महिला रचनाकार सम्मेलन…
कोटा (राजस्थान)।
जीवन मूल्यों में आ रही कमी और परिवार में संवाद शून्यता जैसे विषयों को लेखन का माध्यम बनाना चाहिए। राष्ट्र और समाज को आईना दिखाने का काम साहित्यकार ही कर सकते हैं।
उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि सहकारिता विभाग के विधिष्ठ सहायक डॉ. सूरज सिंह नेगी ने यह बात कही। अवसर था कोटा में रंगीतिका संस्था व राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से रविवार को मदर टेरेसा स्कूल में आयोजित कोटा संभागीय महिला रचनाकार सम्मेलन का, जिसमें अन्य वक्ताओं ने कहा कि लेखिकाएं वर्तमान समय और समाज के अनुरूप राष्ट्र सेवा को प्रेरित करने और समाज सुधार के लिए लिख कर जन आंदोलन बनाएं।
अध्यक्षता करते हुए अकादमी के सचिव बसंत सिंह सोलंकी ने कहा कि कहा कि महिलाएं पठन की वृत्ति बढ़ाएं और सार्थक साहित्य लिखेंगी तो पाठक भी मिलेंगे और पहचान भी अपने-आप मिलेगी। आपने ऐसे आयोजनों पर साहित्यिक पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाने और पुस्तक चर्चाओं के आयोजन का सुझाव दिया। साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही, समीक्षक विजय जोशी और सत्रों के अतिथि डॉ. सरिता जैन, श्यामा शर्मा, वीणा अग्रवाल, प्रकाश चंद सोनी व डॉ. अशोक तंवर आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।अदिति शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
संचालन महेश पंचोली, प्रीतिमा पुलक, डॉ. इंदु बाला शर्मा एवं अनुराधा शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। रीता गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।