प्राकृतिक आकर्षण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मादक है मधुमास, प्रीति की ऋतु है आई।पुष्पित हुआ कछार, मिलन की बेला छाई॥अधरों पर है गीत, मीत उर को है भाया।है वसंत का ताप, पवन अनुराग नहाया॥ प्रकृति हुई भरपूर, चेतना मन में आई।भ्रमर स्नेहमय आज, वनों ने आभा पाई॥मौसम का नवरूप, सुहावन है अमराई।अनुबंधों के नेग,कोकिला रस बरसाई॥ है … Read more

वही सच जान पाता है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है,हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं,है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम में, पिघला दे पत्थर लोग कहते हैं,पिघल जाता है जब … Read more

सपनों में उड़ने वालों…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सपनों की दुनिया में उड़ने वालों,जरा धरती पर पैर रख कर चलो। माना कि सपनों में सुख है बहुत,मगर थोड़े से दु:ख भी सहते चलो। सुख और दु:ख दोनों ही तो बहनें हैं,इन बहनों पर प्यार लुटाते चलो। धरती पर फूल के साथ काँटें भी हैं उगते,जरा काँटों का भी लुत्फ उठाते … Read more

दर्द सहना होता है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* यूँ ही कोई कुंदन नहीं बन जाता है, धधकती आग में गलना होता हैदेवताओं के सिर पर बैठना, कहाँ हर फूल का नसीब होता है। गले का हार बनने के लिए भी हर, फूल को जिगर में घुसी सुई का दर्द सहना होता हैसभी शिखर पर बैठे को देखते हैं, … Read more

जीवन कठपुतली का खेल

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** यह संसार सिर्फ़ एक मेला है,हर प्राणी यहाँ अकेला है।सुख-दु:ख सब है इस जीवन में-बस कठपुतली का खेला है॥ सबसे एक विनय हमारी है,भाषा की प्रगति ज़िम्मेदारी है।संग साथ-साथ चलते रहना-नवयुवकों की अब बारी है॥

कर दो तृप्ति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अधरों ने कहा अधरों से,जरा ठहरो ! क्यों तुमने यूँ तड़पाया मुझेअधर कहीं एक होते नहीं,जब तक ना दोनों मिलें। अपने अधर से तुम्हारे अधर,मिल कर पा जाते तृप्तिप्यासे हैं मेरे अधर बहुत,अधरों से छू कर कर दो तुम तृप्ति। तब मैं न रहूं तुम न रहो,रह जाए सिर्फ मेरे तुम्हारेदरम्यान … Read more

चलना धीमी गति से…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सड़क पर चलना धीमी गति से,तेज रफ़्तार किसी का साथ नहीं देतीजीवन है अनमोल ध्यान दो भाई,सड़क पर रखो नजर, क्योंकि नजर हटी दुघर्टना घटी। सड़क पर चलना धीमी गति से,रास्ता यूँ ही कट जाएगा, मंजिल पर पहुंच जाएगाक्योंकि जीवन है बड़ा अनमोल,इसलिए सड़क पर सर्कस मत करो भाई। सड़क … Read more

संयुक्त परिवार-प्रेम का सागर

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* एक छत एक आँगन,एकसाथ दिलों की धड़कनविश्वास की नींव, प्रेम का सागर,मुस्कुराता है जहां अपनापन। रिश्ते जहां मीठी धुन से,सदा खुले खुशियों के द्वारसुंदर बगिया-सा महकता,सजता है संयुक्त परिवार। दादा-दादी का आशीष,माता-पिता की सच्ची सीखचाचा-चाची का निष्छल स्नेह,संयुक्त परिवार का हैं ये आधार। रिश्तों की डोरी मजबूत,एकता में शक्ति जहां साकारशिक्षा संस्कारों … Read more

फागुन आयो रे…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* फागुन आयो रे, बौराई क्यारी-क्यारी,महके बाग-बगैयाँ, रंगत छाई न्यारी।ढोलक की थापों में झूमी गैयाँ-नारी-बोल उठी हर डाली, किलकी मारी क्यारी॥ फागुन आयो रे, पिचकारी रंग बरसाए,भीगे चुनर अंचल, साजन मन ललचाए।हँसी की फुहारों से मन का मैल धुलाए-राधा संग श्याम की गलियों में धूम मचाए॥ फागुन आयो रे, सरसों … Read more

शिव मगन होकर नाच रहे

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** शिव जी मगन होकर नाच रहे,भक्तों को शिव पर नाज रहे। गले में पहने साँपों की माला,कानों में बिच्छू कुंडल वाला। और हाथ में डमरू डम-डम बाजे,शिव के तन पर है भस्मी साजे। शिव जी पीकर भंग हुए मतवाला,हलाहल पीकर नीलकंठी वाला। जटा में गंगा कलकल समाए,सिर पर चंदा चक-मक विराजे। हाथ … Read more