नदी पार की चिट्ठी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ प्यार रहता हमारा नदी के पार,चिट्ठी में रहता प्रेम का सारकरवट लेकर कटती रातें,कैसे-कैसे बीती दिल की बातेंआँखें चार होती बड़े प्यार से,कितने-कितने दिन देखेनदी के इस पार आँखेंआज देंगे चिट्ठी नदी के उस पार जाकर। आज आई रानी की चिट्ठी,हर पंक्ति में प्रेम भरा थाप्रेम को मेरे समझो तुम रानी,पढ़कर चिट्ठी … Read more

आगे ना जाने क्या होगा… ?

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** ज़िंदगी एक वसंत (स्पर्धा विशेष)… हे सखी, पतझड़ बीता वसंत आया,पर पूर्ववत् उल्लास ना लायाशहर में आया सिसक-सिसक के,क्यों गाँव में चली हवा मचल के। कटते जा रहे, सब वन-उपवन,जलती धरा और बढ़ती तपनप्लास्टिक से फैल रहा प्रदूषण,बिगड़ रहा है प्रकृति सन्तुलन।अगर सचेत ना मानव होगा,तो आगे ना जाने क्या होगा… ? … Read more

यादों में…

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** तुम यादों में शामिल हुए मेरे ऐसेकि दिल में मेरे तुम ही तुम बस गए हो,फ़लक से ज़मीं तक निगाहें घुमातीक़िस्मत भी मेरी एक तुम हो गए हो। ख़ुदा को तलाशा कि कुछ बात कर लूँपर साया ख़ुदा का भी तुम हो गए हो,आँखों में जब से बसाया है तुमकोख़ुशियों की-ग़म की … Read more

तिरंगा गर्व जगाए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आसमां तिरंगा लहराए, जन-गण मन में गर्व जगाए,आज़ादी का दीप जलाए, साहस सत्पथ ध्वज दिखलाए। चहुँ सीमा पर संकल्प अडिग, वीरता का अद्भुत संधान,अमर शहीदों गाथा गाए, भारत माँ का मान बढ़ाए। हरित-भरित धरती मुस्काए, अन्नपूर्णा सुख बरसाए, किसानों का श्रम … Read more

फर्क नहीं पड़ता

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता,संक्रमण क्या है यह उसे नहीं पता!उत्तरायण, दक्षिणायन, पुण्यकालया महापुण्यकाल, दान, उपवास, भजन या कीर्तन,उसे इन सबका कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। धरातल पर मानव के अस्तित्व के,पहले से ही, करोड़ों साल पहले सेवह तो केवल हाइड्रोजन जलाता है,बाकी के सभी अर्थ मानव द्वारा निर्मित हैंउत्तरायण … Read more

ज्ञान की धार बहा दो माँ

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** ज़िंदगी एक वसंत (वसंत पंचमी विशेष)… अविरल ज्ञान की धार बहा दो‌ सरस्वती,भक्ति, प्रेम मम् वाणी सजा दो सरस्वती। सर्व कला संपन्ना प्रकटी दुर्गा से,शिव-भक्ति आशीष सदा दो सरस्वती। अजपा सा शिव जाप चले उर के भीतर,भक्ति शब्द गहने पहना दो सरस्वती। शुभ वरदायिनी कमल आसिनी हे! माते,दृढ़ भक्ति-आसन … Read more

हे!वाग्देवी, सुन लो मेरी प्रार्थना

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ज़िंदगी एक वसंत (वसंत पंचमी विशेष)… हे!वाग्देवी ज्ञानदा, सुन लो मेरी प्रार्थना,हम पर तुम कृपा करो, दूर करो दुर्भावना। तेरी शरण में आयी हूँ, दो फूल चढ़ाने लाई हूँ,दे दो ! वाग्देवी ज्ञानदा, सुन लो मेरी प्रार्थना। मन के सारे दर्प दूर हों, दिल के सारे भ्रम दूर हों,ऐसा कुछ मैं कर … Read more

रिश्ता सम्हाले रखिए

जी.एल. जैनजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* तूफान में दीए की लौ जला के रखिए,फटे हुए मन रफू करके रखिएसुन लो किसी की सिसकियाँ तो,सिसकियों को गले लगा के रखिए। तितलियों से मशविरा करके रखिए,चिड़ियों की चहचहाहट सुन के रखिएभौरों की तरह मंडराएं फूलों पर,दिल चुराने के पहले औकात देख के रखिए। नज़र से नज़र मिला के रखिए,बात से … Read more

थकना तो मन का होता है

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभीजब तलक मन में रहती है दुर्बलता,दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममताजग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहींछाया से माया से दोनों होते सदा,आते-जाते ही रहते हैं सुख और दु:खजिन्हें … Read more

वासन्तिक मधुमास माधवी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ज़िंदगी एक वसंत (वसंत पंचमी विशेष)… आया माघी मास मनोहर,मौनी अमावश तिथि पावन हैवासन्तिक मधुमास माधवी, मुकुलित रसाल मनभावन है। वसन्त पंचमी तिथि पुण्यदा,मातु भारती पद्मासन हैपूजन वंदन श्वेत पुष्प फल,नवान्न नेवैद्य माँ अर्पण है। वीणानिनादिनि ज्ञान-स्वर भर, हंसवाहिनी श्वेताम्बर हैसुखदे वर दे शुभ्र ज्ञान रस,सदा सर्वदे वैदिक स्वर … Read more