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कल्पकथा ‘सनातन रक्षा शंखनाद’ बना साहित्यिक चेतना का आह्वान

सोनीपत (हरियाणा)।

कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा आयोजित २५८वीं साप्ताहिक आभासी काव्य गोष्ठी साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का प्रेरक उत्सव बन गई। ‘सनातन रक्षा शंखनाद’ विषय पर केंद्रित इस विशेष आयोजन में विभिन्न अंचलों से प्रतिष्ठित सृजनकारों ने अपने ओजस्वी एवं चिंतनपरक काव्यपाठ द्वारा सनातन संस्कृति के संरक्षण, राष्ट्रीय अस्मिता तथा मानवीय मूल्यों के प्रति जनमानस को जागृत करने का सशक्त संदेश दिया।
   संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि दिनेश कुमार दुबे ने अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि ज्योति प्यासी ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिरस एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। इसके उपरांत विषयानुकूल काव्यधारा प्रवाहित हुई, जिसमें श्री डांगे, श्री दुबे, हेमचंद्र सकलानी, शोभा प्रसाद, नंदकिशोर बहुखंडी, सुनीता रानी ममगाई, भास्कर सिंह ‘माणिक’, रमापति मौर्य, श्याम बिहारी मिश्र, मंजू शकुन खरे अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, राधाश्री शर्मा और पवनेश मिश्र आदि ने अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्तियों से सनातन परम्परा, राष्ट्रधर्म, सांस्कृतिक स्वाभिमान तथा सामाजिक समरसता के विविध आयामों को प्रभावशाली स्वर दिए।

    कार्यक्रम के समापन चरण में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के सामूहिक गायन ने आयोजन को राष्ट्रीय गौरव के भाव से अनुप्राणित कर दिया।
      प्रभावी संचालन भास्कर सिंह ‘माणिक’ ने गरिमामयी शैली में किया। संस्थापक राधाश्री शर्मा ने सभी के प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित किया।