संजीव एस. आहिरे
नाशिक (महाराष्ट्र)
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अभी-अभी गेहूँ की फसल कट गई है। कितनी रौनक थी खेतों में, अचानक रौनक चले जाने से मिट्टी उदास, हताश हो गई है। मिट्टी को लहराती बालियों की रह-रहकर याद आ रही है। बालियों का झूमना, हवाओं से बातें करना, अपनी ही मस्ती में अठखेलियाँ करना, मिट्टी से कुछ-कुछ बतियाना, हवाओं के साथ मिलकर गाना और न जाने क्या-क्या याद आ रहा है मिट्टी को…। फसल की याद में मिट्टी मुँह में पल्लू ठूंस-ठूंसकर जैसे रो रही है। कितनी जी-जान लगाकर पोसा था फसल को। शुरू में २ कोमल पंख जब मेरे अंक में उग आए थे, उस ननिहाल को कितना संजोया था मैंने। पौधे थोड़े बड़े हुए, तो उन नाजुक पातों पर ओस के अनगिनत मोती कैसे रोज तैर आते थे। उन दिनों प्रातः का स्वर्णिम समां कैसा मनमोहक होता था। हरी पातों पर कितने-कितने मोती, और पूरब की कोमल किरण कैसे मिलने आती थी ओस के मोतियों को। किरण और ओस मिलकर सतरंगी किरणों से समां कितनी ही देर तक जगमगा उठता। दुनिया के सारे रत्न, हीरे, मानक, पाचु सब फीके लगते थे… उस जगमगाहट के सामने। नवरत्नों का भार पालते-पालते ननिहाल बालियाँ जब निकलने लगी कितना विहंगम समां था वो! बड़ी होकर बालियाँ पवन से गुफ़्तगू करने लगी। सरसराती पवन बालियों से मस्ती करने लगी, तब उस संगीत से मेरा रोम-रोम झूम उठा था।
फिर दूधिया दाने भरने का मौसम आया और फसल पककर बड़ी हुई तो आज ये विदाई ? बालियों के विरह से मिट्टी की आँखें भर आयी। मिट्टी उदास होती रही।
मिट्टी की उदासी को भांपकर आस-पड़ोस के पेड़ों पर सात भाई पंछियों का एक झुंड आया और सामूहिक गान से मिट्टी का दिल बहलाने लगा। तरह-तरह के गीत गाने लगा। दूसरे किसी एक पेड़ पर बहुत सारी मैनाओं ने मिलकर मिट्टी को बहलाया, फुसलाया। थोड़ी देर में मयूरों का एक झुंड आकर काफी देर तक मिट्टी को सूंघता रहा। २ भारद्वाज मिलकर एक के बाद एक अलट-पलट कर नाद करने लगे। सूरज ढला, तब साथ ही प्राची से चंद्रमा निकलकर अपनी शीतल किरणों से मिट्टी को नहलाने लगा। अंधेरा भगाते हुए मिट्टी को ढांढस बंधाने लगा।
खेत की मेढ़ पर खड़ा होकर कितनी ही देर तक मैं मिट्टी को और प्रकृति की लीला को देखता रहा। चंद्रमा काफी ऊपर आया, तब सहलाती चंद्रकिरण के साथ झिलमिलाती तारकाएं भी पृथ्वी को छूने की कोशिश करने लगी थी। मेरे कदम आशियाने की ओर बढ़े, तब मैंने खेत की मिट्टी उठाकर ललाट पर लगाई और धीरे-धीरे कदम बढ़ाता चलने लगा।
परिचय-संजीव शंकरराव आहिरे का जन्म १५ फरवरी (१९६७) को मांजरे तहसील (मालेगांव, जिला-नाशिक) में हुआ है। महाराष्ट्र राज्य के नाशिक के गोपाल नगर में आपका वर्तमान और स्थाई बसेरा है। हिंदी, मराठी, अंग्रेजी व अहिराणी भाषा जानते हुए एम.एस-सी. (रसायनशास्त्र) एवं एम.बी.ए. (मानव संसाधन) तक शिक्षित हैं। कार्यक्षेत्र में जनसंपर्क अधिकारी (नाशिक) होकर सामाजिक गतिविधि में सिद्धी विनायक मानव कल्याण मिशन में मार्गदर्शक, संस्कार भारती में सदस्य, कुटुंब प्रबोधन गतिविधि में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ विविध विषयों पर सामाजिक व्याख्यान भी देते हैं। इनकी लेखन विधा-हिंदी और मराठी में कविता, गीत व लेख है। विभिन्न रचनाओं का समाचार पत्रों में प्रकाशन होने के साथ ही ‘वनिताओं की फरियादें’ (हिंदी पर्यावरण काव्य संग्रह), ‘सांजवात’ (मराठी काव्य संग्रह), पंचवटी के राम’ (गद्य-पद्य पुस्तक), ‘हृदयांजली ही गोदेसाठी’ (काव्य संग्रह) तथा ‘पल्लवित हुए अरमान’ (काव्य संग्रह) भी आपके नाम हैं। संजीव आहिरे को प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में अभा निबंध स्पर्धा में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार, ‘सांजवात’ हेतु राज्य स्तरीय पुरुषोत्तम पुरस्कार, राष्ट्रीय मेदिनी पुरस्कार (पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार), राष्ट्रीय छत्रपति संभाजी साहित्य गौरव पुरस्कार (मराठी साहित्य परिषद), राष्ट्रीय शब्द सम्मान पुरस्कार (केंद्रीय सचिवालय हिंदी साहित्य परिषद), केमिकल रत्न पुरस्कार (औद्योगिक क्षेत्र) व श्रेष्ठ रचनाकार पुरस्कार (राजश्री साहित्य अकादमी) मिले हैं। आपकी विशेष उपलब्धि राष्ट्रीय मेदिनी पुरस्कार, केंद्र सरकार द्वारा विशेष सम्मान, ‘राम दर्शन’ (हिंदी महाकाव्य प्रस्तुति) के लिए महाराष्ट्र सरकार (पर्यटन मंत्रालय) द्वारा विशेष सम्मान तथा रेडियो (तरंग सांगली) पर ‘रामदर्शन’ प्रसारित होना है। प्रकृति के प्रति समाज व नयी पीढ़ी का आत्मीय भाव जगाना, पर्यावरण के प्रति जागरूक करना, हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु लेखन-व्याख्यानों से जागृति लाना, भारतीय नदियों से जनमानस का भाव पुनर्स्थापित करना, राष्ट्रीयता की मुख्य धारा बनाना और ‘रामदर्शन’ से परिवार एवं समाज को रिश्तों के प्रति जागरूक बनाना इनकी लेखनी का उद्देश्य है। पसंदीदा हिंदी लेखक प्रेमचंद जी, धर्मवीर भारती हैं तो प्रेरणापुंज स्वप्रेरणा है। श्री आहिरे का जीवन लक्ष्य हिंदी साहित्यकार के रूप में स्थापित होना, ‘रामदर्शन’ का जीवनपर्यंत लेखन तथा शिवाजी महाराज पर हिंदी महाकाव्य का निर्माण करना है।