यही है अधिकार…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. आज देश का अधिकारबना हमारा संविधान,रक्षा करेगा यहीहम सभी का यही है अधिकार। गणतंत्र के मोती बनसंविधान की रक्षा करेंगे हम,सबको अपना हक मिलेगा,हम सभी का यही है अधिकार। आजाद भारत का सबसे बड़ा रक्षक है,हमारा अपना संविधानजीवन जीने का अधिकार दे … Read more

खुशियों को मिल-जुल कर मनाएं

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. आओ सब मिलके,जन गण मन गीत गाएँगणतंत्र दिवस की खुशियों को,मिल-जुल कर मनाएं। राष्ट्रीय त्योहारों पर,तिरंगे को फहराएंआओ सब मिलकर,जन-गण-मन गीत गाएंगणतंत्र दिवस की खुशियों कोमिल-जुल कर मनाएं। हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई,आपस में सब भाई-भाईभारत माता है,हम सबकी माईफक्र से हम सब,सर ऊपर उठाएँगणतंत्र दिवस … Read more

तू तो बस मन की गाथा

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ कैसे करूँ मैं तेरी व्याख्या!कैसे कहूँ मैं तेरी कथा! तू तो बस मन की गाथा,तू तो बस आँखों का आँसू। झरने जैसे बह निकले,तुम आँखों की गलियों से। शब्द-शब्द भी जोडूं तो,तुम ना मिले मेरे मन में। जब भी याद आते हैं वह,पर आँखों से तुम बहते हो। गोद में तेरे सिर … Read more

गणतंत्र दिवस की ज्योति उजियारी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* संविधान की ज्योति उजियारी, भारत-भाग्य की है रखवाली,तिरंगा ऊँचा, स्वप्न सँजोए, गणतंत्र-ध्वजा जगमग न्यारी।समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, मानवता की उजली चिंगारी-सार्वभौम भारत की पहचान, संविधान की ताक़त भारी॥ स्वस्थ लोकतंत्र की यह आधारशिला, जन-जन की हितकारी,मत-सम्मान, जन-सम्मति, मर्यादा, लोक-नीति की फुलवारी।न्याय, नीति, नैतिक साहस, राष्ट्र-चरित्र की धवल तैयारी-एक अखंड, समरस … Read more

वेद हमारी पूँजी

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** भविष्य का प्रहरी है, संस्कार हमारी कुंजी है,इसे बचाकर रखना है, जो वेद हमारी पूंजी है। लौट चलें वेदों की ओर, जो राही भटक रहे हैं,जिसने इसका पालन किया, वही तो संभल रहे हैं। वेदों को संकलित किया था ऋषि वेद व्यास ने,इसके चार प्रकार बताए प्राचीन ऋषि वेद व्यास ने। ये … Read more

नदी पार की चिट्ठी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ प्यार रहता हमारा नदी के पार,चिट्ठी में रहता प्रेम का सारकरवट लेकर कटती रातें,कैसे-कैसे बीती दिल की बातेंआँखें चार होती बड़े प्यार से,कितने-कितने दिन देखेनदी के इस पार आँखेंआज देंगे चिट्ठी नदी के उस पार जाकर। आज आई रानी की चिट्ठी,हर पंक्ति में प्रेम भरा थाप्रेम को मेरे समझो तुम रानी,पढ़कर चिट्ठी … Read more

आगे ना जाने क्या होगा… ?

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** ज़िंदगी एक वसंत (स्पर्धा विशेष)… हे सखी, पतझड़ बीता वसंत आया,पर पूर्ववत् उल्लास ना लायाशहर में आया सिसक-सिसक के,क्यों गाँव में चली हवा मचल के। कटते जा रहे, सब वन-उपवन,जलती धरा और बढ़ती तपनप्लास्टिक से फैल रहा प्रदूषण,बिगड़ रहा है प्रकृति सन्तुलन।अगर सचेत ना मानव होगा,तो आगे ना जाने क्या होगा… ? … Read more

यादों में…

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** तुम यादों में शामिल हुए मेरे ऐसेकि दिल में मेरे तुम ही तुम बस गए हो,फ़लक से ज़मीं तक निगाहें घुमातीक़िस्मत भी मेरी एक तुम हो गए हो। ख़ुदा को तलाशा कि कुछ बात कर लूँपर साया ख़ुदा का भी तुम हो गए हो,आँखों में जब से बसाया है तुमकोख़ुशियों की-ग़म की … Read more

तिरंगा गर्व जगाए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आसमां तिरंगा लहराए, जन-गण मन में गर्व जगाए,आज़ादी का दीप जलाए, साहस सत्पथ ध्वज दिखलाए। चहुँ सीमा पर संकल्प अडिग, वीरता का अद्भुत संधान,अमर शहीदों गाथा गाए, भारत माँ का मान बढ़ाए। हरित-भरित धरती मुस्काए, अन्नपूर्णा सुख बरसाए, किसानों का श्रम … Read more

फर्क नहीं पड़ता

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता,संक्रमण क्या है यह उसे नहीं पता!उत्तरायण, दक्षिणायन, पुण्यकालया महापुण्यकाल, दान, उपवास, भजन या कीर्तन,उसे इन सबका कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। धरातल पर मानव के अस्तित्व के,पहले से ही, करोड़ों साल पहले सेवह तो केवल हाइड्रोजन जलाता है,बाकी के सभी अर्थ मानव द्वारा निर्मित हैंउत्तरायण … Read more