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तिरंगा गर्व जगाए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…

आसमां तिरंगा लहराए, जन-गण मन में गर्व जगाए,
आज़ादी का दीप जलाए, साहस सत्पथ ध्वज दिखलाए।

चहुँ सीमा पर संकल्प अडिग, वीरता का अद्भुत संधान,
अमर शहीदों गाथा गाए, भारत माँ का मान बढ़ाए।

हरित-भरित धरती मुस्काए, अन्नपूर्णा सुख बरसाए, कि
सानों का श्रम अविरत गाए, जीवन खुशियाँ रस भर लाए।

मेहनत से दमके स्वप्न स्वर्ग, ध्वज श्रद्धा का अनुपम विधान,
हर कण-कण में आशा समाए, स्वर्णिम अतीत यश रच जाए।

कला-संस्कृति रंग जमाए, शांति-प्रेम अनुराग सजाए,
विविध भाषा-स्वर धर्म मिलाए, मानवता का मूल्य ढाए।

करुणा की अविरल सरिता जल, हिय संवेदन नारी विधान,
वसुधैव कुटुम्बकम् गाए, तिरंगा भारत नभ लहराए।

जन-गण-मन स्वर बन जाए, लोकतंत्र शुभ दीप जलाए,
गणतंत्र पर्व पर मन भाए, समता ममता भाव जगाए।

न्याय-सत्य सुख का पावन व्रत, कर्तव्य निष्ठा का सम्मान।
अमर विजय की कीर्ति पताका, शान तिरंगा नभ लहराए॥

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥