अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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प्यारा गुलाब,
बोले बहुत कुछ
सबको भाता।
साथ में काँटा,
बचना है जरूरी
ज़िंदगी में यूँ।
अच्छे में बुरे,
ये सिखाए ज़िंदगी
जैसे गुलाब।
सदा लुभाए,
मन को भाए फूल
रंग निराले।
‘फूलों का राजा’,
कहलाता गुलाब
लाल-सफेद।
लाल गुलाब,
मिले जीवनसाथी
प्रेम प्रतीक।
है ज़िंदगी भी,
देखो रंग अनोखे
कईं हिसाब।
कभी खजाना,
कभी हर सू गम
कभी गुलाब।
पीला गुलाब,
निभा लो बस दोस्ती
सीधा हिसाब।
बनो फूल से,
हो सबकी पसंद
जैसे गुलाब॥