नाव पानी में है भक्ति प्रवाह

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** नाव पानी में है तो बहुत बढ़िया है,नाव में पानी है नाव डूब जाती है।जीव इस जग में है तो बहुत बढ़िया है,जीव में जग है, प्रभु भक्ति छूट जाती है॥ तुम हो संसार में संग परिवार के,नाम प्रभु जी का भूल अन्न-जल पी रहे।शिव हैं शिवधाम में संग … Read more

ज्योति-पर्व दीपावली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)… माटी दीपक दिव्य आज तो, उसको आज जलाना है।अगणित दीप जलाकर भू का, सारा तिमिर मिटाना है॥ माटी की छोटी काया ने, गीत सुपावन गाया है,उसका लड़ना तूफानों से, सबके मन को भाया है।उजियारा तो प्रमुदित दिखता, मौसम बहुत सुहाया है,दीपों ने मंगल गाया है, … Read more

पितृ नमः

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* श्राद्ध, श्रद्धा और प्रेम (पितृ पक्ष विशेष)… आशीषें देने धरती पर, पितर पहुँच ही जाते।श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते॥ पितर देव रूपों में होते, सदा भला ही करते,आशीषों से सदा हमारा, पल में घर वो भरते।साथ सदा ही देखो अपने, शुभ-मंगल ले आते,श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, … Read more

जीवन बनता है अनमोल

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* श्राद्ध, श्रद्धा और हम (पितृ पक्ष विशेष)… पितरों का आशीष हमेशा, देता है सुख अपरम्पार।खुशियाँ ही खुशियाँ मिल जाती, मिलता है जीवन का सार॥ उनकी ही कृपा से मिला, यह जीवन बनता है अनमोल,जीवित रहते उनसे बोलो, दो मीठे प्यारे से बोल।उनकी छाया से होता है, इस पूरे जग का … Read more

मन है पंछी

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मन तो है एक ऐसा पंछी,पंख बिना उड़ता रहता है।लाख कहें मन को हम पागल,पर मानव मन की सुनता है॥ मन में हों जब अटल इरादे,फिर बाधाएं कितनी आयें,टस से मस नहीं होता मनवा,बादल-बिजली खूब डरायें।मन-सा साथी साथ चले जब,मंजिल के सपने बुनता है॥पर मानव मन… मन है चेतनता का दरपन,मन से … Read more

बिरज में कृष्ण आए

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* ढम-ढम ढोल बजते हैं, बिरज में कृष्ण आये हैं।घटाएँ घिर रही काली, देवकी ने श्याम जाये हैं॥ चमकती बिजलियाँ नभ में, भादव की रात है काली,समय यह रोहिणी का है, बाग में झूमती डाली।घड़ी शुभ अष्टमी की है, नभ में मेघ छाये हैं,ढम-ढम…॥ चले वसुदेव मथुरा से, कृष्ण को शीश … Read more

मन शिव पुकारे

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** सावन बरस रहा मेरे द्वारे।लगन लगी मन शिव को पुकारे॥ कड़क रही है ‌बिजुरी ऐसे,तड़प रही ‌मैं बिरहन जैसे।काल की गणना साँस-साँस में,अब तो पधारो द्वार हमारे।लगन लगी मन…॥ जब से खेल माया पहचाना,मन से कोई‌ न अपना माना।चित्त-प्राण शिव कह के व्याकुल,छिन-दिन पल-पल सांझ-सकारे।लगन लगी मन…॥ सावन बरसे … Read more

ॐ की महिमा

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* ‘अ उ म’ से मिलकर बनता, ओम शब्द ये सबका प्यारा है।हम सब इसको मिलकर जपते, ‘ॐ’ शब्द ये न्यारा है॥ परम सत्य का है प्रतीक, सृष्टि का पालन संहार करें।गलत कार्य यदि करते हैं हम, पापों का यह भार हरे।।शक्ति है अपार ओम में, यह आकाशी तारा है,अ उ … Read more

फिर सावन आ गया

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव जी को जल चढ़ाने फिर से सावन आ गया है।मेरे मन को मेघ बन के फिर बरसना भा गया है॥ शिव को सावन मास भाये और भायें वर्षा बूँदें,भक्त लीन हैं भक्ति में अब अपनी पलकें मूंदें।हर कोई अभिषेक करने मंदिर में आ गया है,शिव जी को जल … Read more

सावन का मौसम है…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* सावन का मौसम है, बिना घटा घनघोर।बदरा हैं बारिश बिन, सूखे धरती चहुं ओर।कोयलिया नहीं कुहुके, नाचे ना वन में मोर।नदियाँ बहतीं जल बिन, झीलें करतीं न विभोर। अब नहीं होते मन के मंथन, भाई बहन बिन रक्षाबंधन।भव्य दिखें पंडाल बहुत पर, भाव बिना हों शिव के पूजन।आरती होती लेकिन, … Read more