लघुकथा महोत्सव…
भोपाल (मप्र)।
कथा परिवार में लघुकथा कथा आकार में छोटी, लेकिन प्रभाव में बड़ी सदस्य है। लघुकथा की लोकप्रियता उसके लघु आकार के कारण नहीं, बल्कि तीव्र प्रहार और प्रभाव के कारण हुई है।
यह बात साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कही, जो हिंदी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष में अकादमी द्वारा आयोजित लघुकथा महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित रहे। उन्होंने कहा कि समय के साथ लघुकथा के कथ्य और कथानक में बदलाव आवश्यक है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि लघुकथा शोध केंद्र, भोपाल की निदेशक कांता राय और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामवल्लभ आचार्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. संजय सक्सेना, गोविंद पाल, सरोज दवे, डॉ. गिरजेश सक्सेना, गोकुल सोनी व जया केतकी सहित नगर के ५० लघुकथाकारों ने विविध विषयों पर केंद्रित उत्कृष्ट लघुकथाओं का वाचन किया। ज्यादातर रचनाएं नागरिक कर्तव्य, परिवार भाव व सामाजिक एकता जैसे विषयों पर केंद्रित रहीं।
संचालन केंद्र के सचिव घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ ने किया।