आज नारी लाचार नहीं

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. आज नारी सिर्फ नारी है,देवी का अवतार नहींअग्नि परीक्षा दे जो चुपचाप,आज नारी वह सीता नहीं। करती है वो प्रश्न भी,और करती प्रतिकार भीजुए में दाँव पर जो लग जाए,आज नारी वह द्रोपदी नहीं। उठाती आवाज खुद के लिए,बेवजह सजा स्वीकार्य नहींमर्यादा की जंजीरों में जकड़ी,पत्थर बन … Read more

स्त्रियाँ

वंदना जैनमुम्बई(महाराष्ट्र)************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… वो आधी चंद्रमा-सी है,आधी–अधूरी मुस्कान लिएपूरा दर्द छुपाया करती है,वो सूर्य-सा तेज लेकरचंद्रमा को रिझाया करती है। दुपट्टा सर पर रख कर वो,जब मंदिर जाया करती हैप्रार्थनाओं और आभारों की,टोकरी सजाया करती हैफूल चुन–चुन कर विश्वास की,माला पिरोया करती है। सींच कर परिवार के वट वृक्ष को,वो मन्नत … Read more

एक थी लड़की बेचारी…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** एक थी लड़की बेचारी, हिम्मत नहीं हारने वाली,वह थी अपनों की सतायी, प्यार को तरसी उम्र सारी। वह सीधी-सादी लड़की, उम्र सारी प्यार को तरसी,वह अपनों की नहीं दुलारी, वह तीखे नैन-नक्श वाली। सभी उसे बेवकूफ बना जाते, वह लड़की भोली-भाली ।सबको माफ कर देती, छल-कपट नहीं जानने वाली। सबको अपना बनाने … Read more

उठो नारी, बंधन तोड़ो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… उठो नारी, अब बंधन तोड़ो, नये युग का संधान करो,साहस की मशाल जलाकर नये जीवन का निर्माण करो। अन्यायों की दीवारों पर चढ़ सत्य-प्रकाश बिखेरो तुम,स्वाभिमान की ध्वजा उठाकर उज्ज्वल सत्पथ का गान करो॥ उठो नारी, अब बंधन तोड़ो, पुन: अपनी शक्ति जगाओ,धरती, अम्बर, … Read more

दोनों सरहदें

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* सरहदों पर चौकन्ने खड़े जवान, बाहरी दुश्मनों से जूझ रहे हैंभीतर उधम मचाते शैतान, नमक-हरामी करने पर तुले हुए हैं। किसकी जान बचाने खातिर, निशंकित सैनिक सीमा पर डटे हैं ?घरेलू उपद्रवी तो सैनिकों की पीठ में,छुरा भोंकने मचल रहे हैं। कैसी विडम्बना देशभक्तों के दिल में, रह-रहकर समाई हैपरायों से … Read more

मैं हूँ वरदान

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… मैं नारी हूँ,मत करना अपमानमैं ही जीवनदायिनी,मैं हूँ एक वरदान। मैं नारी हूँ,माँ बनकर देती संतान,पालन-पोषण मैं करती,मैं हूँ वृक्ष समान। मैं नारी हूँ,भारत की पहचानयमराज से भी छीन लाती,जो अपने पति के प्राण। मैं नारी हूँ,कोमल फूल समान,वक़्त पड़े तो थाम लूँ,बरछी, तीर-कमान। मैं नारी हूँ,निर्बल-अबला … Read more

परचम लहराए पुरजोर

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. कामिनी जब बनी थी दामिनी,तब वो सृष्टि को बदल डाली। काली बनी थी झांसी की रानी,झुकी नहीं, मौत को गले लगाया। सावित्री ने यमराज को हराया,वरदान से पति को बचाया। सहनशीलता की मूर्ति तू रमणी,पति के साथ वन में रही तू रमणी। उर्मिला ने भवन में ही … Read more

एक नई शक्ति

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… नारी संघर्ष से सदैवमुकाबला करती रहती,सुख-दु:ख की परिभाषा समझती हैवो समझती है भूख की शक्ति को,जिसे पाने के लिए अपने बच्चों को देती खुद भूखी रहकर निवालासमाज कहता- पुरुष प्रधान होता है,समाज की सफलता के पीछे तो नारी काकठिन संघर्ष छिपा होता है। जो हक की … Read more

आहिस्ता-आहिस्ता

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आहिस्ता-आहिस्ता ही प्रेम का दीपक जलता है,अपने ही संस्कार मन को पावन करता है। मन में प्रेम रहे तो सारी दुनिया प्रेममयी लगती है,हर दु:ख जीवन में नई-नई राहें बनाता है। नई उमंगों का आगमन ही जीवन है,आहिस्ता-आहिस्ता ही फूलों-सा खिलने लगता है। संघर्ष ही जीवन को आगे बढ़ना सिखाता है,आहिस्ता-आहिस्ता … Read more

‘स्त्री’ देती जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘स्त्री’,धरा समानकरना नहीं तिरस्कार,देती जीवनवरदान। ‘नारी’,जन्म संतानपालन-पोषण करती,भू समानअभिभावक। ‘औरत’,जगत पहचानकरती जीवन संघर्ष,चुप रहतीपुष्प। ‘महिला’,कोमल मनवक़्त पर मैदान,भिड़ जातीरक्षा। ‘वनिता’,दुर्गा, कालीनहीं निर्बल-अबला,कभी ‘कामिनी’जानकी। ‘रमणी’,संस्कृति वाहककरती सदा भला,सृजन धुरीसंवेदनशील। ‘भार्या’,साथ चलतीप्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,उड़ाती विमानसफलता। ‘जननी’,करती भागीदारीनिभाती हर परम्परा,रूप शक्तिपरिवार। ‘कांता’,सौन्दर्य-लक्ष्मीलुटाती ममता अपार,दर्द सहतीमुस्कान। ‘अर्धांगिनी’,कहलाती माँपर रहती पीड़ित,अनेक भेदभावविडम्बना। ‘मानवी’,सम्भालती घरहै रूप शक्ति,रखती … Read more