एक युग का अवसान
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुर की ज्योति बुझी नहीं है, आसमां में आज भी छायी,तेरी मधुर तान अमर हो आशा, हर धड़कन में समायी। जग ने खोया स्वर का सागर, विश्व गूँजे शोक अपार,फिर भी तेरे गीत रहेंगे, जन यादों में बारम्बार। मधुरिम स्वर की रानी तुम थी, विविध रागों की परछाई,हर लय … Read more