इतिहास ने खुद को फिर दोहराया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** किसी और के बाद है अब मथुरा की बारी,पूरा करके रहेंगे, अब न कोई लाचारीएक वर्ग को ये सपना कुछ रास न आया है,देखो आज इतिहास ने खुद को फिर दोहराया है। जिसे सहारा दोगे यहाँ पर, वही करेगा घात,मौका मिलते ही दिखलाएगा, अपनी औकात‘विश्वगुरु’ का सपना रह जाएगा बनकर ख्वाब,उनकी नीच … Read more

कोई तो सुन ले

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है,बहुत कुछ कहता है ये मनमन ये मन,कुछ कहता है। कोई सुन ले,कोई तो सुन लेक्या कहता है ये मन,मन ये मनकुछ कहता है। बातें हैं, यादें है,सपने हैंकुछ अपने हैं,मन ये मनकुछ कहता है। आँखें बंद कर सोचता,अंधेरों … Read more

दिल करता है

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…. दिल करता है, छू लूँ गगन को,दिल करता है, पंछी बन जाऊँ। दिल करता है, पर्वत पर चढूं,दिल करता है, खूब चिल्लाऊँ। दिल करता है, हिल स्टेशन घूमने जाऊँ,दिल करता है, बादलों की सैर कर आऊँ। दिल करता है, चंद्रमा को निहारूँ,चकोर बन कर, सैर … Read more

कहाँ खो गया पनघट

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सूखते कुएं की कहानी है ये,वीरान पनघट की कहानी है येकभी आबाद थे जो,उन सूने घाट की कहानी है ये। एक समय पनघट पर जब,पनिहारिन का लगता मेला थाखनकती चूड़ी, छम-छम पायल,संगीत सुहाना सजता था। प्रेम कहानी, घर के झगड़े,पनघट ही पंचायत थी।सखियों के संग चुहल-ठिठौली,पनघट पर ही होती थी। पंछी, पथिक, … Read more

रिश्तों की संजीवनी अपनापन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* रूप चाँदनी भा रही, रही आज मन मोह।अंतर्मन में नेह है, हर पल है आरोह॥ सन्नाटा छाया हुआ, चुप है हर आवाज़।सुर भी सब मायूस हैं, खामोशी में साज़॥ हर दिल को तो भा रही, तेरी मृदु मुस्कान।हर दिल में रहती सदा, इसकी पावन आन। आँसू लगते नेक हैं, जब हो … Read more

उड़ना चाहता हूँ आसमान तक

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है…खामोशियों में भी एक शोर रहता हैइच्छाओं के दीप जलते हैं भीतर,हर सपना आँखों में चोर रहता है। कभी उड़ना चाहता हूँ आसमान तक,कभी धरती से जुड़कर ठहर जाता हूँमन के कोनों में अनगिनत ख्वाहिशें,हर रोज़ नई राह पर … Read more

तू तो कमाल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** चाय तू तो कमाल ही करती है,सुबह की पहली चायहोंठों से कप को लगाते ही,दिल कह उठता है वाह चाय!तेरा तो कोई जवाब ही नहीं,एक कप चाय केवल दूधचाय पत्ती, चीनी का मिश्रण ही नहीं है,वरन् आपसी रिश्तों की शुरुआत हैचाय तू तो कमाल ही करती है…। सुबह-सुबह शरीर में ताजगी भर … Read more

जागो, अंधकार हरो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जागो, ज्वाला बन कर अंधकार का आवरण सब हरो,लिखो स्वर्णिम गाथा ऐसी, युग-युग तक स्मृति में धरोमिट्टी की सौंधी खुशबू जीवन का नाता हो गाढ़ा,राष्ट्र-प्रेम की वीणा लेकर हर दिल में तुम भक्ति भरो। सीमा पर जो अडिग खड़े हैं, उनमें साहस शौर्य भरो,डरो नहीं विपदाओं से, सत्य-सुपथ पर … Read more

ना जाने क्या हो तुम

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* ना जाने क्या हो तुम,मेरे जीवन के हिस्से मेंकौन-सा भाग हो तुम,ना जाने मेरे क्या हो तुम। रहती हो अगर सामने,समय दूर हो जाता हैकब दिन हो कब रात,पता नहीं चल पाता है। मेरे घर की हो तुलसी,या जीवन में आई खुशीतुम जो भी हो,तुम्हीं हो मेरी हँसी। मेरे गमों … Read more

अपना कौन, सब अकेले

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अब मन नहीं करता,किसी को अपना कहने कारिश्ते बेईमान-से लगते हैं,हर बात अपरिचित-सी लगती है। अब तो अपनी परछाई भी,पराई-सी प्रतीत होती हैआइने में अपना ही चेहरा,धुंधला, थका-थका दिखता है। हम भी अब खुद से,अनजाने हो चलेमन अपना नहीं रहा—बस अपने होने का आभास बचा है। पास बैठा इंसान भी,अब मनुष्य नहीं … Read more