मजदूर…

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… सूरज से पहिले जो जग जाए,जो देर रात को सोता हैशायद उसकी आँखों में भी,खुशहाली का सपना पलता है।  फटे हुए कपड़ों से भी,नहीं शिकायत कोई उसेपेट की आग की खातिर वह,दिनभर धूप में तपता है।  पैरों में पड़ते छालों की,कतई … Read more

मेहनत के हाथ

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. ईंटों में धड़कन है, लोहे में जान है, उसके पसीने से ही तो देश की शान हैन सुबह देखी उसने, न शाम का आराम,  मजदूर के हाथों से बनता है हिंदुस्तान। ऊँची इमारतें जब आसमां को छूती हैं,  नींव में किसी … Read more

यह राम-कृष्ण की पावन धरती

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* संस्कारों के पुष्प खिलाती, उपवन नवल सजाती है।यह राम कृष्ण की पावन धरती, हम सबको नित भाती है॥ शुभ-मंगल की पवन बह रही, रीति-नीति के मेले हैं,साँच और तप दिलों में रहते, किंचित नहीं झमेले हैं।सीता, अनुसुइया का बल है, संतों की जो थाती है,यह राम कृष्ण की पावन धरती, हम … Read more

जर्जर काया

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* गहरी होती झुर्रियों में, जीवन का इतिहास दिखा।दुनिया के हर रंग का, इस काया ने स्वाद चखा॥ जर्जर हो गई काया अब तो, दुख के कईं झमेलों से,कभी खुशियाँ बहुत बिखेरी, दुनिया के इन मेलों ने।दर्द के कईं थपेड़ों से भी, मैंने खुद को थाम रखा,गहरी होती झुर्रियों में, … Read more

सिंदूर की शपथ

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)… सीमा पर फिर गर्जन गूंजा, रण का नभ अंगार हुआ,भारत माँ के वीर सपूतों का फिर जयघोष अपार हुआमाथे का सिंदूर बचाने निकली जब रणभेरी थी,भारतीय सेना की गाथा तब इतिहासों से गहरी थी। हिमगिरि की चोटी से लेकर मरुभूमि के विस्तार तलक,हर सैनिक … Read more

कौन कहता है…?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* दूरियाँ दिलों को जोड़ती हैं या तोड़ती हैं,यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, जिस पर अलग-अलग विचार हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि दूरियाँ रिश्तों में खटास लाती हैं,पर वास्तव में विश्वास और संवाद की कमी ही रिश्तों को तोड़ती है। दूरी बढ़ने से प्रेम में संदेह जन्म ले सकता है,दिल धड़कता … Read more

एक और मजदूर दिवस…

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)… मैं मजदूर, झूठे सपने लिए चलता हूँ,बेबसी और भूख के घर में पलता हूँमौन रहता हूँ, धूप, सर्दी सब सहता हूँ,गरीबी की चादर उधेड़ता हूँ, सिलता हूँ। मेहनत इतनी करता है मजदूर,जब उद्योगपति के घर फूलते-फलते हैं,पसीना बहाता है श्रमिक तब … Read more

एक पीड़ा..

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. स्वर्ग की वादियों मेंहिंदू की कहानी लिखी गई,खुशियों की बारातों मेंआँखों से खून की नदी बही। पहलगाम में जबसिंदूर उजड़ गया,चेतावनी नहीं थी वोसनातन पर हमला था। “सनातनी हैं हम” —सुनते ही आतंकी टूट पड़ेआँखों के सामने खुशीमातम में बदल गई,रोम-रोम पर अत्याचार हुआये कैसा कहर … Read more

काश! तुम समझ सकते

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुम थक कर सो गए थे न,फिर मध्य रात्रि मेंउनींदी अखियों से,क्यों झांका वॉट्सएप में!मेरा शेर, कभी मेरी कवितापढ़ने के लिए या फिर सिर्फ,ये देखने कि मैंने क्या लिखा है ? तुम जान-बूझ कर,इसका जवाब नहीं दोगेरात और सुबह तन्हा रहकर,उन पंक्तियों को दुबारा पढ़कर भीतुम खामोशी की परत चढ़ाकर,मेरी लेखनी … Read more

साहस की कहानी था ‘सिंदूर’

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** भारतीय सेना… (‘आपरेशन सिंदूर’ दिवस विशेष)…. देश तभी होता सुरक्षित है,जब त्याग घर-घर जलता हैएक सैनिक सीमा पर रहता है,पीछे पिघलता पूरा परिवार है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ केवल,सीमा का अभियान नहीं थायह नारी के साहस की कहानी,मौन और गंभीर गीत था। सीमा पर जब उड़ी थी धूल,आकाश में बारूद भरा थाधरती ने सुना … Read more