सदैव आजाद ‘नेताजी’

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** सदैव आज़ाद, हिन्द क्रांतिवीर ‘नेताजी’ सुभाष,गुलामी से आज़ाद, कांग्रेस से आजाद योद्धा सुभाषजापान में भारतीय कैदी किए आजाद संग्रामी सुभाष,“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” नेताजी सुभाष। २३ जनवरी १८९७ को कटक में जन्मे नेताजी सुभाष,माँ प्रभा देवी, वकील जानकीनाथ बोस के पुत्र सुभाषप्रेसीडेंसी कॉलेज, कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय … Read more

आँसू और खामोशी

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** आँसू जब भीआते हैं,मन को हल्काकर जाते हैं। दिल का गुबारनिकल आता है,मन शांतहो जाता है। कभी खुशी केआँसू होते हैं,कभी गम केआँसू भी होते हैं। दिल के अरमानआँसुओं में बह जाते हैं,हम खामोशी मेंरह जाते हैं। आँसू और खामोशीका घना नाता है,आँख से आँसूखामोशी में ही आता है। … Read more

पहाड़ों का सपना

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* शाम सिंदूरी-सिंदूरी अर्क में डूबीनहला रही है पहाड़ों को,दिनभर सूर्यस्नान किए पहाड़ सन गए हैंसिंदूरी वर्ण के रक्तिम फाहे सेपश्चिम की देहरी पर पसरता जा रहा है,सिंदूरी-सिंदूरी संसार। घुंघरू बाँधकर संध्या ठिठकी-ठिठकी-सी,घूम रही है पहाड़ों के इर्द-गिर्दमैं सुन रहा हूँ कदम-कदम पर पड़ती,घुंघरुओं की खनक। पाँवों में अलता लगाकर हौले-हौले पड़ते,पदचापों … Read more

सूरज सोया ओढ़ रजाई

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** वृक्ष-पात से नीर झरे,धुंध ही धुंध दिखाई पड़ेहाड़ कम्पाती ठंडक आई,सोया सूरज ओढ़ रजाई। बोला अब ना निकलूंगा,अब करना मुझे विश्रामचलते-चलते थक जाता हूँ,पहर और आठों याम। सुन माँ अदिती दौड़ी आई,प्यार से कुछ बातें समझाई।उठ जा बेटा फेंक रजाई,समझ जरा तू पीड़ पराई। देख धरा पर कैसी हलचल,जीव-जंतु सब हो रहे … Read more

संकल्प को सफल बनाना है

वंदना जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…. विस्तृत गगन को नाप कर छोटा-सा बनाना है,स्वर को मुखर और संकल्प को सफल बनाना है। पतझड़ को झाड़ कर बसंती छटा को बिखर जाना है,राह कंटकों को पराजित कर लक्ष्य को पा जाना है। संघर्ष से तपती देह को शीतल चाँदनी में लेटाना … Read more

भारत का दिव्य पुत्र

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ एक ही कार्य हाथ में लो, उसे करके दिखलाओ,कष्ट चाहे जितने भी आए, देश का मान न मिटाओ। मन किया शिव व्रत जन्म लिया, बालक देवत्व।नाम नरेंद्र दत्त था, माँ का था वह बड़ा दुलारा। भटकते-भटकते मिल ही गए गुरु महान,इंतजार में बैठे रामकृष्ण परमहंस काली के दरबार। गुरु दिए भरपूर ज्ञान, … Read more

लक्ष्य को हासिल करो

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** दिन महीना पुराना, साल गुजरा,कुछ खट्टा-मीठा, भूला-बिसरा। आओ मनाएं नया, साल आ गया,कुछ नया करने का मुकाम आ गया। जो गलती हमसे, पहले हो गई,जो भी हमारी, मंज़िल छूट गई। गलती को फिर, से न दुहराना है,छूटी मंज़िल को, फिर से पाना है। सिर्फ कोरा वादा, नहीं करना है,वादा पूरा हो ऐसा, … Read more

महान पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** पद्म विभूषण, महान स्वतंत्रता सेनानी, पर्यावरण आंदोलनकारी,माता पूर्णा देवी एवं पिता अम्बा दत्त बहुगुणा जी थे वन अधिकारीपुत्र ९ जनवरी १९२७ को टिहरी गढ़वाल में जन्मोत्सव की तैयारी,नाम सुंदरलाल बहुगुणा जो आज़ादी के महासंग्राम में सौंपी ज़िंदगी सारी। प्रारम्भिक शिक्षा टिहरी में कर लाहौर में स्नातक की मिली उपाधि,१३ … Read more

पर्व मनाते हैं

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** संक्रांति मनाते हैं,दिनकर-पूजा करभोग को लगाते हैं। हर प्रांत मनाते हैं,तिल, गुड़, मूँगफलीसब मिल कर खाते हैं। ये नई उमंगें हैं,आसमान भर मेंउड़ रही पतंगें हैं। ये बहुत लुभाती हैं,बड़ी और छोटीमन को सब भाती हैं। मन करता उड़ जाऊँ,संग साथ इनकेहिल-मिल कर कुछ गाऊँ॥

मन नहीं करता

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अब मन नहीं करताकिसी को अपना कहने का,हर रिश्ता अब बेमन-सा लगता हैहर बात कुछ अपरिचित-सी लगती है। अब तो अपनी परछाई भीपराई सी प्रतीत होती है,आईने में अपना ही चेहराधुंधला और थका-थका सा दिखता है। हम भी अबखुद से अनजान हो चले हैं,मन अपना नहीं रहामात्र अपने होने का आभास बचा … Read more