हिंदुत्व के पुरोधा

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** स्वामी विवेकानंद जयंती (१२ जनवरी) विशेष… कलकत्ता में जन्म लिए प्रतिभाशाली नरेंद्र नाथ जी दत्त,माता भुवनेश्वरी, पिता प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त१२ जनवरी १८६३ मालूम है, जन्म वर्ष शुभ मुहूर्त का वक्त,शिक्षा ज्ञान से अभिभूत होकर बने माँ काली के परम भक्त। प्रेसीडेंसी कॉलेज व स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पाई … Read more

कब तेरी मंजिल आ जाए…!

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ज़िंदगी का हर एक पल कीमती है,फिर बरसों की तू क्यों सोचता है ?चार दिन के इस सफ़र में,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे पता..! फिर भी तू क्यों भटक रहा है ?माया-मोह व लालच के फरेब मेंवर्तमान को जी ले आनंद व उल्लास से,कब तेरी मंजिल आ जाए, किसे … Read more

शिव भज प्यारे

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव,शिव शिव शिव शिव भज प्यारे।माया-मोह को तज प्यारे॥ तू ना तरेगा बिन शिव कह के,कुछ तो सोच-समझ प्यारे।योनि-योनि भटक के मानव,तू बन पाया सच प्यारे॥शिव शिव शिव शिव भज प्यारे… प्रभु-कृपा से नाम मुख निकसे,प्रभु-प्रेम में सज प्यारे।वैभव तज के शिव … Read more

बिजी है फोन

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** आवाज आती है, ट्रिन ट्रिन ट्रिन,घंटी बजती है, फोन बिजी हैपता चलता है, इंसान बिजी है,यही फैशन है, फोन बिजी है। बात नहीं करना, मन नहीं है,दिखावा करना, फोन बिजी हैजरुरत हो तो, हर वक्त हाजिर है,दूसरों की जरूरत, फोन बिजी है। बातों को टालना, नेटवर्क नहीं है,जोर से बोलना, सुनना नहीं … Read more

गली-गली धुंध

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गाँव-गली, शहर-नगर तक छाया धुँआ-धुँध,ठंडे में सन्नाटा पसरा, प्रदूषित ओस की बूँदरुकी रफ्तार ट्रक, बस, कार की, धुंध आँखें मूंद,कश्मीर-हिमाचल की ठंड को छोड़ो बर्फबारी अंधाधुंध। ठिठुरन-जकड़न में जन जीवन, आँखें हुई है कुंद,शीतलहर से सभी त्रस्त थे, खेल रहे हैं बाल मुकुंदखेतों में हरियाली आई, सरसों पीले फूल … Read more

‘सहयोग’ मौन अनुबंध

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सहयोग वह मौन अनुबंध होता है,वह करुणा की अस्थाई छाया होता है। जो मनुष्य को मनुष्य तो बनाए रखता है,इस सभ्यता के कठोर तट पर। यह कोई दया नहीं होता है,जब इतिहास ने हड्डियों से हथियार पहली बार गढे़ होंगे। तब भी अस्तित्व के पक्ष में,भय के विरुद्ध, किसी ने किसी का … Read more

प्रेम चाहता हूँ…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो सुकून दे…जिसके पास रूह हो प्यार भरी,जो समझे मन की थाहजो देखे मेरे प्रेम की राह। प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो तैरे नैनों के सागर में…समझे अँखियों की आशा,हर पल महसूस करे मन की भाषाजो थाम ले बस मेरा हाथ,चले कदम-दर-कदम मेरे साथ। प्रेम करना चाहता … Read more

अपना-पराया

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ दिल सच्चा हो अगर, उसका सब अच्छा होता,ईश्वर पर हो भरोसा, उसका सब अच्छा होता। दिल में हो मुहब्बत, अगर तो कष्ट नहीं होता,ईश्वर पर भरोसा, कोई काम अधूरा कहाँ होता। अजब यह दुनिया है, कोई सच्चा नहीं होता,कृष्ण मिल जाए जग में, इन्सान सच्चा न होता। मन में होता है मेरा … Read more

…वो संकल्प करो

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… निभा सको, वो संकल्प करो,आज अभी इसी वक्त करोसबके प्रति अपने भाव को,सरल, शुद्ध, स्नेहिल करो। सफलता एक-एक सीढ़ी चढ़ो,तन-मन-धन से काम करोतूफान गति से कुछ नहीं होना,मंजिल तक धीरज से बढ़ चलो। संघर्ष का नया दामन थामो,उम्मीद का सुंदर पाठ गुनोनए वर्ष … Read more

लहू से लिखा गया लोकतंत्र

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** ढाका की गलियों में उठी जो आग,वह क्रोध नहीं-सत्ता का नागएक शहर नहीं, चेतना जली,लोकतंत्र की आत्मा छलनी हुई। सवाल पूछना बना अपराध,सच बोलना देशद्रोह का स्वादकानून खड़ा है आँखें मूंद,हाथों में सत्ता, दिल में क्रूरता की धुंध। धर्म ने ओढ़ा नफ़रत का जाल,राजनीति ने खोया नैतिक भालईश्वर का नाम … Read more