यात्रा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** धनबाद स्टेशन में पकड़ी मैंने रेलगाड़ी,पास खड़ी थी कोयला लदी मालगाड़ीमेरे ए.सी. डब्बे में पहुँचाया सामान कुली, जो था भारी,अपनी सीट पर बैठ मैंने शुरू की रेल सवारी। ‘वातानुकूलित’ में भी भीड़ मची थी हाहा-कारी,शादी, लगन, विवाह से रेलगाड़ी की यह लाचारीसीटों के आरक्षण पर भी जबरदस्त थी मारामारी,खचाखच … Read more

विजय प्राप्त करें

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* विजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। शील का पालन करके,शरीर पर विजय प्राप्त करेंवाणी व्याप्त स्थूल विकारों पर,मौन रखकरविजय प्राप्त करें।आओ विजय प्राप्त करें… मन में उत्पन्न होने वाले,विकारों पर एकाग्रता सेविजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। सुख-दु:ख और प्रेम-घृणा पर,ध्यान लगाकर, चिंतन करकेविजय प्राप्त करें,आओ विजय प्राप्त करें। गलत ज्ञान … Read more

महर्षि दयानंद थे चेतना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* दयानंद जी श्रेष्ठ थे, मानवता के सार।फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार॥ दयानंद प्रभुतामयी, थे समता के रूप।अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप॥ आर्य धर्म की श्रेष्ठता, धारण करके खूब।रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब॥ दयानंद जी दिव्य थे, गाकर के मृदु गीत।बने मनुज की चेतना, … Read more

समय किसी का नहीं होता

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** ना होता समय किसी का,न राजा का होता, ना ही होता रंक का। कौन है जो इसे बाँध सके मुट्ठी में,था कौन ऐसा इतिहास में ? कल तक जो थे सिंहासन पर,आज रह गए बस स्मृति में, बताया घड़ी की टिक-टिक ने,वैभव क्षणिक धाम रह गए। जो आज गर्व में हँसता है,कल … Read more

माया में फँसता अज्ञानी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६…. माया में फॅंसता, ईश्वर भी हँसता कैसा मानव, अज्ञानी।जीवन भर रोता, कभी न सोता,करता है वह, नादानी।प्रभु से विरत रहे, पापरत रहे,करता रहता, मनमानी।माया है ठगिनी, जीवनहरिणी,कर देती ये, हैरानी॥ माया का बंधन, दिखता चंदन,अंत बड़ा ही, दुःख भरा।मन को भटकाता, रूप दिखाता,लगता है सब, हरा-हरा।नश्वर है … Read more

पढ़ाई ही सब कुछ

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मन था विश्वास, मन का है सम्मान,मान मिले या मिले अपमानपढ़ना है और बस पढ़ना है,पढ़ कर ही सब मिल सकता है। संघर्ष है जीवन सेअपमान का घूंट पीना हैजात-पात को खत्म करना है,मिले सबको सम्मान। पूजा का मंदिर हो या हो अस्पताल ,या हो कोई समारोह सब जगहऊँच-नीच का भेद रहे … Read more

बनो फूल से…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्यारा गुलाब,बोले बहुत कुछसबको भाता। साथ में काँटा,बचना है जरूरीज़िंदगी में यूँ। अच्छे में बुरे,ये सिखाए ज़िंदगीजैसे गुलाब। सदा लुभाए,मन को भाए फूलरंग निराले। ‘फूलों का राजा’,कहलाता गुलाबलाल-सफेद। लाल गुलाब,मिले जीवनसाथीप्रेम प्रतीक। है ज़िंदगी भी,देखो रंग अनोखेकईं हिसाब। कभी खजाना,कभी हर सू गमकभी गुलाब। पीला गुलाब,निभा लो बस दोस्तीसीधा हिसाब। बनो … Read more

वसन्त खिले मुकुलित रसाल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वसन्त खिले मुकुलित रसाल, गूंजे तान भ्रमर मधुराई छाए,नव प्रणय युगल रोमांच मिलन, खिले मकरन्द महके गाए। अठखेल करे तितली पतंग, वासन्तिक पिकगान सुहाए,ऋतुफलकन्द सुरभि वन-कानन, सतरंगों समरसता लाए। मुकुल हँसे तो नवभोर सजे, धरती नूतन रूप सँवारे,नव पल्लव की संकोच लिए, कुसुमित कलियाँ रंग उधारे। मौन छुपाए प्रिय … Read more

सबका प्यारा गुलाब

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सुन्दर गुलाब सबका प्यारा होता है,पर साथ में काँटा भी लगा होता है। जिस किसी को होगा गुलाब से प्यार,वह काँटों से भी जरूर करेगा प्यार। कई रंगों का होता है ये प्यारा गुलाब,फूलों का राजा कहलाता है ये गुलाब। हरा, लाल, पीला, काला, सफेद, नारंगी,सभी को भाएं ये फूल आसमानी, बैंगनी। … Read more

बसंतिया भ्रमर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* वन उपवन खिले-खिले से, मुकुल नवथर प्रचुर है,खिल रहा बागान, कानन में कली कली का अधर हैचमन-चमन हर सुमन-सुमन की आयी नई बहार है,बसंत ऋतुराज वसुधा को अब, लुटाने लगा उपहार है। हर तरफ गुनगुना रहे कुसुमों पर भ्रमर दल बल,परागों से जैसे फूट पड़ी है स्वर-स्वरों की हलचलभंवरा-भंवरा कली सुमन … Read more