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मैं और मेरे घर की खिड़कियाँ

कविता जयेश पनोत
ठाणे(महाराष्ट्र)
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ये खिड़कियाँ,
और खिड़कियों से झांकते
वो शाम के नजारे।
कुछ खास रिश्ता है हमारे बीच,
सांझ होते ही मेरे मन की
हलचल उस खिड़की से आती,
हवा संग तालमेल मिला जाती है।
हर रोज खिड़की के पास बैठ,
आसमान में उड़ते उन परिदों से
उस परिंदे की याद आ जाती है,
जो सुबह अपनी उड़ान भरने
आँखों में चन्द सपने लिए,
उड़ जाता है और मेरे हाथों में
एक इंतजार का टुकड़ा दे जाता है।
बस उसके आने के इन्तजार में,
मैं खिड़कियों के साथ वक्त गुजारा करती हूँ।
जी बड़ा ही पुराना रिश्ता है हमारा,
जहाँ बैठ घंटों मैं अपने दिल की
हलचल को शान्त करती हूँ।
मैं और मेरे घर की खिड़की,
दोनों एक-दूसरे से मौन
घंटों बात किया करते हैं॥

परिचय-कविता जयेश पनोत का बसेरा महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई स्थित खारकर अली रोड पर है। १ फरवरी १९८४ को क्षिप्रा (देवास-मप्र)में जन्मीं कविता का स्थाई निवास मुम्बई ही है। आपको हिन्दी,इंग्लिश, गुजराती सहित मालवी भाषा का ज्ञान भी है। जिला-ठाणे वासी कविता पनोत ने बीएससी (नर्सिंग-इंदौर,म.प्र.)की शिक्षा हासिल की है। आपका कार्य क्षेत्र-नर्स एवं नर्सिंग प्राध्यापक का रहा,जबकि वर्तमान में गृहिणी हैं। लेखन विधा-कविता एवं किसी भी विषय पर आलेखन है। १९९७ से लेखन में रत कविता पनोत की रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। फिलहाल स्वयं की किताब पर काम जारी है। श्रीमती पनोत के लेखन का उद्देश्य-इस रास्ते अपने-आपसे जुड़े रहना व हिन्दी साहित्य की सेवा करना है। इनकी दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक,कोई एक नहीं, सब अपनी अलग विशेषता रखते हैं। लेखन से जन जागरूकता की पक्षधर कविता पनोत के देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-
‘मैं भारत देश की बेटी हूँ,
हिन्दी मेरी राष्ट्र भाषा
हिन्दी मेरी मातृ भाषा,
हिन्द प्रचारक बन चलो,
कुछ सहयोग हम भी बाँटें।