आइना उन्हें जो दिखाने पे आ गए

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ हम आइना उन्हें जो दिखाने पे आ गये,पलभर में उनके होश ठिकाने पे आ गये। एहसास जब हुआ उन्हें अपनी शिकस्त का,वो दोस्ती का हाथ बढ़ाने पे आ गये। दिन में बने थे आप चिराग़ों के ख़ैरख़्वाह,रात आँधियों से हाथ मिलाने पे आ गये। जिनके लिये मुहाल थीं मेरी बुलन्दियां,पे पस्तियों में मुझको … Read more

कहाँ बचा आदमी!

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* किस तरह से कहूँ फिर भला आदमी।आदमी को रहा जब सता आदमी। आदमी में कहाँ है बचा आदमी।जानवर से भी बदतर हुआ आदमी। जल ज़मीं आसमां शैल जंगल तलक,हर जगह आजकल है बसा आदमी। एक ढर्रे पे चलता मिला हर कोई,ढूंढता फिर रहा हूँ नया आदमी। हर घड़ी मन … Read more

है समन्दर आइना

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दे रहा चक्कर पे चक्कर आइना,आइना दर आइना दर आइना। आसमां भी जिसमें चेहरा देख ले,है ज़मीं पर वो समन्दर आइना। आइने से पूछा तू है क्यों उदास,रो दिया सर को झुका कर आइना। बंद आँखें देखती हैं दूर तक,जागता है दिल के अन्दर आइना। अपने ऐबों से न होना बेख़बर,देखते रहना बराबर … Read more

मंज़र नहीं देखे जाते

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* बाढ़ में डूबे हुए घर नहीं देखे जाते।तर बतर आज के मंज़र नहीं देखे जाते। सख्त सरकार के तेवर नहीं देखे जाते।सर पे लटके हुए ख़ंजर नहीं देखे जाते। खु़श्क से जाम व सागर नहीं देखे जाते।इतने ग़मगीन से मंज़र नहीं देखे जाते। घर के होते हुए भी लोग … Read more

बच्चियाँ रोती है

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान)************************************ कहीं पर सिसकियाँ रोती है,कहीं पर, हिचकियाँ रोती है। बेरहम हो गया जमाना देखो,अब तो यहां, बच्चियाँ रोती है। बिन सैलानी, है समन्दर सूना,साहिल पर, कस्तियाँ रोती है। गली-गली,हर राहें सूनी-सूनी,मौजों के बिन मस्तियाँ रोती है। चारों तरफ जहां नफरत फैली,भाईचारे बिन बस्तियाँ रोती है। खाने वाला,जहां कोई न ‘जैदि’,वहां दौलतमंद हस्तियाँ … Read more

नफरतें दरकिनार करते रहो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* खास का इंतिजार करते रहो।कुल ज़माने से प्यार करते रहो। जिस तरह हो बुहार करते रहो।दूर रस्तों से खार करते रहो। फैसला हाथ में है मुंसिफ के,आप अपनी गुहार करते रहो। दायरा गर तुम्हें बढ़ाना है,नित नया इक करार करते रहो। प्लान अपना बढ़ा के आगे तुम,मशविरों पर विचार … Read more

है लचर आदमी

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* बा ख़बर आदमी।बा असर आदमी। बे असर ही रहे,बे ख़बर आदमी। लड़ रहा रात दिन,इक समर आदमी। कुछ नहीं कर सके,है लचर आदमी। चाहता हर कोई,खुशनज़र आदमी। आदमी का बने,हमसफर आदमी। झेलता बद असर,बद नज़र आदमी॥ परिचय : अब्दुल हमीद इदरीसी का साहित्यिक उपनाम-हमीद कानपुरी है। आपकी जन्मतिथि-१० मई १९५७ और जन्म … Read more

जला रहा बादल

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* ओ मेघा रे.. आग दिल में जला रहा बादल।प्रीत मन में जगा रहा बादल। घन गरज ही सुना रहा बादल।आब लेकर न आ रहा बादल। आसमां को सजा रहा बादल।खूब जां को सता रहा बादल। है नहीं दूर तक कहीं सब्ज़ा,भू का आँचल सुखा रहा बादल। खेत सूखे पड़े … Read more

बेरुख़ी अच्छी नहीं

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचना शिल्प:क़ाफ़िया-ई स्वर, रदीफ़-अच्छी नहींबहर २१२२, २१२२, २१२२, २१२ दोस्ती रक्खो सभी से दुश्मनी अच्छी नहीं।और अपनों से कभी भी बेरुख़ी अच्छी नहीं। देखकर अन्याय को प्रतिकार भी ना कर सके,ऐसी भी इंसान में है बुजदिली अच्छी नहीं। ज़िन्दगी जीने की खातिर लक्ष्य निर्धारित करो,गर नहीं मकसद कोई वो ज़िन्दगी अच्छी … Read more

कहीं डगर भी हो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* सीधी-सच्ची कहीं डगर भी हो।साथ अच्छा-सा हमसफ़र भी हो। शब अँधेरी की अब सहर भी हो।उनको मेरी ज़रा ख़बर भी हो। रोज़ बनवाइये महल ऊँचे,बीच उनके मगर शजर भी हो। घूम आओ तमाम दुनिया पर,आमजन की सदाख़बर भी हो। बात हैरत की है मगर सच है,जान देकर कोई अमर … Read more