गुन-गुन भँवर करे
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** अविरल सुख बरसे।बरबस यह हरसे॥मन रह-रह कहते।पुलकित तुम सरसे॥ सुरभित पवन बहे।कलियन मदन कहे॥दिन-दिन तुम खिलते।उपवन महक रहे॥ गुन-गुन कर भँवरे।मधु-रस सुलभ करें॥पुलकित मन कहते।मधुबन पुलक भरे॥ दुख जग सब हरने।करतब कुछ करने॥अवतरित जगत में।भगवन शुभ करने॥