नीमच (मप्र)।
यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे डॉक्टर साहब के साथ कार्य करने का अवसर मिला। उनकी पुस्तक ‘शेष स्मृतियाँ’ हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि है। इस पुस्तक की प्रवेशिका में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लिखा है ‘विद्वत्ता और भावुकता का ऐसा योग संसार में अत्यंत विरल है। मेरे जैसे विद्यार्थी अपने अध्ययन के दौरान ताज और फतहपुर सीकरी जैसे निबन्ध से परिचित रहे हैं। सब तरह से योग्य होते हुए भी उन्हें ३-३ बार नामित होने के बावजूद पद्मश्री से सम्मानित नहीं किया गया।
मप्र साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित डॉ. रघुबीरसिंह स्मृति समारोह में बोलते हुए ख्यात पुरातत्व और इतिहासविद कैलाश चन्द्र पांडे ने यह बात कही। समारोह में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् जिला मंदसौर के अध्यक्ष नारायण भावसार ने अकादमी को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन्होंने डॉक्टर साहब की स्मृति में समारोह आयोजित किया। नीमच के सुधी श्रोता भी बधाई के पात्र हैं, जो बड़ी संख्या में इस आयोजन के साक्षी बने।
इस कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। सरस्वती वन्दना दीपशिखा रावल ने प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुरेन्द्रसिंह शक्तावत, अकादमी के राकेशसिंह और प्रो. आशीष सोनी ने किया। स्वागत भाषण डॉ. सुरेन्द्रसिंह शक्तावतr ने दिया। इस अवसर पर डॉ. रति मिश्रा की पुस्तक ‘मानव संपदा भविष्य का पोषण’ का विमोचन विद्याभारती के प्रहलाद राय गर्ग की विशेष उपस्थिति में किया गया।
समारोह में आमंत्रित कवियों द्वारा कवि धर्मेन्द्र शर्मा के संचालन में रचनाओं का पाठ किया गया। प्रारम्भ हास्य कवि नारायण भावसार के एआई समिट में हुए शर्मनाक प्रदर्शन पर तीखे व्यंग्य से हुआ। अतुल दवे, दीपशिखा रावल, मनीष गोस्वामी और ओम यादव आदि ने बेहतर रचना पड़ी।
संचालन और आभार कार्यक्रम के समन्वयक और साहित्य परिषद् के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने व्यक्त किया।