हमारी जिम्मेदारी है गणतंत्र

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक… संविधान जो हमारा हक लिख देता है,जो हर नागरिक के न्याय समानता की बात करता है। गणतंत्र केवल उत्सव ही नहीं है,ना यह सिर्फ झंडों की शान भर ही है। यह आम आदमी के जीवन का रोज का सम्मान है,जब खेत में पसीना बहता है। किसान और … Read more

विष और अमृत

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** समुद्र मंथन हुआ था जिसमेंनिकले रत्न अनेकबाँट लिया मिल सुर-असुरों नेनहीं किया था कोई भेद,पर जब पहला रत्न था निकलाबड़ा विषैला कालकूट विषग्रहण नहीं उसको कर पायाविषय बड़ा गंभीर था खेद। महादेव तब आगे आयेलिया उन्होंने गरल उड़ेलकंठ में रखा उसे आपनेनीलकंठ का यह था खेल,और बहुत से रत्न थे निकलेपर जब … Read more

स्वतंत्र अधिकार

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… हर पल रहे मन में देश के लिए तमन्ना,ईश्वर से है यही दुआ हर सूरत मुस्काए यहाँ। देश का हर जवान करता रहे देश की सेवा,दूर कर दूँ ताकतवर तानाशाही की बेला। आजाद भारत में फहराता रहे तिरंगा हरदम,स्वतंत्रता से जिए हर नागरिक यहाँ। … Read more

आम आदमी को है संविधान पर अभिमान

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. संविधान के गठन में लगे ३ थे साल,२६ जनवरी १९५० में लागू बेमिसालअधिकारों, कर्तव्यों की अद्भुत है मिसाल,आम्बेडकर जी की अगुआई में लगे हैं सालों-साल। संविधान ने दिया हमें है लोकतंत्र बड़ा विशाल,मौलिक अधिकार संरक्षित करता बनकर ढालआम आदमी को मिलती … Read more

गीत खुशी के गाऊँगा

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* युवावस्था जो चली गई है, उसको वापस लाऊँगा।बूढ़ा हूँ तो क्या हुआ, अब मैं गीत खुशी के गाऊँगा॥ जिंदादिली जीने का जज्बा, कूट-कूट कर भरता हूँ,प्रात: काल जल्दी उठकर मैं, निशदिन योगा करता हूँ।हिम्मत करके और साहस से, मैं तो तीर्थ जाऊँगा,युवावस्था जो चली गई, उसको मैं वापस लाऊँगा…॥ … Read more

हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ?

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आज हमारा देश स्वतंत्र है,पर क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ?कहने को आज लोकतंत्र है,पर क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ? मेरे ख्याल से तो नहीं, बिलकुल नहीं,हम आज भी परतंत्र हैंभले ही अंग्रेजों से मुक्ति मिल गई,हम आज भी नहीं स्वतंत्र … Read more

पुण्य धरा है हिन्द

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आन बान अरु शान, तिरंगा मान हमारा।हमको इस पर गर्व, हमें प्राणों से प्यारा।तीन रंग का मेल, शान से यह लहराता।चक्र सुशोभित मध्य, सभी के मन को भाता॥ केसरिया है रंग, शौर्य को ये बतलाता।श्वेत रंग है मध्य, हृदय में शान्ति बढ़ाता।हरित वर्ण … Read more

याद ही रह जाती

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कौन-सी बात कैसीकब-कहाँ हो जाती है,कभी सोचा नहीं जोबात सुनी जाती है। जैसी चाही थी कभीदेखी न वैसी दुनिया,छोड़ कर जो गया बसयाद ही रह जाती है। अपना जब छोड़ कोईजाता है इस दुनिया से,कैसे खुद की हँसीहोठों से चली जाती है। जिसको देखा था अभीकल तलक हँसते-गाते,आज मिट्टी वो बनेआह निकल … Read more

‘पंजाब केसरी’ अमर बलिदान तुम्हारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अग्नि-स्फुलिंग बन जाग उठे, जब लाला जी रण में आए,जुल्मों की हर काली रात, लौ दीप-शिखा बन चहुँ छाए।जन-जन के अन्तर्मन जागी, स्वतंत्र चेतनता की धारा-भारत माता के चरणों में, बस शीश सदा ही झुक जाए॥ लाठी-घावों को सहकर भी, दृढ़ पग लाला आगे बढ़ते,सत्य-अहिंसा की ढाल लिए, क्रांतिवीर … Read more

यूजीसी:देश पराया

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* मेरी सब्र की उम्मीद का पैमाना, धीरे-धीरे टूट रहा है,नक्कारखाने में आवाज़ तूती की, कोई भी न सुन रहा हैनहीं जरूरत देश को मेरी, ऐसा मुझको लग रहा है,चला जाऊंगा परदेस एक दिन, ख्याल दिल में उठ रहा है। सवर्ण होना गुनाह है मेरा, मुझे देश समझा रहा है,अज्ञानी को दे … Read more