आइना उन्हें जो दिखाने पे आ गए
विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ हम आइना उन्हें जो दिखाने पे आ गये,पलभर में उनके होश ठिकाने पे आ गये। एहसास जब हुआ उन्हें अपनी शिकस्त का,वो दोस्ती का हाथ बढ़ाने पे आ गये। दिन में बने थे आप चिराग़ों के ख़ैरख़्वाह,रात आँधियों से हाथ मिलाने पे आ गये। जिनके लिये मुहाल थीं मेरी बुलन्दियां,पे पस्तियों में मुझको … Read more