नहीं समझा मेरे त्याग को

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अब तक तो सबकी खुशियों की खातिर जीती आई थी,सबकी खुशियों की खातिर अपनी खुशी मारती आई थी। किंतु किसी ने कभी नहीं समझा मेरे इस त्याग को,सोच लिया अब स्वयं बनाना होगा अपने भाग्य को। जब मैंने अपनी इच्छा से जीने की कुछ कोशिश की,बर्दाश्त ना हुआ लोगों को, कानों में … Read more

पानी बचाइए

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* नीला अम्बर धरती प्यारी,सबकी जीवन डोर है पानीयह जीवन का आधार है,पानी बचाइए। नदी, तालाब कुएं और झरने,जल से ही तो जीवित हैंसुख न जाए यह जलधारा,पानी बचाइए। पानी की हर बूँद कीमती,व्यर्थ इसे न बहने दोजल है तो कल है इसलिए,पानी बचाइए। पानी को रखें सुरक्षित,अपनाएं जल संरक्षण हम।भावी पीढ़ियों के … Read more

गर्मी आई

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंडा-ठंडा, कूल-कूल,सब बातों को जाओ भूल। गर्मी आई, प्यास बढ़ाई,पियो शर्बत, कुल्फी आई। तरबूजा-खरबूजा, खीरा-ककड़ी,धनिया, पुदीना लाते ठंडाई। नींबू पानी, दही और लस्सी,कोकाकोला, माजा, पेप्सी। सबमें आए है बड़ा मजा,जब मिलकर पीते रूह-आफजा। कोई पीता शर्बत बेल और गन्ना,कोई पीता आम का पन्ना। नीता, रीता, सीता, शीला,पिकनिक जाते कश्मीर ठंडीला। बर्फ की … Read more

कहाँ छुपे रहते हो

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* निरख मेरे नैनों को,तुम कहाँ छुपे रहते होकभी आँसू बन कर छलकते,कभी मोती बन कर हँसते हो। नित दिन मेरे नयनों में,पलकों में तुम बसते होमैं मिलती रुबरु तुमसे,सपनों में आकर रहते हो। पलकों को मूंद कर,रक्षक बन कर रहतेये बरौनी मेरे,तुम कहाँ छुपे रहते हो। जब आँखें खुलती है,मदमस्त मदहोशी-सीमादकता … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

दुनिया चाहती अमन

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… पूरी दुनिया चाहती अमन, चैन व शांति,लडा़ई, झगड़ा, युद्ध बिखेरता है अशांतिजो खुद को समझते बादशाह, उनमें ही भ्रांति,स्वाभिमान हर किसी का होता जो लाए क्रांति। हम भारत वंशी जहाँ बुद्ध, जैन, गाँधी का पैग़ाम है शांति,न युद्ध न जंग, न कोई दबाव लक्ष्य … Read more

द्रुपदसुता स्वयंवर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** द्रुपदसुता के स्वयंवर के लिए शर्त रखी थी एक,जल में बिम्ब देख शर से मछली की आँख दे भेदउसी वीर से मैं अपनी पुत्री का विवाह करूँगा,और द्रोण से फिर अपने अपमान का बदला लूँगा। मछली की परछाईं देख कर, किया आँख का भेदन,ब्राह्मण वेश में आया था वो, नाम था उसका … Read more

धर्म-कर्म के पथ चलूं, दो वरदान

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* ‘हनुमान जयंती’ विशेष… राम नाम रटते सदा, हनुमत वीर महान।रक्षा करते भक्त की , विघ्न हरण हनुमान॥ बाल्यकाल में ले लिया, मुख में अपने भान।चारो दिस तम छा गया, घमासान दिनमान ॥ राम सिया हिय में बसे, राम नाम पहचान।बूटी लाय बचा लिए, दसरत सुत के प्राण॥ संकट मोचन ही सदा, कहलाते … Read more

दौर क्रूरता से भरा, कोई रोक ले

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सभी चाहते हैं अमन, पर है वह तो दूर।होता ही अब जा रहा, इंसां तो मजबूर॥ शांति नहीं अब मिल सके, हुआ क्रूर इंसान।अहंकार से है भरा, पाले झूठी शान॥ सृजन आज युग का करो, दो युग को सौगात।वरना होना तय समझ, असमय में ही रात॥ जो होता सज्जन पुरुष, करता … Read more

धर्म-सुपथ पर बढ़ चले

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अन्यायों के सामने, जब उठती हुंकार।धर्म-सुपथ पर बढ़ चले, वीरों की यलगार॥ मन की सच्ची भावना, प्रेम सजे श्रृंगार।अल्प प्रेम भी जो दिया, बन जाता उपहार॥ नीति सिखाना ज़िंदगी, धैर्य धरें हर बार।ठोकर भी सिखला रही, बनती जीवन धार॥ अंतर के सब द्वेष को, प्रेम जला दे आज।घृणा मिटाना … Read more