कैसी है जीवन की पहेली ?
ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कैसी है ये जीवन की पहेली,सब साथ में फिर भी अकेली। दिल कहीं भी लगता नहीं,भीड़ में भी होती हूँ अकेली। न झूठ बोलूँ और न करूँ फ़रेब,खाली नहीं रहती कभी जेब। दिखावा भी हमें आता नहीं,चापलूसी कभी सीखी नहीं। जो हूँ, जैसी हूँ होता है नाज,इसलिए मेरा कोई नहीं आज। यूँ … Read more