हृदय के भाव को समाहित कर रही

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** आज मैं अपने हृदय के भाव कोनयी कविता में समाहित कर रही,आज मैं अविराम गति आगे बढ़ने का कठिन व्रत अपने मन में धर रही। आज स्वेच्छा से वरण कर आत्म अनुशासन नियम का पाठ मैं पढ़ रही,आज स्व का आदर करने का अभ्यास शुरू कर रहीआज से क्रोध न करने का … Read more

प्रेम-प्यार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** प्रेम-प्यार जीवन का गहनासदा प्यार से रहना,नहीं किसी का बुरा करो तुमनहीं बुराई करना। गलती हो यदि अनजाने मेंक्षमा हमेशा करना,स्वयं से कोई हो यदि गड़बड़क्षमा-याचना करना। गलती करके ही हैं सीखतेमत इससे घबराना,बार-बार अभ्यास के द्वाराकाम सही कर लेना। पौरुष कर तुम सदा बढ़ोगे,बस आगे ही बढ़ना।सिर पर हो आशीष बड़ों … Read more

राम आएंगे

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** पाँच सौ वर्षों की प्रतीक्षा, खत्म हो रही हैराम पधार रहे हैं, अयोध्या आज सज रही है। सब कुछ भूल के मन ये मेरा, आज कर रहा नर्तन,हर कोई आनंदित होकर, राम का करता कीर्तन। घर-घर वंदनवार सज रहे, झूम के नाचो-गाओ,आज अयोध्या राम आ रहे, दीपावली मनाओ। राम की प्राण-प्रतिष्ठा होगी, … Read more

माँ लक्ष्मी करें प्रवेश

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )****************************************************** दीवाली में साफ करें घर के कोने का मैल,गौशाला भी साफ करें और गाय-बैलहर उपकरण साफ हो, करें मरम्मत बिगडैल,दीपावली शुभ-शुभ, हो खुशियों का ताल-मेल। घर-मकान की पुताई में ना हो भाई तू फेल,साज-सज्जा, रंग गुलाल, पटाखों की लगी है सेलभिन्न-भिन्न प्रकार मिष्ठानों के अजब निराले मेल,दीपावली की भीड़ … Read more

फौज गिद्धों की

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* निरीहों से कई प्लेट सजी हैहड्डी, मांस, चीथड़े से भरी है,महकते रक्त की गंध भांपकरफ़ौज गिद्धों की उमड़ पड़ी है। बाहुबल का तीव्र चलन हैखेमे तोड़ने गिद्ध बहुत हैं,जहां मिलेगा मांस देखकरजोड़-तोड़ की कश्मकश है। नन्हें गिद्ध भी पके रखे हैंसयाने के तो भाव बढ़े हैं,चीथड़े में सिसकती जानेंमृत्यु का इंतजार … Read more

सुबह नयी है

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* सुबह नयी है,सपनों की राह वही हैचल पड़ो मंजिल की ओर,सपनों की राह तो वहीं है। माना कि मंज़िल अभी दूर है,पर जीने की आशा तो नयी हैडगमगाकर भ्रमित न होना राह में,मेरे साथी सपनों की राह तो वही है। आएंगी परेशानियाँ मंज़िल में,तुम कहीं घबरा न जानाहम रहेंगे साथ सदा,फिर … Read more

नदिया, जुगुनू और सितारे

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* नदिया पृथ्वी का मनमीत गीत गा रही है,अलग-अलग आलाप सुनाती जा रही हैसुबह से शाम तक रात से सुबह तक अनवरत,नये-नये संगीत के तराने सुनाती जा रही है। बिल्ली के गुमसुम कदमों-सी संध्या लौटने लगी है हौले हौले,बहुत देर तक संध्या और नदिया की बात होती रही,मौन पालेइस मौन में भी … Read more

पहाड़ों पर बसी स्त्रियाँ

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ पहाड़ों पर बसी स्त्रियाँ,अपने घरों में…संघर्ष की जलाती हैं,अनूठी मशाल….। रोशनी से दीप्त, पर्वत की श्रृंखलाओं में,बांध देती हैं, मन की सारी भंगिमाएंबिखरा कर अल्कों की तन्हाई को,तृषित नयनों से बैठ…पर्वत की उप्तकाओं में उगे,फूलों के मकरंद को अंजुली में,भर…मुस्कुराती हैं, गाती हैं, प्रियतम के,आवाहन गीत…। पहाड़ों पर बसी स्त्रियाँ,देह … Read more

मन की आँखें

वंदना जैनमुम्बई(महाराष्ट्र)************************************ छुपाए बैठी हूँ भोलेपन को आँचल में,बडी मासूमियत से दूसरों को देखती हूँ। बुरा कोई भी नजर आता नहीं,पर बाद में उनके करतब देखती हूँ। आसक्त हूँ मान्यताओं और संस्कारों से,आचरण में भी अभिव्यक्त देखती हूँ। कभी-कभी मन के अक्षांश से उतर कर,तन पर कुटिलता भरी नजर देखती हूँ। छल-कपट भरी दुनिया की … Read more

अंधविश्वास से केवल हानि

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* जादू-टोना कुछ नहीं होता है, केवल यह है अंधविश्वास,अनपढ़, मूर्ख लोग ही, करते इस पर भरोसा, रखते आस। तंत्र-मंत्र है बेमानी सब, जान लो, इसमें कुछ नहीं रखा,हानि होती है केवल ही, जिसने अंधविश्वास को है गहा। गाँव-गाँव में तांत्रिक-मांत्रिक, मिलते नित जाल बिछाये,वहीं भुगतता जो झाड़-फूँक के अंधविश्वास में है … Read more