सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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गर्मी की छुट्टी आई है,
बच्चों में मस्ती छाई है।
एक साथ सब मिल कर गाते,
ढोलक, झाँझ, मृदंग बजाते
लेकर बॉल खेलते पिट्टू,
ऊँच-नीच फिर घोड़ा-टट्टू।
मजे खूब सब दिनभर करते,
होते शाम कहानी कहते
ग़ज़ब की शक्ति देखी इनमें,
एक से बढ़कर एक नमूने।
हल्ला-गुल्ला धूम-धड़ाका,
मस्ती-मौज सब बम पटाका
चलो सिखाएँ इनको गाना,
साथ-साथ बच्चा बन जाना।
कैसे रहते साथ बताना,
उन्हें प्यार से गले लगाना।
बच्चे होते मन के सच्चे,
ये तो मिट्टी जैसे कच्चे॥