सेवा में,
माननीय गवर्नर,
भारतीय रिजर्व बैंक,
केन्द्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुम्बई – ४००००१
विषय: डाक विभाग द्वारा नेट बैंकिंग सेवा में राजभाषा हिन्दी की जान-बूझकर की जा रही अनदेखी, भाषाई भेदभाव एवं पिछले ९ वर्षों की शिकायतों पर हठधर्मिता के विरुद्ध शिकायत।
संदर्भ (विगत ९ वर्षों का संघर्ष):
🔹नवीनतम शिकायत: DPOST/E/२०२६/०००२२०४ (दिनांक १५/०१/२०२६)
🔹वर्ष २०२० की लम्बित शिकायतें: DPOST/E/२०२०/१२०१९, DPOST/E/२०२०/१२३९७
सहित अन्य
🔹वर्ष २०२१ की लम्बित शिकायतें: DPOST/E/२०२१/०००३२, DPOST/E/२०२१/०२७४० सहित अन्य
🔹राजभाषा विभाग द्वारा अग्रेषित: JSOLD/E/२०२१/००१४८
🔹अनुस्मारक: वर्ष २०१७ से अब तक दिए गए लगभग २५ से अधिक अनुस्मारक।
महोदय,
मैं अत्यंत क्षोभ के साथ आपका ध्यान डाक विभाग के बैंकिंग प्रभाग द्वारा राजभाषा नियमों, संसदीय राजभाषा समिति की सिफारिशों एवं राष्ट्रपति के आदेशों के निरंतर और संगठित उल्लंघन की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। डाक विभाग अपने ग्राहकों के साथ हर स्तर पर भाषाई भेदभाव कर रहा है।
मैं वर्ष २०१७ से, यानी पिछले ९ वर्षों से डाक विभाग की नेट बैंकिंग वेबसाइट (ebanking.in diapost.gov.in) को द्विभाषी (हिन्दी और अंग्रेजी) बनाने हेतु निरंतर शिकायतें कर रहा हूँ। वर्तमान स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है:
◾संवैधानिक उल्लंघन: राष्ट्रपति जी के २ जुलाई २००८ के स्पष्ट आदेशानुसार सभी सरकारी वेबसाइटों का राजभाषा हिन्दी में होना अनिवार्य है। डाक विभाग का पोर्टल आज भी केवल अंग्रेजी में उपलब्ध है, जो सीधे तौर पर आदेश की अवहेलना है।
◾नियामक मानकों की अनदेखी: भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, वित्तीय समावेशन हेतु बैंकिंग सेवाएँ स्थानीय और राजभाषा में उपलब्ध होनी चाहिए। डाक विभाग का यह रवैया करोड़ों हिन्दी भाषी ग्राहकों के अधिकारों का हनन है।
◾हठधर्मिता एवं गैर-जिम्मेदाराना उत्तर: मेरी नवीनतम शिकायत (DPOST/E/२०२१/ ०००२२०४) को १९/०१/२०२६ को यह कहकर बंद कर दिया गया कि “सुझाव नोट कर लिया गया है”। यह अत्यंत खेदजनक है कि ९ वर्षों और दर्जनों शिकायतों के बाद भी विभाग इसे केवल एक ‘सुझाव’ मान रहा है, जबकि यह ‘कानूनी अनिवार्यता’ है।
◾अधिकारियों का नकारात्मक रवैया: राजभाषा नियम १९७६ के नियम ५ का उल्लंघन करते हुए हिन्दी में की गई शिकायतों का उत्तर भी अंग्रेजी में देकर शिकायतें बंद कर दी जाती हैं।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है, कि डाक विभाग को बैंकिंग नियामक के नाते निर्देशित करें कि वह अपनी समस्त डिजिटल बैंकिंग सेवाओं (नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप और भर्ती पोर्टल) को तत्काल प्रभाव से राजभाषा हिन्दी में उपलब्ध कराए। विगत ९ वर्षों से इस विषय को लटकाने वाले उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। देश के नागरिकों के भाषाई अधिकारों और राजभाषा की गरिमा की रक्षा हेतु आपके ठोस हस्तक्षेप की प्रतीक्षा है।
धन्यवाद।
भवदीय,
अभिषेक कुमार
रायसेन (म.प्र.)
प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार।
सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार।
सचिव, वित्तीय सेवाएँ विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार।
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)