मेरा भारत मेरा गौरव

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा भारत मेरा गौरव, मेरा भारत महान है,जिस पर मैं वारी जाऊँ, इसका अभिमान है। यहाँ की नर्मदा, यहाँ की यमुना यहाँ की गंगा,सबकी मान्यता पूजनीय माता के समान है। यहाँ पर जन्में गांधी-नेहरू-तिलक- सुभाष जी,भारत को आजादी दिलाई, पावन पर्व समान है। आर्यावर्त भारत जम्बुदीप भारतखण्डे पाटलिपुत्र,‘सोने की चिड़िया’ इंडिया हिमवर्ष … Read more

धनलिप्सा 

राधा गोयलनई दिल्ली**************************************** किसान लगातार मुझे अपनी कुदाल से खोदता रहा,मैं कुछ नहीं बोलीजानती थी कि… यह…लोगों का पेट भरने के लिये,फसल उगाने के लिये…बीज रोपने के लिये…मेरी गुड़ाई कर रहा है। पर उस खनन माफिया को क्या कहूँ ?जो ज्यादा धन कमाने की चाहत में…मेरा लगातार खनन कर रहा है। उस भू माफिया को क्या कहूँ ?जो … Read more

दो बोल मीठे

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ कभी भी बोलचाल बंद व तेवर तीखे मत करना,संवाद में जब कठोरता व नफरत पनपती हैतो ग़लत बातों का शोर, हमें जल्दी सुनाई देता है,इसलिए हमें सिर्फ दो बोल मीठे ही बोलना चाहिए। आज-कल तू-तू मैं-मैं में विश्वास टूटते हुए देखा है हमने,कोई को ‘अच्छा’ बोलना ठीक नहीं लगता है … Read more

पिता ही तो सर्वस्व

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरी असली प्रेरणा….. पिता पर हमें गर्व होता है,पिता ही तो सर्वस्व होता है। पिता की डांट, पिता की मार,यही तो उनका प्यार होता है। जिस तरह एक कुम्हार बर्तन को,बाहर-भीतर से पीट रहा होता है पिताजी बनाते हैं हमें सामाजिक,कुम्हार तो घड़ा बना रहा होता है। पिताजी रोज सुबह-सवेरे उठ जाते … Read more

मानव और दानव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मानव दानव क्यों बने, सोचें सब यह बात।जगमग दिन खिलता रहे, कभी न हो फिर रात॥ मानव मानव ही रहे, रीति-नीति हों संग।क्योंकर दानव बन मनुज, करे स्वयं से जंग॥ मानव के तो संग हों, मानव के गुणधर्म।सदा सोच पावन रहे, मानव से ही कर्म॥ दानव बनना पाप है, बहुत बड़ा … Read more

बात हमारी मान लो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रखो सदा सद्भावना, कर सेवा  संसार।बात हमारी मान लो, है दुनिया परिवार॥ मिट जाएँ सब भेद अब, छोड़ो झूठा भार।बात हमारी मान लो, परहित जीओ  यार॥ प्रेम-सुधा से सींचिए, हर मन का उद्गार।बात हमारी मान लो, करो जगत श्रृंगार॥ दीन-दुखी के कष्ट को, दूर करो  परिवेश।बात हमारी मान लो, दो पावन    संदेश॥ करुणा से जग खिल उठे, हो जीवन विस्तार।बात हमारी मान लो, यही लोक उपहार॥ … Read more

हर रास्ते पर चलने का साहस दिया

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** मेरी असली प्रेरणा… मेरी असली प्रेरणामेरे पिता हैं,जिन्होंने मुझे केवल रास्ते नहीं दिखाएबल्कि हर रास्ते पर चलने का साहस दिया। उन्होंने मुझे यह नहीं सिखाया,कि जीवन हमेशा आसान होगा-उन्होंने सिखाया कि कठिन रास्तों पर भी,अपने कदमों को स्थिर रखना चाहिए। जब मैं गिरने से डरती थी,उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर नहीं,मुझ पर विश्वास … Read more

अनिर्वचनीय शिव

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************* हे! महादेव महेश्वर, हे! सर्वेश्वर त्रिनेत्रधर गौरीवरहे! वृषभेश्वर पिनाकधर गौरीवर। श्राप दियो शिव कश्यप ऋषि ने, मारोगे तुम पुत्र स्वयं काभक्तन हित स्वीकारा श्राप भी, हे! करुणेश्वर त्रिशूलधर गौरीवर। कालकूट विष पीकर शिव ने, औषधि में बस भंग जो पी लीजग पिए मस्ती दोष धरे शिव, हे! विश्वेश्वर डमरूधर गौरीवर। पाप करन से डरे … Read more

विभाजन का दर्द

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** विभाजन का दर्द वे ही समझेंगे, जिसने अपनों को वारा हैकश्मीर से कन्याकुमारी तक, भारत को सबने संवारा है मिली आजादी से देश, अब लगता कितना प्यारा है,बहती गंगा-जमुना सी नदियाँ, यहाँ की पावन धारा है लहराता है जब तिरंगा, देखो लगता कितना प्यारा है। बलिदानियों के बलिदान से, हुआ देश आजाद हमारा हैएक पल को छपक गई देशभक्तों … Read more

शीघ्र आ जाइए

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचना शिल्प-८, ८, ८,६… हर पल भारी लगे,हर साँस तुम जगे,प्रतीक्षा में बीते पल,शीघ्र आ जाइए॥ मिट जाएगा अंधेरा,होगा फिर से सवेरा,प्रतीक्षा का फल मीठा,टेर लगाइए॥ पल में उमंग जगे,हिया धड़कन लगे,प्रतीक्षा के बीच गीत,गुनगुनाइए॥ कैसे कहूँ मन बात,तड़पत दिन-रात,अगन-सी जल रही,इसे बुझाइए॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में … Read more