सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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तुम यादों में शामिल हुए मेरे ऐसे
कि दिल में मेरे तुम ही तुम बस गए हो,
फ़लक से ज़मीं तक निगाहें घुमाती
क़िस्मत भी मेरी एक तुम हो गए हो।
ख़ुदा को तलाशा कि कुछ बात कर लूँ
पर साया ख़ुदा का भी तुम हो गए हो,
आँखों में जब से बसाया है तुमको
ख़ुशियों की-ग़म की वजह हो गए हो।
ख़यालों में मैंने तुम्हें जब भी देखा,
ख़ुदा के फरिश्ते भी तुम हो गए हो।
तन्हाई ने मुझको तोहफ़ा दिया है,
आँखों के अश्कों में तुम बस गए हो॥