मेरी ‘शोभा’ मेरा शबाब

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:२२१२ १२२२ २१२१ २२ इक पौध पर खिले हम, जिसका खिताब तुम हो।हूँ खार शाख पर मैं, उसका गुलाब तुम हो। मुरझा कभी न जाना, दुनिया की गर्दिशों में,चमका करे हमेशा, वो आफताब तुम हो। दुनिया में बादशाही सजकर रहे हमारी,कहता जहान सारा इक माहताब तुम हो। खादिम रहूं … Read more

अँधेरा मिटाया नहीं

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ********************************************************** कभी दीप कोई जलाया नहीं,अँधेरा दिलों से मिटाया नहीं। सहारा बने न किसी के कभी,गिराते रहे, क्यों उठाया नहीं। उजाड़ी सदा प्यार की बस्तियाँ,जहाँ पर किसी का बसाया नहीं। रुलाया है अपनों को तुमने सदा,कभी रोते हुए को हँसाया नहीं। हमेशा जिये घुट के ये ज़िन्दगी,कभी दर्द अपना बताया नहीं। रहे … Read more

मुहब्बत कम नहीं होती

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** निगाहें फेर लेने से मुहब्बत कम नहीं होती।दबा लो जितना भी जी चाहे, कीमत कम नहीं होती। तड़प दिल की बहुत यारा तुम्हें जब आज़मायेगी,ये रहता है बहुत बैचेन, हिम्मत कम नहीं होती। अज़ब ये चीज़ उल्फ़त है, रुलाती है हंँसाती है,मगर क्यों इसको पा लेने की हिकमत कम नहीं होती। … Read more

शोर मचाना नहीं चाहिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* जब उसे ये ज़माना नहीं चाहिए।शोर ज़्यादा मचाना नहीं चाहिए। आसमां सर उठाना नहीं चाहिए।जब कोई भी ख़ज़ाना नहीं चाहिए। ख़ूब वाकिफ़ हक़ीक़त की ताक़त से हूँ,कोई झूठा फ़साना नहीं चाहिए। एक झोंका हवा का गिरा दे जिसे,अब महल वो बनाना नहीं चाहिए। फायदा यार कमजोरियों का उठा,उँगलियों पर … Read more

तू साथ गर नहीं है…

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* तू साथ गर नहीं है।अच्छा सफ़र नहीं है। परवाज़ की तमन्ना,उड़ने को पर नहीं है। है ख्वाब में खज़ाना,कर में मगर नहीं है। इंसान मारता नित,कोई भी डर नहीं है। औरत को मारता जो,असली वो नर नहीं है। खाने को छोड़ देता,गर माल तर नहीं है। कहता है खुद … Read more

अगन पेट की

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* पावक में तंदूर के पकती रोटी, बुझे तब अनल पेट की।दस्तूर निभते जहां के, तभी जब मिटे हर अगन पेट की। सम्मान जग में न होता मुकम्मल, बमुश्किल कटे ज़िन्दगी,हैवानियत जीतती है हमेशा, हराती लगन पेट की। जितनी मुहब्बत हो, कितनी भी उल्फत भरा पेट ही खुश रहे,सागर न … Read more

भला आदमी

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* अस्ल होता वही है बड़ा आदमी।सबकी खातिर करे जो दुआ आदमी। तंग करता फिरे दायरा आदमी।हर समय सोचता फायदा आदमी। दूसरों की बुराई करे हर जगह,यूँ भी बनता कहीं है भला आदमी। लोक सेवा जो करता रहे हर समय,याद करता उसी को सदा आदमी। बात बे बात कर के … Read more

खूबियाँ-ख़ामियाँ पहचानिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* खूबियाँ ख़ामियाँ खुद की पहचानिये।कामयाबी मिलेगी यक़ीं जानिये। इक ख़ुदा की इबादत भली जानिये।ख़ाक दर-दर की हरगिज़ नहीं छानिये। ज़िन्दगी में पहल की ज़रूरत बड़ी,इक क़दम से सफ़र हो शुरू जानिये। दो जहां की भलाई हो उसमें निहित,बात अपने बड़ों की सदा मानिये। दीजिये नेक अंजाम फिर जां लगा,मन … Read more

जल रहा दिल

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचना शिल्प:२१२२, २१२२, ११२२, २२ दूर रहते हैं वो अब बात कहांँ होती है,लब सिले होते हैं आँखों से बयाँ होती है। जल रहा दिल ये जुदाई में तड़पता हूँ मैं,जब सितारों से सजी रात जवाँ होती है। कहना चाहे कोई जज़्बात कहेगा कैसे,क्यों न समझे के मुहब्बत की जुबाँ होती … Read more

हर दिशा खूब जगमगानी है

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* मिल के दीपावली मनानी है।हर दिशा खूब जगमगानी है। मुल्क में आज शादमानी है।सिर्फ़ और सिर्फ लनतरानी है। इसकी लम्बी नहीं कहानी है।चार दिन की ही तो जवानी है। हदसे ज़्यादा बढ़ी गरानी है।सबकी आँखों में आज पानी है। काम होता नहीं हक़ीकत में,वादा हर इक यहाँ ज़ुबानी है। … Read more