कुल पृष्ठ दर्शन : 15

‘विफलता’ तुम मत आना

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
************************************************

विफलता तुम मत आना मेरी गली,
हम सफलता की सहेली हैं
हमने हर विफलता को भगाया है,
दर्द के पन्नों को फाड़ा है।

गुलाब-सी खिली सफलता की,
पंखुरियों को जीवन ने सजाया है
वर्णन करती हूँ सबसे मैं सफलता का,
विफलता तू ना आना मेरी गली।

चरित्र मेरा सफल है,
क्यों मैं विफलता से डरूँ ?
खिले फूल हैं जीवन में,
गुलाब के नीचे भी हैं काँटे।

क्यों डरूँ विफलता जैसे काँटों से,
यह जीवन में आए भी तो
फूल से नीचे ही रहेंगे।
जीवन मेरा मधुर है,
क्यों डरूँ विफलता से मैं॥