निर्मल उन्मुक्त बचपन
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरे-भरे मैदान में बच्चे दौड़ लगाते,हँसी की मीठी धुन में सपने झिलमिलाते। नीले गगन तले खुशियों का है मेला,हर नन्हा दिल जैसे रंगों का अलबेला। कोई आगे बढ़ता, कोई पीछे आता,मस्ती की राहों में सब संग मुस्काता। छोटी-छोटी बातें, बड़े-बड़े अरमान,खेल-खेल में सीखें जीवन का सम्मान। हवा संग उड़ते … Read more