सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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‘रामनवमी’ विशेष…
नवरात्र, नव संवत्सर आया,
नमोस्तुते ! अनुष्ठान भाया।
आत्मिक सुधि जड़त्व मिटाएं,
रामायण स्व चरित अपनाएं।
दर्शन हरि श्री राम विराजे,
नमन पद पंकज नित निहारें।
रामनवमी शुभ दिन मनाएं,
अवतरण दिवस मंगल गाएं।
भजन-कीर्तन रौनक लाएं,
यज्ञ, पाठ दान-पुण्य लुभाएं।
‘राम नाम’, धुन मंगलकारी,
मंगलकारी दुःख संभारी।
‘अल-बेला’ ! बेला; गंवाया,
हाथ मलता; जीवन बिताया।
उमरिया दिन-दिन बीती जाए,
‘डोर साँस’ की तनती जाए।
त्यज मिज़ाज, अदब सर्वव्यापी,
परत्र सहाय हे मनुज! पापी।
राम स्तवन ‘सरस प्याला’,
पी कर श्रित हुआ मतवाला।
राम रसिक नित राम उभारे,
रसना नित रघुनाथ उच्चारे।
देवल-देवल राम सजे हैं,
राम-सिया परिवार सजे हैं।
भक्त हनुमंत अद्भुत गाथा,
सुन्दर काण्ड’ अद्भुत गाथा।
रामनवमी लगे भंडारे,
जय-जयकारे राम पधारे।
पतित पावन, त्रिलोकी द्वारे,
अजर-अमर, अविनाशी द्वारे।
अधम, शरणागत हम तुम्हारे,
जन्म-जन्म के पाप उतारे॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।