रायपुर (छ्ग)।
साहित्य महोत्सव २०२६ के दूसरे दिन की संध्या को स्व. विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रद्धांजलि अर्पित की।
ख्यातिलब्ध गीतकार बुद्धिनाथ मिश्रा (देहरादून) ने अटल जी से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार दिल्ली के कवि सम्मेलन में अटल जी मुझे सुनने के लिए अंतिम समय तक बैठे रहे। कविता समाप्त होने पर उन्होंने मंच पर आकर मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि तुमने हिंदी की लाज रख ली। श्री मिश्रा ने ‘तुम क्या गए, नखत गीतों के असमय अस्त हुए..’ मुक्तकों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अजय साहेब ने ग़ज़लों से समां बांधा तो अमन अक्षर ने ‘उन्हीं आँखों को चश्मे की बहुत ज्यादा जरूरत है, जिन्हें माँ-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता’ जैसे भावपूर्ण गीत पढ़े। त्रिलोक चंद्र महावर, ग़ज़लकार हर्षराज हर्ष ने हीं रचनाएँ पढ़ी। कवयित्री स्वाति खुशबू ने सरस्वती वंदना के साथ काव्य पाठ का शुभारंभ किया।