कुल पृष्ठ दर्शन : 275

You are currently viewing गाँव की मिट्टी

गाँव की मिट्टी

अनिल कसेर ‘उजाला’ 
राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)
*************************************************

गाँव की मिट्टी याद बहुत आती है,
हर ज़ख्म की दवा बन जाती है।
होती है न जात-पात,न छोटे-बड़े,
सबकी आँखों में खुशियाँ लाती है।

पीपल-बरगद की छाँव में,
मेले लगते हैं गाँव-गाँव में।
होती जब किसी को पीड़ा,
आते हैं सब दौड़े एक पाँव में।

गाँव की मिट्टी की खुशबू आती है,
खुशियाँ हृदय में हजार लाती है।
ग़ैर होता नहीं कोई भी गाँव में,
सभी में अपनापन जगाती है।

मेरे गाँव की मिट्टी बुलाती है,
चेहरे की चमक ये बढ़ाती है।
मिट्टी में खेलते बचपन की यादें,
जीवन में नई उमंग ले आती है॥

परिचय –अनिल कसेर का निवास छतीसगढ़ के जिला-राजनांदगांव में है। आपका साहित्यिक उपनाम-उजाला है। १० सितम्बर १९७३ को डोंगरगांव (राजनांदगांव)में जन्मे श्री कसेर को हिन्दी,अंग्रेजी और उर्दू भाषा आती है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी)तथा पीजीडीसीए है। कार्यक्षेत्र-स्वयं का व्यवसाय है। इनकी लेखन विधा-कविता,लघुकथा,गीत और ग़ज़ल है। कुछ रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सच्चाई को उजागर करके कठिनाइयों से लड़ना और हिम्मत देने की कोशिश है। प्रेरणापुंज-देशप्रेम व परिवार है। सबके लिए संदेश-जो भी लिखें,सच्चाई लिखें। श्री कसेर की विशेषज्ञता-बोलचाल की भाषा व सरल हिन्दी में लिखना है।

Leave a Reply