ना जाने क्या हो तुम

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* ना जाने क्या हो तुम,मेरे जीवन के हिस्से मेंकौन-सा भाग हो तुम,ना जाने मेरे क्या हो तुम। रहती हो अगर सामने,समय दूर हो जाता हैकब दिन हो कब रात,पता नहीं चल पाता है। मेरे घर की हो तुलसी,या जीवन में आई खुशीतुम जो भी हो,तुम्हीं हो मेरी हँसी। मेरे गमों … Read more

अपना कौन, सब अकेले

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अब मन नहीं करता,किसी को अपना कहने कारिश्ते बेईमान-से लगते हैं,हर बात अपरिचित-सी लगती है। अब तो अपनी परछाई भी,पराई-सी प्रतीत होती हैआइने में अपना ही चेहरा,धुंधला, थका-थका दिखता है। हम भी अब खुद से,अनजाने हो चलेमन अपना नहीं रहा—बस अपने होने का आभास बचा है। पास बैठा इंसान भी,अब मनुष्य नहीं … Read more

आँसू बहा लेता हूँ मैं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ दर्द बहुत है तेरे जाने के बाद,हर पल दुखों का साया नजर आता हैटूट चुका हूँ मैं इतना, समझ में कुछ नहीं आता है,अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…। तेरे साथ बीते वह पल भी अजीब थे,छोटी-छोटी ‘उंगलियों’ को पकड़ कर चलता थासाथी तू मेरा स्वाभिमान … Read more

मौसम का सितम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मौसम सितम का हाल है ये,हर दिन रंग बदलते रहतेकभी प्रचंड ताप, गर्मी बढ़ाता,कभी रह-रहकर पानी बरसाताकभी आँधी लाकर मन-मौजीपन करता,कभी ओले, तो कभी तूफान लाता। जीना मुहाल हुआ है व्यक्ति का,गर्मी इतनी बढ़ी कि तापमान ४५ डिग्री जा पहुँचालगे जैसे अंगारों पर चल रहे हों,तापमान बढ़ता ही जा रहाअब कितने … Read more

रक्षा करें, लें संकल्प

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरा-भरा पर्यावरण, धरती का श्रृंगार।वृक्षारोपण मिल करें, दें जीवन उपहार॥ रक्षण धरती प्रकृति की, हम सबका दायित्व।हरियाली हो हर जगह, तभी सृष्टि अस्तित्व॥ धरा धाम जीवन धुरी, सहे सभी संताप।करें नमन पृथिवी दिवस, गिरि तरु नदियाँ आप॥ मिट्टी जल वन वायु से, चलता जीवन चक्र।इनके बिन जीवन जगत, इन … Read more

कलयुग की यही विडम्बना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मनुष्य न समझे मनुष्य को,रहें दूर सब अपनों से, करते आपस में भेद सदा। छोटे-छोटे स्वार्थ लिए,भाई, भाई को समझे नहीं,नारी को बहन न माने —कितनी नजरें फरेबी हैं!मन को देखे कौन यहाँ,सबकी बस तन पर नजर है। अपने ही अपनों के हित मेंतनिक नहीं संकोच करते,औरों के सपनों कीबलि चढ़ाने से … Read more

चाय है लाज़वाब

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** चाय तो चाय है, ये तो लाजवाब है,सेहत में बेमिसाल है, स्वाद में बेहिसाब है। सिर दर्द हो या बेदिली, सबका एक जवाब है,चाय लाजवाब है, चाय ही तो चाय है। अंग्रेजी में ग्रीन टी, हिन्दी में हरी चाय,मसाले वाली चाय, नींबू की खट्टी- मीठी चाय। अदरक वाली चाय, असम वाली चाय,तनाव … Read more

आस्था

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ******************************************** मन में आस्था भाव रख, करें ईश की भक्ति।दुर्गुण सारे दूर हों, बढ़े आत्म की शक्ति॥बढ़े आत्म की शक्ति, मुक्ति का द्वार खुलेगा।मिटे पाप संताप, आत्म आनंद मिलेगा॥कर लो स्वयं उपाय, इसी मानव जीवन में।जीवन है दुष्प्राप्य, भाव यह रखना मन में॥ रखके आस्था भाव जो, करता है शुभ कर्म।मिले सफलता … Read more

पृथ्वी-सुता माँ जानकी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ पृथ्वी के गर्भ से आईं माँ जानकी,जनक जी की दुलारी थीं माँ जानकी।कितनी प्यारी, जनक-दुलारी माँ जानकी! एक दिन राम मिले, फूल तोड़ते उपवन में,नैन से नैना यूँ लड़े, जैसे फूलों के बाग मेंसभा जब लगी, राम निहारें सिया को, सिया निहारें राम को,सभा में सब निहारें सिया-जानकी के रूप कोएक धनुष … Read more

तू ही मेरे मन का मोहन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तू ही मेरे मन का मोहन, तू ही मेरा श्रृंगार है,नीरव नयनों निखरा तेरा अनिर्वचनीय इकरार है।मंदाकिनी मृदु स्मृति में महकता है तेरा अभिसार,अधरों की अरुणिम किरणों बस प्रेम-पुलकित उद्गार है। श्यामल श्याम छवि छू जाए, चेतन चिर विहार है,राधा-रोम-रोम में रमता रसमय तेरा संभार है।मुरली-मंत्रित मधुप मनों में … Read more